छंदमुक्त – क्षणिकाएँ
सरला मेहता
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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छंदमुक्त - क्षणिकाएँ
भूख-
मासूमा खड़ी चौराहे पे
हाथ में ले कटोरा
एक साया खाना लिए
ले गया अँधेरे में
भरपेट खिलाया उसे
सहलाया पुचकारा
ख़ुद भी भूखा था
जी भरकर मिटाई
अपनी देह की भूख
एक दीया-
मत जलाना दीए
किसी भी दिवाली पर
न राहें या चौराहें
न घर न बाहर
न मंदिर या मस्ज़िद में
न यहाँ न वहाँ
व्यर्थ उजाले की न हो चाह
याद से लगाना एक दीया
सरहद के शहीदों के नाम
क्या हो-
प्रदूषित सृष्टि
जल-थल-नभ अशुद्ध
हरीतिमा विलुप्त
मरुथल विस्तृत
पशु संपदा संतप्त
नदियाँ अतृप्त
जल-जीव मृत
दम घोटती मलय
पंछी विहल
बचे पर्यावरण
क्या हो भवितव्य
न से नः तक-
न ना से नदी व नारी
नि से निशदिन व्यस्त
नी से नीयत शुद्ध
नु से नुमाइश न करे
नू से नूतन सदा ही
ने से नेकी ही करे
नै से नैतिकता निभाए
नो ये कभी नहीं कहे
नौ से नौनिहाल द...






















