दर्द ही जीत की जननी
दीपक अनंत राव "अंशुमान"
केरला
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दर्द एक दुआ है
दर्द एक ऐलान है
दर्द दिल की छ्वी
दर्द से ही दुनिया पनपती है
जब दुनिया में एक बच्चा जन्म लेता है
वो रोता है कराहता है चिल्लात्ता है
दर्द का अनुभव उसे महसूसता है
आहिस्ता-आहिस्ता वो चैन का सास भी अपनाता है
माँ के दर्द की दुआ है वो कटपुतली
सौ गुना ऊर्जा जो उसे खुदा ने दी थी
वो देकर, सहकर दर्द के साथ वो अपने लाडले को
जन्म देती है बेहद खुशी से उसे टटोलता है॥
आदमी की शुरुवात भी दर्द से
आदमी की पहचान भी दर्द से
साया जैसे उनके साथ चलते-चलते
दर्द के साथ उन्हें मिट्टी से मिला देती हैं
काश दुनिया में दर्द न होते तो
कितना सूना लगेगा हमारी ज़िन्दगी
दर्द से खुशी का मतलब हम समझते
दर्द से ही किसी की राहें बनती है
दर्द से ललकारें बनते है
दर्द से ही आज़ादी का मंत्र निकालता है
दर्द से ही कोई आशिक बनता ...
























