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मुझे कविता ने ही जिंदा रखा, कविता मेरी प्राण वायु है’
साहित्यिक

मुझे कविता ने ही जिंदा रखा, कविता मेरी प्राण वायु है’

इंदौर। यह उद्गार अपनी चैथी काव्यकृति ‘ज्योति काव्य मंदाकिनी’ के विमोचन पर वरिष्ठ कवि एवं गीतकार श्री सुरेश चन्द्र दुबे ‘ज्योतिकानपुरी’ ने व्यक्त किये। ऑडिट ऑफिसर के पद पर रहते हुए, अनेक अखिल भारतीय मंचों पर अपने अनेक विधाओं में सस्वंर काव्य पाठ करने वाले, श्री ज्योतिकानपुरीजी ने कविता के प्रति अपने समर्पण भाव को यथावत रखा। अपने उद्बोधन में उन्होंने यह भी कहा कि ‘जीवन के उत्तरार्ध में कल्पना शक्ति ही अमृत रस का काम करती है। इसी अमृत से ही भाव धारा निकल कर शब्द ब्रह्म की साधना कवि करता है और समाज में अपने सुख दुःख बांटता है।’ क्रांति कृपलानी नगर के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथि थें वरिष्ठ कवि सत्यनारायण सत्तन, कान्यकुब्ज समाज के अध्यक्ष श्री विष्णुप्रसाद शुक्ला, वरिष्ठ प्रध्यापक डाॅ पुष्पेन्द्र शुक्ला, ‘देवपुत्र’ के प्रधान संपादक श्री कृष्णकुमार अष्ठाना, ‘युगप्रभात’ के प्रधान संपा...
विराम
कविता

विराम

========================== रचयिता : संगीता केस्वानी सदियों पुरानी रीत है बदली, एक तरफा ये जीत है बदली, है विराम मेरी बेबसी का, है लगाम तेरी नाइंसाफी का,, न पर्दे से इनकार है, ना संस्कारो से तक़रार है, अब अपने फैसलों का मुझे भी अधिकार है, रौंद सके मेरे जीवन को तुझे अब न ये इख्तियार है,, अब ना अश्क-ऐ-आबशार होगा, ना हर पल डर का विचार होगा, सुखी -नुष्चिन्त हर परिवार होगा, मेरे भी हक़ में ये बयार होगा,, सायरा, गुलशन इशरत,आफरीन, आतिया का संघर्ष रंग लाया, मजबूरी से मज़बूती की जंग का सुखद परिणाम आया,, ना हूँ केवल वोट-बैंक या ज़ाती मिलकीयत, अब जाके पाई मैंने भी अपनी अहमियत,, तुम सरताज तो मैं शरीके-हयात, पाख ये रिश्ता-ऐ-निकाह ना होगा तल्ख तलाक से तबाह, न तलाक-ऐ-बिददत, ना तलाक-ऐ-मुग़लज़ाह, कर पायेगा इस रूह-ऐ-पाख का रिश्ता तबाह, सो मेरी जीत मैं तुम्हारी जीत, और तुम्हारी जीत में मेरी शान।। लेखिका परिच...
कटू सत्य
कविता

कटू सत्य

========================== रचयिता : संगीता केस्वानी पिता का घर "मायका", पति का घर "ससुराल", मेरा घर है कहाँ?, भाई का घर भाभी ने लिया, बेटे का घर बहू ने लिया, मैं हूँ कहाँ?, जीजा करे बहन से आनाकानी, बिटिया के यहाँ दामाद को परेशानी, मेरी अहमियत किसने पहचानी, मंदिर में पुजारी का डेरा, आश्रम में भी ना मिले बसेरा, कहने को सब अपने, पर कौन यहां मेरा?? ये कैसी विडंबना........ सृष्टि की सिर्जनकर्ता का अपना कोई स्थायी पता ही नही?????? लेखिका परिचय :- संगीता केस्वानी आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने मोबाइल पर या गूगल पर www....
आज का पंचांग २६ अगस्त सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का पंचांग २६ अगस्त सन २०१९ ईस्वी

