परमप्रीय
डाॅ. रेश्मा पाटील
निपाणी, बेलगम (कर्नाटक)
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हर मन में तुम्ही बसे हो
सब ग्रंथो का अर्थ हो तुम
हर धर्म का आधार हो तुम
सब पंथो ने किया तुम्हे वर्णित
सब संतो ने किया तुम्हे प्रणीत
सब शास्त्रों के हो तुम्ही कर्णित
निराकार साकार तुम्ही हो
सृष्टि का आभास तुम्ही हो
जीवन का आधार तुम्ही हो
जो पुकारे तुम्हे दिल से
होते हो तुम उसे सहाई
फिर चाहे हो वो कोई प्रणाई
जो प्रेम करे तुम्हें अंतर से
जो प्रेम करे तुम पे ह्रदय से
सुनते हो तुम उसकी दुहाई
फिर चाहे वो तुम्हे किसी रूप में
फिर देखे वो तुम्हे किसी रूप में
आते हो पास उसी रूप में
भूला के उसके सारे अवगुण
लगा लेते हो उसे ह्रदय से
भाग्य उसका किया न जाये वर्णित
ईश्वर पुकारो, अल्लाह कहो
बुलाओ चाहे उसे जिजस
राम कहो, रहीम कहो
कन्हैया कान्हा
मनमोहन पुकारो
रसुलुल्लाह कहो
चाहे महबुबे खुदा कहो
चाहे...






















