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हिंदी मेरी भाषा
कविता

हिंदी मेरी भाषा

मईनुदीन कोहरी बीकानेर (राजस्थान) ******************** प्यारी - प्यारी सबसे न्यारी मेरी भाषा । हिंदी पर बिन्दी हिंदी प्यारी मेरी भाषा ।। देश - विदेशों मे है जिसका गुणगान । सब से अच्छी सबसे प्यारी मेरी भाषा ।। ज्ञान - विज्ञान का अखूट भण्डार है ये । इसलिए सब जन-जन पढते मेरी भाषा ।। हिंदी पढेगा गर भारत का बच्चा - बच्चा। सम्प्रेषण में भी उपयोगी होगी मेरी भाषा ।। खेल - सिनेमा जगत ने जिसको अपनाया । एकता का पाठ हमें पढ़ाने वाली मेरी भाषा ।। सब भाषाओं के संग जिसने मेल बिठाया । भाषायी-ज्ञान जन-जन तक लाई मेरी भाषा ।। राष्ट्र-भाषा का मान-सम्मान जिसको मिला । देव नागरी लिपि जिसकी वो वैज्ञानिक भाषा ।। सूफ़ी-संत - साहित्यकारों ने जिससे यश पाया । जाति, धर्म-पंथ सब के मुख शोभित मेरी भाषा ।। सविंधान ने जिस भाषा को गौरवान्वित किया । हिंदी दिवस के रुप में जिसे मनाते वो मेरी भाषा ।। ...
शिक्षक
कविता

शिक्षक

मनीष कुमार सिहारे बालोद, (छत्तीसगढ़) ******************** कबो ना हिंसा करन कहय ना शोषण को भरन कहय जो अय सच्ची बातें वाही हरदम ओही करन कहय कदै ना झुठी बात बताई सच्चाई की राह ले जायी मानो खुद वो नईयां होयी जो पथिक को दरिया पार करायी उस गुरु को मैं याद किया करता हूं पग बंदन मैं करता हूं पग बंदन मैं करता है बिन शिक्षक मनु जीवन नाही लागत है वो पशु समानी जो चर चारा वन से आये पशु मनु मे फर्क ना आयी शिक्षा बिन जीवन अधुरायी जबै शिक्षक मनु जीवन आये तबै सबै मे समझ ओ आये कि होनो संतब मिठू वाणी कि होनो ढोंगी अनुनायी उस गुरु को मैं याद किया करता हूं पग बंदन मैं करता हूं पग बंदन मैं करता हूं परिचय :-  मनीष कुमार सिहारे पिता : श्री झग्गर सिंह निवासी : पटेली, जिला बालोद, (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्व...
घर का भेदी लंका ढाए
कविता

घर का भेदी लंका ढाए

अमित राजपूत उत्तर प्रदेश ******************** बहुत सुना था बहुत हो गया किंतु अब ना सहा जाए पहले भी सत्य था अब भी सत्य है कि घर का भेदी लंका ढाए। धोखा देना परंपरा है तेरी फिर तुझ पर भरोसा कैसे किया जाए पहले भी सत्य था अब भी सत्य है कि घर का भेदी लंका ढाए। कलंक है तू विश्वास पर फिर तुझसे क्यों मित्रता की जाए पहले भी सत्य था आज भी सत्य है कि घर का भेदी लंका ढाए। विश्वासघाती की पहचान हो कैसे इस पर विचार विमर्श किया जाए पहले भी सत्य था आज भी सत्य है कि घर का भेदी लंका ढाए। परिचय :- अमित राजपूत उत्तर प्रदेश गाजियाबाद घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक म...
मेरा प्रेम
कविता