📜««« आज का पंचांग »»»📜 कलियुगाब्द.......................५१२१ विक्रम संवत्......................२०७६ शक संवत्.........................१९४१ मास...............................भाद्रपद पक्ष..................................कृष्ण तिथी................................दशमी प्रातः ०७ .०१ पर्यंत पश्चात एकादशी रवि.............................दक्षिणायन सूर्योदय...........प्रातः ०६ .०७ .१२ पर सूर्यास्त...........संध्या ०६ .५० .३६ पर सूर्य राशि.............................सिंह चन्द्र राशि..........................मिथुन नक्षत्र................................आर्द्रा रात्रि ०२ .५१ पर्यंत पश्चात पुनर्वसु योग...................................वज्र दोप १२ .०० पर्यंत पश्चात सिद्धि करण................................विष्टि प्रातः ०७ .०१ पर्यन्त पश्चात बव ऋतु...................................वर्षा दिन...........
मालिनी छन्द
छंद

मालिनी छन्द

========================== रचयिता : भारत भूषण पाठक विधा :- मालिनी छन्द विधान :- नगण नगण मगण यगण यगण होत अलौकिक प्रकाश, जेल में देख के कंस मन,हिय अकुलायो। है ये कैसो प्रकाश जो ऐसो ताहि के पार न देखि पायो।। द्वार खुले अरू बेड़ी टूटे चहुँओर देखो धुँध है छायो। लेत वसुदेव जग तारण को। यमुना जी में पाँव बढ़ायो।। है ये कैसो भाग वसुदेव को। घर में जो जगतारण आयो। फूल गिरे अरू अम्बर से जो। स्वयं हरि के ऊपर आयो।। देख हरि को यमुना जी में यमुना जी भी ऊपर धायो। है यह कैसो भाग जो हमरो आयो स्वयं नारायण आयो।। लेखक परिचय :-  नाम - भारत भूषण पाठक लेखनी नाम - तुच्छ कवि 'भारत ' निवासी - ग्राम पो०-धौनी (शुम्भेश्वर नाथ) जिला दुमका(झारखंड) कार्यक्षेत्र :- आई.एस.डी., सरैयाहाट में कार्यरत शिक्षक योग्यता - बीकाॅम (प्रतिष्ठा) साथ ही डी.एल.एड.सम्पूर्ण होने वाला है। काव्यक्षेत्र में तुच्छ प्रयास :- साहित्य...
है नफरत मुझे
ग़ज़ल

है नफरत मुझे

============================= रचयिता : शाहरुख मोईन है नफरत मुझे बस यहाँ रहजनी से नहीं मुझको नफ़रत किसी आदमी से| है रोटी व कपड़ा मकां भी जरुरी नहीं पेट भरता महज शायरी से| अमिट कुछ निशाँ दे गए दोस्त फिर भी नहीं है शिकायत मुझे दोसती  से | वो है बेवफ़ा यार मुझको पता पर मुझे है मुहब्बत उसी हमनशीं से| अँधेरों से ही है उजालों की कीमत तो फिर क्यों अदावत यहाँ तीरगी से| लेखिक परिचय :- नाम - शाहरुख मोईन अररिया बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने मोबाइल पर या गूगल पर www.hindirakshak.com खोजें...🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लग...
तुम पर मरा हूं
मुक्तक

तुम पर मरा हूं

=========================== रचयिता : प्रेम प्रकाश चौबे "प्रेम" डराया किसी को न खुद मैं डरा हूं । मौसम गरम है, मैं फिर भी हरा हूं । मुझ को समझते रहे लोग जिंदा, तुम्हें तो पता है कि तुम पर मरा हूं । लेखक परिचय :  नाम - प्रेम प्रकाश चौबे साहित्यिक उपनाम - "प्रेम" पिता का नाम - स्व. श्री बृज भूषण चौबे जन्म -  ४ अक्टूबर १९६४ जन्म स्थान - कुरवाई जिला विदिशा म.प्र. शिक्षा - एम.ए. (संस्कृत) बी.यु., भोपाल प्रकाशित पुस्तकें - १ -"पूछा बिटिया ने" आस्था प्रकाशन, भोपाल  २ - "ढाई आखर प्रेम के" रजनी  प्रकाशन, दिल्ली से अन्य प्रकाशन - अक्षर शिल्पी, झुनझुना, समग्र दृष्टि, बुंदेली बसन्त, अभिनव प्रयास, समाज कल्याण व मकरन्द आदि अनेक  पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक पत्रिकाओं में कविता, कहानी, व्यंग्य व बुंदेली ग़ज़लों का प्रकाशन। प्रसारण - आकाशवाणी व दूरदर्शन भोपाल से कविताओं व बुंदेली ग़ज़लों का प्रसारण। ...
मेरे गिरधर
कविता

मेरे गिरधर

================== रचयिता : रीतु देवी मेरे गिरधर, मेरे गोपाल मुरली मनोहर , नंद के लाल तेरी मुरली की धुन सुन बजती है पायल रूनझुन। दर्शन करूँ तेरी छवि निराली, नित्य गाऊँ भजन सजाकर थाली। मोर मुकुट शोभे तोहे शिश, रम जाऊँ तुझमें ,माँगू न भीख मुरली मनोहर रखे हस्त मेरे शिश सदा, भक्त रहूँ केशव तेरा सर्वदा।   लेखीका परिचय :-  नाम - रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … और अपनी कविताएं, लेख पढ़ें अपने मोबाइल पर या गूगल पर www.hindirakshak.com खोजें...🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा जरुर कीज...
रोटी
कविता, छंद

रोटी

======================== रचयिता : वन्दना पुणतांबेकर सायली छन्द की कविता रोटी तुम हो छोटी मोटी पतली भूख तुम्ही मिटाती। *** कही घी चुपड़ी कही सूखी रहती तृप्ताति आत्मा माँ। *** तुम्हारे हाथों भाती गर्म रोटी जीवन सन्देश सिखलाती। *** भूख तृष्णा तुम्ही ज्वाला पेट की बुझती तुम भाति।   परिचय :- नाम : वन्दना पुणतांबेकर जन्म तिथि : ५.९.१९७० लेखन विधा : लघुकथा, कहानियां, कविताएं, हायकू कविताएं, लेख, शिक्षा : एम .ए फैशन डिजाइनिंग, आई म्यूज सितार, प्रकाशित रचनाये : कहानियां:- बिमला बुआ, ढलती शाम, प्रायचित्य, साहस की आँधी, देवदूत, किताब, भरोसा, विवशता, सलाम, पसीने की बूंद,  कविताएं :- वो सूखी टहनियाँ, शिक्षा, स्वार्थ सर्वोपरि, अमावस की रात, हायकू कविताएं राष्ट्र, बेटी, सावन, आदि। प्रकाशन : भाषा सहोदरी द्वारा सांझा कहानी संकलन एवं लघुकथा संकलन सम्मान : "भाषा सहोदरी" दिल्ली द्वारा आप भी अपनी क...
पिता और बेटा
कविता

पिता और बेटा

======================= रचयिता : सौरभ कुमार ठाकुर मजदूरी करके भी हमको उसने पढ़ाया है। कचौड़ी के बदले उसने सूखी रोटी खाया है। हम पढ़-लिखकर इन्सान बनेंगे, यह उम्मीद उसने खुद में जगाया है। जब पिया सिगरेट बेटा, देख वह शरमाया है। उसने नशा का मूँह ना देखा, बेटे ने शिखर आज चबाया है। उसकी उम्मीदों का आज गला घोंट, पता नही बेटे ने आज क्या पाया है। परिचय :- नाम- सौरभ कुमार ठाकुर पिता - राम विनोद ठाकुर माता - कामिनी देवी पता - रतनपुरा, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) पेशा - १० वीं का छात्र और बाल कवि एवं लेखक जन्मदिन - १७ मार्च २००५ देश के लोकप्रिय अखबारों एवं पत्रिकाओं में अभी तक लगभग ५० रचनाएँ प्रकाशित सम्मान-हिंदी साहित्य मंच द्वारा अनेकों प्रतियोगिताओं में सम्मान पत्र, सास्वत रत्न, साहित्य रत्न, स्टार हिंदी बेस्ट राइटर अवार्ड - २०१९ इत्यादी। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फ...
हिस्सा बांटे हो गये
ग़ज़ल

