जिंदगी कटती रहे।
धीरेन्द्र कुमार जोशी
कोदरिया, महू जिला इंदौर म.प्र.
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इस तरह यह जिंदगी कटती रहे।
सुख बढ़ें, दुश्वारियां घटती रहें।
हम बढ़ें, तुम भी बढ़ो तो बात हो।
दूरियां दिल की यूं ही पटती रहें।
खुशबुओं से प्यार की महके जहां,
बेल उल्फत की सदा फलती रहे।
होंठ चुप हों, नयन से बातें करो,
जब चली है बात तो चलती रहे।
दुश्मनी के दायरों को कम करो,
ये बुराई क्यों यूं ही बढ़ती रहे।
जो पेड़ गिरते हैं, नए फिर रोपिए,
जोत जीवन की सदा जलती रहे।
जी तेरे अंदाज में अपनी खुशी से,
बात दुनिया को खले, खलती रहे।
परिचय :- धीरेन्द्र कुमार जोशी
जन्मतिथि ~ १५/०७/१९६२
जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म.प्र.)
भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत
शिक्षा ~ एम. एससी.एम. एड.
कार्यक्षेत्र ~ व्याख्याता
सामाजिक गतिविधि ~ मार्गदर्शन और प्रेरणा, स...

