मेरा प्रेम

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** बिकने नहीं दूँगा कुछ। पर हम बेच देंगे सब। यही बात में सब को। हर समय कहता रहूँगा।। क्यों न बेचे हम अब। जब आन पड़ है संकट। क्यों ढूँढ़े हम समाधान। मिला है संपत्तियों का अभयदान।। जबतक रहेगी तब तक। उसे बेचते जायेंगें हम। अपना और अपनों का पेट। बिना परेशानी के भर देंगे।। बहुत नसीब लेकर आया हूँ। इसलिए इतनी संपदा मिली। भले बनाया हो औरों ने पर। भोगने का सुख मिला हमें।। पूत कपूत तो क्यों धन का संचय करना। और पूत सपूत तो क्यों धन का संचय करना। करना आता अगर प्रबंध तो नहीं होती कोई परेशानी। और कर लेते समस्याओं का अपने प्रबंधन से समाधान।। अल्ला दे खाने को तो क्यों जाए कमाने को। मिला है सब कुछ हमें बिना हाथ पाव चलायें। तो क्यों जोर दे दिल दिमाग और अपने हाथ पावों पर। इतना तो मिला है विरासत में कि हमारा समय निकल...
वक़्त और मैं’
कविता

वक़्त और मैं’

कीर्ति सिंह गौड़ इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आज और कल में मेरा सब बीत गया जो कभी पीछे मुझसे था वो भी मुझसे जीत गया। हार का दंश मुझे अंदर से निचोड़ रहा था मेरे सपनों का महल फिर भी आगे खड़ा था। एक पल को सोचा हार मान लूँ पर जब गुज़रे रास्ते की दूरी देखी तो लगा कि ख़ुद में थोड़ी और जान डाल दूँ। फिर शुरू किया है मैंने सफ़र एक और बार इस बार मंज़िल ख़ुद कर रही है मेरा इंतज़ार। वक़्त के इम्तिहान भी क्या लाजवाब हैं तब वक़्त की कद्र न की हमने और आज वक़्त के साथ साथ मेरे पाँव हैं। परिचय :- कीर्ति सिंह गौड़ निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा ...
पार्वती नन्दन श्री गणेश
स्तुति

पार्वती नन्दन श्री गणेश

सुरेश चन्द्र जोशी विनोद नगर (दिल्ली) ******************** आओ पार्वती नंदन श्री गणेश, स्वागत करता भारत देश | आओ शिवसुत हे श्री गणेश, स्वागत करता मैं सुरेश || विघ्न विनाशक हे विनायक, तुम गजमुख लंबोदर सुत महेश | विघ्न हरो प्रभु सब भक्तन के, धरा सहित आपदा में भारत देश || आओ प्रभु सुरक्षित करो धरा को, जनमानस अब अति ब्याकुल है | तुम्हारी धरा का उपासक भी तो, कितनाआज अत्यंत भयाकुल है || आशीष गणपति का पाकर हम, सभी शिव-शक्ति शरण में जायेंगे | उमासुत प्रभु के आशीष से हम, फल शिव-शक्ति चरण में पायेंगे || हे विद्या फलप्रदायक विघ्नहर्ता, भक्तों के त्राता बन जाओ प्रभु | आकरके भक्त संप्रदाय घरों में, सुफल दाता अब बन जाओ प्रभु || आओ उमासुत श्री गणेश, स्वागत करता भारत देश | आओ शिव सुत हे श्री गणेश प्रभु, स्वागत करता मैं सुरेश || स्वागत करता मैं सुरेश, स्वागत करता.... परिचय :- स...
हमारी पाठशाला
कविता

हमारी पाठशाला

शैलेष कुमार कुचया कटनी (मध्य प्रदेश) ******************** स्कूल के वो दिन याद आते है हाफ पैंट पहनकर स्कूल जाना, सफेद शर्ट पर टाई लगाना छोटे बड़े गुरुजी कहकर बुलाना.. लघुशंका के लिए दोस्त साथ चल देना लंच टाइम का इन्तजार करना राष्ट्रीय शोक की छुट्टी की खुशी १५ अगस्त और २६ जनवरी के लड्डू.. होमवर्क न करके लाना फिर कॉपी गुमने का बहाना, सचमुच बहुत याद आते है दुबारा स्कूल मुझे जाना है.. ठंड में सोते रहना लेट होने पर पेट दर्द का बहाना, इंग्लिश ओर मैथ का वो डर आज के गम से बहुत कम था.. परीक्षा के पहले वाला डर रिजल्ट का इंतजार करना, अब सब मामूली लगता है दुनियादारी से स्कूल जाना अच्छा लगता है.. बारिश में भीगते हुए स्कूल जाना और आकर सर्दी हो जाना, आज के पीड़ा से कम था सचमुच स्कूल का टाइम मस्त था.. टूशन की वो मस्तिया स्कूल के बाहर खट्टा-मीठा चूर्ण खाना, आज के प...
यादें अपने साथ हमारी रखते हैं।
ग़ज़ल

यादें अपने साथ हमारी रखते हैं।

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** यादें अपने साथ हमारी रखते हैं। लोग जो सबसे दुनियादारी रखते हैं। रखते हैं वो पूछ-परख जज़्बातों की, खुशियों में जो ग़म से यारी रखतें हैं । हाथ हमेशा सिर पर रहता है उनका, जो अपनों की जिम्मेदारी रखतें हैं। दूर है सूरज-चाँद यहाँ सबसे कितने, फिरभी रोशन दुनियाँ सारी रखते हैं। खेल यहाँ जब हम-आपस में होता है, वो अपनों से बाज़ी हारी रखते हैं । परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानि...
उसकी छवि
कहानी

उसकी छवि

अतुल भगत्या तम्बोली सनावद (मध्य प्रदेश) ******************** सुबह चाय लेते समय मैंने उससे फोन पर बात करते हुए पूछ लिया। क्या चल रहा है आजकल? उसने दबी हुई आवाज में मुझसे कहा कि जीवन है बस जीये जा रहे है। मैंने उस आवाज को समझ लिया और उससे समस्या जानना चाहा पर वह समस्या बता नही पा रहा था। मुझे जल्द से जल्द तैयार होकर ऑफिस जाना था इसलिए मैंने ज्यादा जोर न देते हुए कुछ समय बात करके फोन काट दिया। मैं व्यस्त हो गया। ऑफिस जाने की जल्दी में मैं अपना मोबाइल जो बार बार बज रहा था। उसे उठा नही पाया। मैंने जब मोबाइल उठाया शायद उस समय काफी देर हो चुकी थी। मैंने जब मोबाइल देखा उसमें रवि के चार मिस्ड कॉल थे। उस नम्बर पर जब कॉल किया तो किसी सज्जन व्यक्ति ने उसका मोबाइल उठाया। मुझे जैसे ही पता चला रवि इस दुनिया में नही रहा। मेरे पैरों तले जमीन सरक गई। मैं अपना काम छोड़ उस जगह पर पहुँचा जह...
हां, मैं शिक्षक हूं!
कविता

हां, मैं शिक्षक हूं!

संजू "गौरीश" पाठक इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** शिक्षक एक ऐसा दीपक है, खुद अंधकार में रहता है। करता आलोकित पथ सबका, तिल - तिल करके खुद जलता है।। हो विकट परिस्थिति कितनी भी, मेहनत का पाठ पढ़ाते हैं। मन का विज्ञान समझकर ही शिक्षण में रुचि जगाते हैं।। होते हैं ज्ञान पिपासु स्वयं, संस्कारों का करते विकास। बच्चों के स्तर पर जाकर, सिखलाते हर संभव प्रयास।। अपनाते नवाचार शिक्षण, शिक्षा गुणवत्ता में सुधार। अगणित गतिविधियां अपनाकर, करते हैं शिक्षा का प्रसार।। कर सहन प्रहार कोराेना का, दायित्व निर्वहन में डटे रहे। ऑनलाइन पद्धति अपनाकर, निर्बाध शिक्षण करते रहे।। परिचय :- संजू "गौरीश" पाठक निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं...
जाग, अब मत सो चिरैया
गीत

जाग, अब मत सो चिरैया

भीमराव झरबड़े 'जीवन' बैतूल (मध्य प्रदेश) ******************** है बड़ा निष्ठुर जमाना। जाँच के ही पग उठाना। सद्जनों में है अहेरी, जाल सब जाने बिछाना।। हाथ में तलवार रख ले, चाहती हक जो चिरैया।।१ छाँव के छाते तने हैं। बस दिखावे को बने हैं। तंत्र के साधक सिपाही, काम लिप्सा में सने हैं।। स्वप्न के उर्वर पटल पर, शूल तू मत बो चिरैया।।२ घाव रिश्तों ने दिए जो। खून के आँसू पिए जो। अब चुकाने का समय है, कर्ज वे मन पर लिए जो।। कीच जो तुझ पर उछाले, अब उन्हीं को धो चिरैया।।३ परिचय :- भीमराव झरबड़े 'जीवन' निवासी : बैतूल मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर ...
हिंदी
कविता

हिंदी

ज्योति लूथरा लोधी रोड (नई दिल्ली) ******************** हिंदी है ही इतनी प्यारी, जितना जानो कम है, इसमे इतना दम है, क्योंकि हिंदी से ही हम है। हिंदी ने ही मुझे बनाया बढ़ाया, मुझे सिखाया सवारा सुधारा, हिंदी है अनुपम माया, इसकी है शीतल छाया। हिंदी न मेरी न तेरी वो है सबकी, हिंदी में कुछ बात है हिंदी हमारे साथ है, हिंदी है ज्ञान का भंडार इसमें है अनेक विचार, हिंदी को बनाओ प्यार हिंदी है मेरी यार। हिंदी को बनाओ प्यार हिंदी है मेरी यार। परिचय :- ज्योति लूथरा संस्थान : दिल्ली विश्वविद्यालय निवासी : लोधी रोड, (नई दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अ...
मन की आँखे खोल
कविता

मन की आँखे खोल

योगेश पंथी भोपाल (भोजपाल) मध्यप्रदेश ******************** चहरे का तो रंग उड़ा है नस नस में है कपट भरा। चला ठाट से तीरथ करने घरमें है अंधकार पड़ा॥ चार जीव का दिल जलता हैं चला है शान दिखाने को। यारों के संग मौज मनाता घर में नही हैं खाने को॥ घर की परवाह उसे कहाँ सिर्फ दिखावा प्यारा है। जब पैसे की खनक बड़े तब हो जाता न्यारा है॥ लगा सके न जहा रुपईया तंग हाल में, वो घर प्यारा हैं। सिर छुपाने जगह नही तो तब होता वहीं गुज़ारा है॥ कटे विधुत खंडहर हो घर उसकी आँख नही झुकती। नाक कटे दुनिया भर में पर डिन्गा फांक नही रुकती॥ दिल दुखते हो लोगों के तो खुद खुशहाल नही होते। तीरथ कर लेने से केवल खुश भगवान नही होते॥ दुराचार की संगत से तो यज्ञ भी नष्ट हो जाते हैं। मन मे छल हो तीरथ से क्या दूर कष्ट हो जाते हैं॥ जितना कष्ट देता सब को तेरा परिवार भी झेल रहा। ईश्वर खेल ...
शिक्षा
कहानी

शिक्षा

अमिता मराठे इंदौर (मध्य प्रदेश) ********************  "वाह भगवान आपने मेरी अर्जी सुन ली। इसलिए शुक्रिया अदा करता हूं।" बहू, आज कुछ मीठा बना लेना भोजन में।' बाबूजी प्रार्थना तो भगवान ने मेरी सुनी है। रोज पीछे पड़ती थी। डिग्री बहुत सी हो या फिर अकल तेज तर्राट हो। "अरे बेटा जो हुआ अच्छा हुआ ना।" दर्शन भी नयी नौकरी पा कर बहुत खुश थे। आज कम्पनी जाॅईन कर घर लौटे थे। आते ही आदेश देते जा रहे थे...... हमने कम्पनी के पास ही, पाॅश काॅलोनी में फ्लेट ले लिया है‌। हां वहां आरज़ू नाम का लड़का है। उसे पेकिंग का काम सौंप दिया है। उससे काम करवा लेना, और जरा फ्लेट के नल पाइप बिजली तथा रसोई घर की व्यवस्था में सुधार चाहिए तो देखने चलना है, तैयार रहना। दर्शना देवी सी मूक हो दर्शन को देख रही थी। दो दिन में कितना बदल गया है। कितना आत्म विश्वास आ गया है सारे व्यक्तित्व में! चेहरा भी रौबदार हो गया है। हा...
राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय बाल कवि सम्मेलन सम्पन्न।
साहित्य समाचार

