
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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जो लोग आपको नहीं समझते- उन्हें मत सममझाइए। समुंदर खारा है-खारा ही रहेगा, उसमें शक्कर मत मिलाइए। हम अक्सर खून की जांच करवाकर देखते हैं, कि शरीर में कैल्शियम और विटामिन घट तो नहीं रहे हैं। मेरे ख्याल से कभी ऐसे अपने व्यक्तित्व की भी जाँच करवा लेनी चाहिए। क्या पता दया, करुणा, मानवता, दोस्ती और इंसानियत भी घट रही हो। याद रखिए- तारीफ करने वाला आपकी स्थिति देखता है और परवाह करने वाला आपकी परिस्थिति देखता है। *भुट्टा बेचने वाला फूट-फूट कर रोया, जब एक एक मार्डन लड़की ने कहा- अंकल एक हैंडिल वाला पापकॉर्न देना।* हमारे साथ अक्सर वही लोग चलते हैं, जिन्हें हमसे फायदा नहीं बल्कि हमारी फिक्र होती है।
१९९० में लड़कियाँ डरती थी कि सास कैसी मिलेगी ? २०२० में सास डर रही है, कि बहू कैसी मिलेगी ? देखिए अजीब संजोग कि जो लड़कियाँ १९९० में डर रही थी, वो आज २०२६ में भी डर रही है। *राजनीति एक खेल है, चालाक लोग इसे खेलते हैं और मूर्ख लोग दिनभर इस पर चर्चा करते हैं।* सुखी होने के चक्कर में जो जिंदगी भर दुखी रहता है, उसका नाम आदमी है। आजकल सुबह होते ही जिम्मेदारियाँ इतने प्यार से उठाती हैं कि अलार्म की जरूरत ही नहीं पड़ती है। पहले पड़ोसी हमारे घर का हिस्सा हुआ करते थे, आजकल घर ही लोग ही एक-दूसरे से पड़ोसी जैसा व्यवहार करते हैं।
*अब बंगाल की जनता कठोर हो गयी है, उसके दिल में अब ममता नहीं रही।* क्या जमाना आ गया है, नजर बचाने वाली चीजों को ही नजर लग गई है- हरी मिर्च १६० रु. किलो और नींबू २०० रु. किलो। कभी किसी सब्जी खरीदती महिला को को गौर से देखिए – वो उठाएगी करेला, भाव भिंडी का पूछेगी और खरीदेगी लौकी। हमेशा इंसान के शब्दों पर नहीं, बल्कि उसके इरादों पर गौर करें। कोई डांटकर हमारा भला चाहता है और कोई मुस्कराकर हमारी जड़ें काटना चाहता है।
*याद रखिए दुश्मन हमेशा अपनों में से ही पैदा होते हैं क्योंकि अपनों को ही अपनों की खुशी और कामयाबी बर्दाश्त नहीं होती।*
आधी ज़िंदगी बीत गई, लेकिन अब पता चला है कि बारहवीं के बाद बी.ए. करना उतना जरूरी है जितना मरने के बाद तेरहवीं करना। होता कुछ नहीं, बस आत्मा को शांति मिल जाती है। *आजकल पैसे ने साबुन की जगह ले ली है। दाग कपड़े पर हो या चरित्र पर, सब धो डालता है।* अगर आपके पास ‘इगो’ है तो आप केवल मुँह फुला सकते हैं, पर अगर इनो है तो आप केक, ढोकला, भटूरा आदि सब कुछ फुला सकते हैं, इसलिए ईगो नहीं, इनो रखिए।
*पँख परिंदों पर ही अच्छे लगते हैं। इंसान के लगते ही बर्बादी शुरू हो जाती है।* याद रखिए, जो चीज चीज आपको चैलेंज करती है, वही चेंज करती है। जो बातें हम पी जाते हैं, वो बाते हमें खा जाती हैं। पुराने जमाने का १ रुपया आज के १०० रुपए के बराबर था। ठीक ऐसे ही मेरे दसवीं-बारहवीं के ४०, ४५ नम्बर आज के ९५, १०० नम्बर के बराबर है। अजीब है दुनिया, यहाँ हजारों अच्छाइयों की रसीद नहीं मिलती, परन्तु एक एक गलती का पूरा हिसाब रखा जाता है। फोन चक्रव्यूह है, तो हम सब अभिमन्यू-घुस तो गए हैं, पर निकलने में वीरगति को प्राप्त हो जाएंगे। हमेशा सबसे प्यार कीजिए, क्योंकि प्यार करने वालों को कभी हार्ट अटैक नहीं आता है; क्योंकि उनका दिल किसी और के पास होता है। रोज प्रार्थना करना हमारी आदत में शामिल होना चाहिए, केवल संकट के समय का सहारा प्रार्थना नहीं समझना चाहिए। *पैसे अगर पेड़ों पर उगते, तो हमें कौन-सा मुफ्त मिल जाने थे? अनार-आम भी तो पेड़ों पर उगते हैं, कभी मिले हैं मुफ्त में!* जिन-जिन को प्यार में धोखा मिला है, वे अपना नाम ‘प्रधानमंत्री बेवफा योजना’ में दर्ज करा लें, पेंशन मिलेगी।
अपने ही अपनों को काटते हैं,
और बाहर एकता का ज्ञान बाँटते हैं।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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