सिंदूरी बंधन
अर्चना लवानिया
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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सिंदूर का यह सिंदूरी बंधन
बांधे रहे तुम्हें मुझसे ...
और मुझसे तुम्हें ।।
चमको मेरे माथे पर
बिंदिया की तरह
महको मेरे तन मन में
गुलाबों की तरह
बिखरी हुई ये सांसे
बांधे रहे तुम्हें मुझसे ....
और मुझसे तुम्हें ।।
बस जाओ मेरी आंखों में
काजल बन कर
बिखरो मेरी जुल्फों में
फूलों की तरह
संदली सी ये खुशबू बांधे रहे
तुम्हें मुझसे और
मुझसे तुम्हें ।।
लिख दो मेरे आंचल पे
कहानी अपनी
भर दो मेरे दामन में सारी
रवानी अपनी
डूब जाऊं कि तेरे रंग के सिवा
कोई रंग ना भाई मुझको
रंगों का यह सतरंगी बंधन बांधे रहे
तुम्हें मुझसे ....
और मुझसे तुम्हें ll
परिचय :- अर्चना लवानिया
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपन...
