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय बाल कवि सम्मेलन सम्पन्न।

इंदौर। हिन्दी दिवस के सुअवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा दिनांक ०८ सितम्बर से दिनांक १४ सितम्बर तक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, आज सप्ताह के चतुर्थ दिवस पर दिनांक १२ सितम्बर रविवार को अखिल भारतीय बाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे देश के विभिन्न राज्यों के बाल कवि एवं बाल कवयित्रियों ने प्रतिभागिता कर अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाई। कवि सम्मेलन से पूर्व राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के संस्थापक एवं हिन्दीरक्षकडॉटकॉम के सम्पादक पवन मकवाना (हिन्दी रक्षक) ने मंच पर पधारे सभी रचनाकारों का स्वागत व अभिवादन कर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा चलाये जा रहे अभियान व कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, तत्पश्चात सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। https://youtu.be/bW4me58gUrM कवि सम्मेलन का संचालन ७ वर्षीय कु. श्रीधी मकवाना (इंदौर मध्य प्रदेश) ने कि...
देश के राज्यों की विशेषता
कविता

देश के राज्यों की विशेषता

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** सुनों सुनता हूँ तुमको देश की कहानी। जिसमें हैं २९ राज्यों का समावेश। राज्यों कि भी है अपनी अपनी कहानी। कोई विकसित है तो कोई है जंगल। पर सभी का ह्रदय है तो भारत। परंतु एकबात समान है सभी राज्यों में। अलग अलग राज्यों की भाषाएँ हैं। खाने और पहाने का तरीका भी अलग है। रीति रिवाजो का तरीका भी अलग है। परंतु तिरंगा के प्रति बहुत सम्मान है। तभी तो एक सूत्र में सभी राज्य बंधे हैं। और सभी का है एक ही संविधान। जो हर धर्म जातियों को समानता देता है। अनेकता में एकता जिसकी सबसे बड़ी विशेषता है। चलो आज प्रदेश के अनुसार सुनता हूँ। आपको देश के प्रदेशों की कहानी। तभी जान पाओंगे राज्यों को तुम। प्रथम में हम बात करते है कश्मीर की। जहाँ रहते है कश्मीरी पंडित। और वहां पर बहुत पैदा होती है केशर। बात करते है अब हिमाचल प्रदेश की। जहाँ के पू...
चलो तो सही
कविता

चलो तो सही

श्वेतल नितिन बेथारिया अमरावती (महाराष्ट्र) ******************** मत बैठना थक कर के वरना कहोगे मंजिल मिली ही नही अपने सपनों को पंख देकर उड़ान के अब तुम चलो तो सही। कौन भला क्या जीत पाया है यहाँ खुद के मन को यूं मार के रखो यकीन सब जीत जाओगे इक दिन सब कुछ हार के। हों यदि हौसले बुलंद तो क्या डरना किसी आंधी या तूफान से पर दिल न दुखे किसी का, खाली हाथ लौटना भी है जहाँन से। हो यदि मीठी जुबान तो मनुष्य का हर जगह गुणगान होता है वाणी ही बोध कराती सदा नेह का इससे ही सम्मान होता है। परिचय - श्वेतल नितिन बेथारिया निवासी - अमरावती (महाराष्ट्र) घोषणा पत्र - मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच ...
आँसुओं के मोती
कविता

आँसुओं के मोती

राजेन्द्र कुमार पाण्डेय 'राज' बागबाहरा (छत्तीसगढ़) ******************** सोनू! तुमने जो प्यार दिया मेरे इस दिल को वो प्यार कहीं ना अब तलक मुझे मिला जिंदगी का कोई अर्थ नही था अब तक तेरे प्यार ने मुझे नई जिंदगी का अर्थ दे दिया मेरी सोनू! तूने जब से थामा है मेरा हाथ मेरा हर लम्हा-लम्हा सुलझा-सुलझा रहता है बेअदबी इल्जाम लगाया दुनिया ने मुझ पे तुम्हारे प्यार पाकर रिहा हुआ इल्जामों से अब तो तेरे प्यार पे ही भरोसा है मुझको बिना सोचे समझे एतबार किया है मुझे मैंने आँसुओं से मोती की माला पिरोया मैंने अपने गले का तुझको हार बनाया है तेरे खूबसूरती के सागर में जब से खोया फिर खुद को खुद से कभी मिल नही पाया किस्मत भी खफा हो तो कोई गम नहीं अपने प्यार से कभी भी कोई शिकवा नहीं पर सोनू तेरा हर इल्जाम का गंवारा है मुझे फिर भी मैं तूझसे ही प्यार करता रहूंगा जब-जब भी मैंने आईना को देखता हूँ ...
राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०३
साहित्य समाचार

