Sunday, April 26राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

दादी का गांव

डॉ. आभा माथुर
उन्नाव (कानपुर)
********************

सुबह हो गई मीठी-मीठी
लाली छाई चारों ओर
चीं-चीं, चूं-चूं, काँव-काँव का
सारे नभ में छाया शोर
आशु उठा अँगड़ाई लेकर
जल्दी उसे नहाना है

नाश्ता कर बस्ता लेकर
जल्दी स्कूल जाना है
तभी उसे आ गई याद
कल दीदी की कही बात
कल से गर्मी की छुट्टी है
एक मास की छुट्टी है

मन उड़ गया सैर करने
लगा गगन में मन उड़ने
“पक्षी चूँ-चूँ क्यों करते हैं?
क्या यह हमसे कुछ कहते हैं?”
उसने पूछा कौए भाई
तुम काँव-काँव क्यों करते हो?
जो कहना है स्पष्ट कहो,
संकेतों में क्यों कहते हो?”

कौआ बोला काँव-काँव
आशु चलो दादी के गाँव
गाँव में दादी रहती हैं
राह तुम्हारी तकती हैं
कल से गर्मी की छुट्टी है
एक मास की मस्ती है

आशु गया मम्मी के पास
बोला “मम्मी सुन लो बात
कल से गर्मी की छुट्टी है
एक मास की मस्ती है

दादी के घर जाना है
नदी में ख़ूब नहाना है
बागों में फूल खिले होंगे
पेड़ों पर आम लगे होंगे
ख़ूब आम मैं खाऊँगा
थोड़े तुम्हें खिलाऊँगा
मम्मी पहले झल्लाईं
फिर थोड़ा सा मुस्काईं

बोलीं “मेरी बात सुनो
ज़िद्दी बच्चे नहीं बनो
तुम्हें मौल लेजाऊँगी
पिज़्ज़ा भी खिलवाऊँगी”
लेकिन बच्चा मचल गया
गरदन से माँ की लटक गया

मॉल तो अक्सर जाते हैं
गाँव मगर कब जाते हैं?
गाँव में दादी रहती हैं,
राह हमारी तकती हैं,
वह भी पापा की मम्मी हैं
जैसे तुम मेरी मम्मी हो,

जब टूर पे क्लास को दीदी ने
सारा लखनऊ घुमाया था
मैं सुबह सवेरे चला गया था
देर रात को आया था
तब तुम कितना घबराई थीं!
खाना भी खा नहीं पाई थीं
जब लौट के मैं घर आया था
तब तुम्हें चैन आ पाया था

दादी पापा की मम्मी हैं
वह भी तो घबराती होंगी
क्या हम सब से दूर रहकर
वह कभी चैन पाती होंगी?
जब कभी गाँव हम जाते हैैं
वह कितनी ख़ुश हो जाती हैं!
लड्डू, पूरी, आम, जामुन
वह हमको ख़ूब खिलाती हैं

आख़िर बच्चे की जीत हुई
मम्मी उसकी ज़िद मान गईं
बच्चे की बातें सच्ची थीं
इस कारण मम्मी हार गईं
पापा तो यह ही चाहते थे
लेकिन वह कह ना पाते थे
बच्चे की बातें सुन-सुनकर
वह फूले नहीं समाते थे

फिर कुछ दिन बाद ही दादी
के गाँव में वह सब बैठे थे
सब ख़ुश थे और आशु बाबू
आम के पेड़ पे बैठे थे …

परिचय :- उन्नाव (कानपुर) निवासी आभा माथुर ज़िला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य (डिप्टी डायरेक्टर के समकक्ष) पद से सेवा निवृत्त हैं आपने प्रधानाचार्या, डी.आई.ओ.एस., डायट प्राचार्य आदि पदों पर रहकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में सेवा की।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻😊💐💐💐

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *