पीपल सी बेटियां
सुधा गोयल
बुलंद शहर (उत्तर प्रदेश)
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दीवार में उगे पीपल सी
हो जाती हैं बेटियां
उग आती हैं कहीं भी
हरी भरी सी बेटियां
चाहा था उगाना बेटों को
पर उग आती हैं बेटियां
बिना हवा पानी के भी
जी जाती हैं बेटियां
फिर भी चहकती रहती हैं
दीवार में पीपल सी बेटियां
धूप ताप पानी में भी
मुस्करातीं है पीपल सी बेटियां।
जो थीं कभी आंख का तारा
पिता की राजकुमारियां
शीतल छांह सी कहीं भी
मुस्कराने लगतीं हैं बेटियां।
अपने लिए कहीं भी
स्थान बना लेती हैं बेटियां
झूम लेती हैं हवा के झोंके सी
दीवार में पीपल सी बेटियां।
परिचय :- सुधा गोयल
निवासी : बुलंद शहर (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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