भारत ही हमारा धर्म
रवि कुमार
बोकारो, (झारखण्ड)
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ना जात-पात मे खेद यँहा
ना रंग-रुप मे भेद,
ना धर्मों की कोई गिनती यँहा
यहाँ धर्म मिले अनेक।
कन्ही 'राम' हे कन्ही 'रहीम'
कन्ही 'कृष्णा' तो कन्ही 'करीम
ईस धरती पे ना जाने
कितने विरो ने जन्म लिए,
ईस भारत माँ के खातिर
कितनों ने 'सर' कल्म किये,,
जिसनें भी देखा नजर उठा के
उनको भी सहनी हार पड़ीं
'भारत' ही हमारा धर्म है
बस यही हमे संस्कार मिली।।
परिचय :- रवि कुमार
निवासी - नावाड़ीह, बोकारो, (झारखण्ड)
घोषणा पत्र : यह प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।
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