जोशीमठ की त्रासदी
रामेश्वर दास भांन
करनाल (हरियाणा)
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तपस्थली रहा है जो महात्माओं की,
ऐसा है आस्था और भक्ति का ये स्थान,
राजधानी रहा है कत्यूरी राजाओं की,
ऐसा खुबसूरत है ये पावन स्थान,
छः ऋतुएं बन जाती हो दिन में जहां,
ऋतुंभरा के नाम से जाना जाता है ये स्थान,
इन्सान की चकाचौंध वाली जिंदगी से,
हार गया है अब ये पावन स्थान,
लाखों लोगों को जीवन दिया जिसने,
आज जमींदोज हो रहा है ये स्थान,
जिसकी धरती कांप रही हो,
सिसक रहा हो सीना जिसका,
अब प्रकृति की त्रासदी,
दिखा रहा है ये स्थान,
जंगलों को जी भर कर काटा,
जल की है धारा बदली हमने,
उसी नादानी के कारण अब,
रौद्र रूप दिखा रहा ये स्थान,
रो रहे पशु पक्षी मानुष,
उजड़ रहा बसैरा जिनका,
जीवन गुज़र बसर के लिए,
मदद की गुहार लगा रहा ये स्थान,
आज त्रासदी भारी झेल रहा,
लेकर अपने सीने पर,
जोशीमठ देवभूमि उत्तराखंड का,
ये पावन प...

