हिस्सा बांटे हो गये

=========================== रचयिता : प्रेम प्रकाश चौबे "प्रेम" बुंदेली ग़ज़ल घर के हिस्सा बांटे हो गये । मिटी लड़ाई, सांते हो गए । पुरा-पड़ौसी, मीठे लग रये, हम में जैसे कांटे हो गये । हम खों रत खर्चा की तंगी, कत खेती में घाटे हो गये । मुरहा मुरही सब लावारिस से जैसे चोर-चपाटे हो गए । "प्रेम" आत मिलबे बे ऐसे, जैसे सैर-सपाटे हो गये । लेखक परिचय :  नाम - प्रेम प्रकाश चौबे साहित्यिक उपनाम - "प्रेम" पिता का नाम - स्व. श्री बृज भूषण चौबे जन्म -  ४ अक्टूबर १९६४ जन्म स्थान - कुरवाई जिला विदिशा म.प्र. शिक्षा - एम.ए. (संस्कृत) बी.यु., भोपाल प्रकाशित पुस्तकें - १ -"पूछा बिटिया ने" आस्था प्रकाशन, भोपाल  २ - "ढाई आखर प्रेम के" रजनी  प्रकाशन, दिल्ली से अन्य प्रकाशन - अक्षर शिल्पी, झुनझुना, समग्र दृष्टि, बुंदेली बसन्त, अभिनव प्रयास, समाज कल्याण व मकरन्द आदि अनेक  पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक पत्रिका...
प्यार तिरंगे के लिए
ग़ज़ल

प्यार तिरंगे के लिए

======================== रचयिता : मुनव्वर अली ताज हम सब के  मन  में प्यार तिरंगे के लिए  है हर  जान   का    उपहार तिरंगे के लिए   है देखा किसी  ने  आँख उठाकर जो इस तरफ दुश्मन  का   नरसंहार     तिरंगे के लिए   है ये चेन  ये  अंगूठी     ये   बुन्दे   ये   बालियाँ ये  सोने   का    श्रृंगार     तिरंगे के लिए   है ये  कह  रही है गर्व  से     भारत की  एकता हर  क़ौम   की   ललकार तिरंगे के लिए  है शब्दों   से  सैनिकों   का  मनोबल  बढ़ाएगा ये  'ताज'   रचनाकार   तिरंगे  के  लिए    है लेखक का परिचय :- मुनव्वर अली ताज उज्जैन आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें … ...
हे कान्हा
कविता

हे कान्हा

======================== रचयिता : रुचिता नीमा हे कान्हा!!!!!! कैसे परिभाषित करु मैं अपने प्रेम को,,,,,, तेरा प्रेम मेरे लिये जैसे, बारिश की वो पहली बूंद,, जिससे महक उठे माटी।।।। वो रेत की तपिश में मिला एक बर्फ का टुकड़ा,,,, जो दे असीम सी ठंडक।।।।। तेरे प्रेम का अहसास है इतना शीतल की कड़ी धूप में मिल गया कोई शीतल झरना।।।। ऐसा लगा ही नही की हम एक नहीं, तू साथ नहीं, पर तू मुझसे जुदा भी नहीं,,,।।। हे राधिके!!!! मत दो हमारे प्रेम को कोई भी आकार,, और न ही यह है किसी रिश्ते का मोहताज एक रूह के दो रूप है हम,,, एक दूजे के बिन अपूर्ण है हम।।।।। निःशब्द, निर्विकार, निराकार सब सीमाओं से परे असीमित, अनन्त, अव्यक्त से हम....... राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण लेखिका परिचय :-  रुचिता नीमा जन्म २ जुलाई १९८२ आप एक कुशल ग्रहणी हैं, कविता लेखन व सोशल वर्क में आपकी गहरी रूचि है आपने जूलॉजी में एम....
बुंदेली ग़ज़ल
ग़ज़ल

