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जग में रहना सिखा दिया

मधु अरोड़ा
शाहदरा (दिल्ली)
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अपना बना के श्याम ने,
न हमें जग में रहना सिखा दिया।
जैसे कमल रहता है जल में,
इस तरह तुम भी रहो।
आए दुख सुख चाहे जितने,
सब को सहना सिखा दिया।
जितने भी प्राणी है जगत के,
सबके अंदर मैं ही हूं।
श्याम ने हमें जग में सबसे,
प्रेम करना सिखा दिया।
काम कर दुनिया के सारे,
मन में मुझको याद कर।
फल की इच्छा ना कर कभी,
यह हमें बतला दिया।
जो आया इस जगत में,
एक दिन उसको जाना है।
आत्मा की अमरता का सार,
हमको समझा दिया।
जो शरण आता है मेरी,
मुझको अपना मान कर।
मैं हूं उसका वह है मेरा,
यह हमें बदला दिया।
सच्चे मन से शांत मन से,
आओ इन प्रभु की शरण।
बातों ही बातों में जिसने,
रूप अपना दिखला दिया।
क्या कहूं कैसे करूं,
प्रार्थना की लीला अपरंपार है
हम जीवो को तारने को,
प्रार्थना स्वरूप बना दिया।
हो भला सबका यह दिल में,
धारणा हृदय में डाल ले।
मौन प्रार्थनाओं का सार,
सुंदर ढंग से प्रभु ने समझा दिया।
अपना बना के श्याम ने,
जग में रहना सिखा दिया।।
बिगड़े काम बनेंगे सारे,
उसके ही नाम से।
काम करने से पहले,
शुरू करो हरी नाम से।
अपना बनाकर श्याम ने,
जग में रहना सीख दिया

परिचय :– मधु अरोड़ा
पति : स्वर्गीय पंकज अरोड़ा
निवासी : शाहदरा (दिल्ली)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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