दिव्य दिवाकर
शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
********************
(मदिरा सवैया छंद)
दिव्य दिवाकर मंद हुए,
यह ठंड भयंकर रूप धरे।
शीत हवा कुहरा बिखरा,
अब पीत परे सब पात हरे।
तुंग हिमालय श्वेत हुए,
हिम सागर शीत बिहार झरे।
शीत प्रभाव सु-प्रीति फले,
मन यौवन अंग उमंग भरे।
परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, ...
























