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चलने को चलता हूँ

इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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चलने को चलता हूँ,
मगर धीरे-धीरे चलता हूँ।
मंजिल की जल्दी नहीं मुझे,
रास्तों को पढ़ता चलता हूँ।

हर मोड़ पर रुक कर मैं,
खुशबू को महसूस करता हूँ।
पत्थरों की खुरदरी सतह को,
छूकर मैं मुस्कुराता हूँ।

दुनिया की इस दौड़-धूप में,
मैं अपनी लय में जीता हूँ।
थकान के गहरे साये में भी,
सुख की बूँदें पीता हूँ।

तेज़ चलने वाले निकल गए आगे,
मैं पीछे रहकर ही सही,
हर पल की सुंदरता को,
अपनी आँखों में भरता हूँ।

चलने को चलता हूँ,
मगर धीरे-धीरे चलता हूँ।

परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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