वक्त की बात क्या करें कोई
अनुराधा बक्शी "अनु"
दुर्ग, (छत्तीसगढ़)
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वक्त की बात क्या करें कोई
फिर वही बात क्या करें कोई
हम तो अपने सनम की बाहों में
फिर नरम हाथ क्या करें कोई
खुद को खोना तुझको पाना है ।
फिर तेरा साथ क्या करें कोई
मुंतशिर इस तरह हुए अरमा
फिर नए ख्वाब क्या करें कोई
"अनु" अपनी वफा की राहों में।
बेवफा रात क्या करें कोई।
परिचय :- अनुराधा बक्शी "अनु"
निवासी : दुर्ग, छत्तीसगढ़
सम्प्रति : अभिभाषक
घोषणा पत्र : मैं यह शपथ लेकर कहती हूं कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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