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०३

इंदौर। हिन्दी दिवस के सुअवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा दिनांक ८ सितम्बर से दिनांक १४ सितम्बर तक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, आज सप्ताह के तृतीय दिवस पर दिनांक १० सितम्बर शुक्रवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे देश के विभिन्न राज्यों के कवि एवं कवयित्रियों ने प्रतिभागिता कर अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाई। कवि सम्मेलन से पूर्व राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के संस्थापक एवं हिन्दीरक्षकडॉटकॉम के सम्पादक पवन मकवाना (हिन्दी रक्षक) ने मंच पर पधारे सभी रचनाकारों का स्वागत व अभिवादन कर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा चलाये जा रहे अभियान व कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, तत्पश्चात सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। https://youtu.be/v0VeVEahr6w कवि सम्मेलन का संचालन वरिष्ठ रचनाकार श्री धीरेन्द्रजी जोशी (कोदरिया महू) द्वारा किया गया...
राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०२
साहित्य समाचार

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०२

इंदौर। हिन्दी दिवस के सुअवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा दिनांक ८ सितम्बर से दिनांक १४ सितम्बर तक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, आज सप्ताह के तृतीय दिवस पर दिनांक १० सितम्बर शुक्रवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे देश के विभिन्न राज्यों के कवि एवं कवयित्रियों ने प्रतिभागिता कर अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाई। कवि सम्मेलन से पूर्व राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के संस्थापक एवं हिन्दीरक्षकडॉटकॉम के सम्पादक पवन मकवाना (हिन्दी रक्षक) ने मंच पर पधारे सभी रचनाकारों का स्वागत व अभिवादन कर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा चलाये जा रहे अभियान व कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, तत्पश्चात सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। https://youtu.be/Iruf5plVEQ8 कवि सम्मेलन का संचालन वरिष्ठ रचनाकार श्री धीरेन्द्रजी जोशी (कोदरिया महू) द्वारा किया गया...
राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०१
साहित्य समाचार

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न। भाग ०१

इंदौर। हिन्दी दिवस के सुअवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा दिनांक ८ सितम्बर से दिनांक १४ सितम्बर तक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, आज सप्ताह के तृतीय दिवस पर दिनांक १० सितम्बर शुक्रवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे देश के विभिन्न राज्यों के कवि एवं कवयित्रियों ने प्रतिभागिता कर अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाई। कवि सम्मेलन से पूर्व राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के संस्थापक एवं हिन्दीरक्षकडॉटकॉम के सम्पादक पवन मकवाना (हिन्दी रक्षक) ने मंच पर पधारे सभी रचनाकारों का स्वागत व अभिवादन कर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा चलाये जा रहे अभियान व कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, तत्पश्चात सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। https://youtu.be/n3rp8gsKtfY कवि सम्मेलन का संचालन वरिष्ठ रचनाकार श्री धीरेन्द्रजी जोशी (कोदरिया महू) द्वारा किया गया...
राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के सात दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन के साथ हुआ।
साहित्य समाचार

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के सात दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन के साथ हुआ।

https://youtu.be/cOjgLTy7DhY इंदौर। हिन्दी दिवस के सुअवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच द्वारा दिनांक ८ सितम्बर से दिनांक १४ सितम्बर तक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, आज सप्ताह के प्रथम दिवस पर शुभारम्भ समारोह, सम्मान समारोह, व पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी तहत १००८ परमपूज्य महामंडलेश्वर श्रीदादूजी महाराज (महंत श्रीगजासीन शनि मंदिर इंदौर) के कर कमलों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा को माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता का निर्वहन प.पू. श्रीदादूजी महाराज ने किया वहीँ मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जिला अध्यक्ष (इकाई धार) श्रीशरदजी जोशी "शलभ", व विशेष अतिथि श्रीमती मनोरमा जोशी (इंदौर) मंच को सुशोभित कर रहीं थीं। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के संस्थापक एवं हिन्दीरक्षकडॉटकॉ...
मोह-माया की दुनिया
व्यंग्य

