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जीवन का पड़ाव

किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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जीवन के इन पन्नों पे
लिखते हैं हम दासता?
खुशी के पल लिखूं
या ग़मों की दास्ताँ।
बचपन के दिन थे
नहीं बोझ नहीं ग़म कोई,
हंसते-खेलते बीत गया
नहीं बोझ था जीवन में।

आगे बड़े किशोर अवस्था
दबिश रहती अंकुश अपार
नये जीवन की शुरुआत?
“वयस्क की गिनती की
शुरुआत” एक-एक कर
आता जाता है दुनिया का
झमेला, कुछ पल सुकून के
ढूंढते है हम पर
वक्त निकल जाता था।

कभी शुभ यात्रा कर लेते थे
मन में आता थोड़ा सुकून
अच्छे लोग, अच्छे विचार,
नया उत्साह, नई प्रभात।
खूब मौज में बीते कुछ दिन पल,
पर फिर आए वही डंडा-गुल्ली
खड़े थे स्वागत में
गमों को देने वाले?
पूरा जीवन निकल गया
सुख-दुख की परछाई में।

यह कोई एक मन की बात नहीं
यह सैकड़ो दिलों की कहानी है,
थोड़ी कम थोड़ी ज्यादा
यही जीवन की कहानी है।
दुख तो हर पल खड़ा एक पांव पर,
सुख की खोज हमे करना है,
जहां मिले एक पल की खुशियां
ठहर वहां हमें जाना है।

चलते-चलते बढ़ते-बढ़ते हर
उम्र का पड़ाव पार करते है हम,
अब समय को हर पल जीना है,
उसमें कुछ कर गुजरना है,
अच्छे विचार अच्छा कर्म,
मनन और चिंतन में मन,
जप ध्यान योग का सहारा,
प्रेम, भक्तिभाव, यात्रा का नजारा।

मिलेगी खुशियां देखो अपार
जीवन मै आनंद अपार
जीवन है दुखों का ढेरा,
खुशियो का नही है बसेरा,
जन्म से लेकर मृत्यु तक
कहानी तो चलती ही रहेगी।
अपना जीवन अपने हाथ
सार्थक कर लेना नहीं तो बेकार।

परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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