नारी हूं
सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)
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अद्भुत रचना हूँ मैं ईश्वर की,
जीवंत चेतन इक नारी हूँ।
रुप मिला है दुर्गा, सीता, रति-सा,
पंचतत्व रचित, मैं भी नारी हूँ।
अपूर्व दया, प्रेम, करुणा है मुझमें,
मातृत्व का है मुझे वरदान मिला।
नन्हा - सा अंकुर खिला कोख में,
है प्रकृतिमयी नश्वर संसार मिला।
नतमस्तक है सचराचर प्रेम में,
देव - दनुज सारे नर-नारी।
थे कन्हैया भी यशोदा कीअंक में,
सती अनुसुइया भी थी इक नारी।
नारी से है जन जीवन सारा,
मै भी प्रतिनिधित्व करती नारी हूँ।
प्रेमभाव निभाती हूँ सदा,
समता समरसता रखती नारी हूँ।।
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परिचय :- सुरेखा "सुनील "दत्त शर्मा
साहित्यिक : उपनाम नेहा पंडित
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहानी और रचनाएं प्रकाशित हुई है :-
पर्य...






