मोह-माया की दुनिया

कु. आरती सिरसाट बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) ******************** बात सुबह के आठ साढ़े आठ बजे की है जब मैं बालकनी में बैठीं हुई चाय और बिस्किट का मज़ा लेते हुएँ, साथ में ही अखबार के पन्नों को पलट रही थी। ओर सोच रही थी की आखिरकार हमारें देश के नागरिक कब मोह माया की दुनिया से बाहर निकलेगें। कब वर्तमान में जीवन जीएगे कब वास्तविकता का समाना करेंगे। और कब देश का विकास होगा। तभी अचानक मेरी नज़र नीचें सड़क पर पड़ी। ओर मैंने देखा की शर्मा चाचाजी चलते-चलते अचानक रूक गये। मगर मैं कहा रूकने वाली थी, मैं तो तुरंत बोल पडीं। ...अरे चाचाजी क्या हुआ आप चलते-चलते अचानक क्यों रूक गयें, क्या कुछ भुल गये बाजार से लाना। चाचाजी बोलें... अरें नहीं बेटा कुछ भुला नही... बल्कि मैं तो बहुत जल्दी में हूँ, मुझे जल्दी घर जाना है। ठीक है चाचाजी, मुझे क्षमा कर दीजिए, आप जल्दी में है ओर मैंने आपको बीच में टोक दिया। कोई बात...
शिक्षक है दीपक
कविता

शिक्षक है दीपक

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** शिक्षक है दीपक की छवि जो जलकर दे दूसरों को रवि वही तो राष्ट्र निर्माता कहलाता है.... तन-मन-वचन से कर्तव्य निभायें जो प्रतिभा की आभा बिखरायें वही तो ज्ञानदाता गुरू कहलाता है.... ईश्वर से महान तो गुरू बतलाये जीवन शैली की तो गुर सिखलाये वही तो भाग्य विधाता कहलाता है.... शिक्षक सद्ज्ञान की ज्योति है वो प्रकाश पुंज की मोती है वही तो दिव्यदाता कहलाता है... सत्-असत् पथ पर चलना सिखायें विद्यार्थी जीवन का मार्ग बतलायें वही तो सुविधादाता कहलाता है ... शैक्षिक सह-शैक्षिक पाठ पढ़ाये सबक सिखाकर आगे बढ़ाये वही तो सीख प्रदाता कहलाता है.... सर्वांगीण विकास कर धन्य बनाये पढ़ा लिखाकर नागरिक बनाये वही तो जीवनदाता कहलाता है .... हर कला क्षेत्र में पारंगत बनाये प्रशंसनीय प्रयास अनुसरण कराये वही तो स...
पहली शिक्षक माँ होती है।
कविता

पहली शिक्षक माँ होती है।

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** पहली शिक्षक माँ होती है। प्रारम्भिक पाठशाला माँ होती है फिर, पिता और घर-परिवार वाले अडोस पड़ोस और सब दुनियाँ वाले सब होते हैं शिक्षक जिन्दगी को समझाने वाले शिक्षक कल -कल बहती नदिया चलते रहना सिखाती सखियाँ पत्थरों से टकराते झरने सिखाते गिर कर उठने ऊपर फैला विस्तीर्ण आकाश कहता ऊँचे उठो, भर लो मन में उजास ऊँचे कठोर पर्वत बनाते संकल्प मजबूत यह विशाल धरती सँभाले है जगती लहराती कोमल पत्तियाँ आशाओं की जगाती लहरियाँ शिक्षा का अनुदान सर्वत्र फैला है निधान प्रकृति अखिल शिक्षक है जीवन सदा नत मस्तक है। परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा निवासी : अलीगंज लखनऊ शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड., स्नातक कक्षा और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन साहित्य सेवा : दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में काव्य पाठ...