बुंदेली ग़ज़ल

=========================== रचयिता : प्रेम प्रकाश चौबे "प्रेम" को है जी खों मरने नइयां। मनों मौत से डरने नइयां। झाड़ फूंक - गण्डा ताबीजें, ई चक्कर मे परने नइयां। तजत झूठ और भजत सत्त खों उन खों कछु बिगरने नइयां। बे-ईमानी रेत पेरबो, बा में तेल निकरने नइयां। "प्रेम" एक से मोड़ी-मोड़ा, फरक तनक भी करने नइयां। लेखक परिचय :  नाम - प्रेम प्रकाश चौबे साहित्यिक उपनाम - "प्रेम" पिता का नाम - स्व. श्री बृज भूषण चौबे जन्म -  ४ अक्टूबर १९६४ जन्म स्थान - कुरवाई जिला विदिशा म.प्र. शिक्षा - एम.ए. (संस्कृत) बी.यु., भोपाल प्रकाशित पुस्तकें - १ -"पूछा बिटिया ने" आस्था प्रकाशन, भोपाल  २ - "ढाई आखर प्रेम के" रजनी  प्रकाशन, दिल्ली से अन्य प्रकाशन - अक्षर शिल्पी, झुनझुना, समग्र दृष्टि, बुंदेली बसन्त, अभिनव प्रयास, समाज कल्याण व मकरन्द आदि अनेक  पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक पत्रिकाओं में कविता, कहानी, व्यंग्य...
पल  में  रच  दिया  संसार को 
ग़ज़ल

पल  में  रच  दिया  संसार को 

======================== रचयिता : मुनव्वर अली ताज जिस  ने  पल  में  रच  दिया  संसार को पूजिए    उस     एक     रचनाकार   को वो   ही     जाने   आत्मा    के   भार को जिस  ने   बाँटा   साँस   के  उपहार  को जो   भी    मानेगा    तिरे      आभार को वो    ही     जानेगा   जगत   निस्सार को वो    शिलाओं  में   समा    सकता   नहीं कैसे   दें       आकार   निर - आकार  को बंद        कर लो अपने   नयनों के  कपाट और      खोलो  अपने     मन के द्वार  को तुम  हृदय   से   माँग  लो  उस  से     क्षमा मोड़    देगा    वो समय     की   धार   को जो   वो   चाहेगा    वही       होगा      सदा कौन     रोकेगा    भला      करतार      को है   सफलता    उस के  चरणों में  ही 'ताज' ले  चलो   उस की   शरण    में  हार     को   लेखक का परिचय :- मुनव्वर अली ताज उज्जैन आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फो...
कच्चे चूल्हे
कविता

कच्चे चूल्हे

======================= रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर कच्चे चूल्हे भूले, भूले सावन के झूले ।। प्रीत भी भूल चले है, दीवारो के छांव तले हैं। किससे क्या आश करें। किस पर विश्वास करें।। जिससे प्रीत बढ़ाई। वो भी है हरजाई।। ये जग नहीं अपनापन का, दुख कौन हरेगा मन का । सब मतलब के नाते। दिग्भ्रमित हमें कर जाते।। चेतनता हर जाती। सब शून्य नजर ही आती। मैं सोच रहा हूँ कैसे ? इस प्रीत से छुटकारा हो ना मोह रहे बंधन का, ना कोई जग प्यारा हो।। ह्रदय से एक आह निकले, और चाह मिटे पाने की। में मतवाला पागल बस, एक धुन हो कुछ गाने की।। वो दिवस शीघ्र आऐगा, जो मुझको तरसाते हैं। वो खुद एक दिन तरसेंगे, आंसू बन जो आते हैं।। अभी हृदय पावस है। मेघ सहज बन जाता। तेरी यादों में आकर, नेह सजल बरषाता ।। पतझर जिस दिन ये होगा। तुम तरसोगे सावन को, किंतु नहीं पाओगे, पुण्य प्रीत पावन को।। प्रकृति का है नियम सखे, परिवर्तन सब कुछ होता ...
मुरलीधर पर मुक्तक
मुक्तक

मुरलीधर पर मुक्तक

=========================== रचयिता : रशीद अहमद शेख 'रशीद' ब्रज, बाबा, बलराम, यशोदा मैया की। राधा, गोपी, ग्वाल, बाँसुरी, गैया की। याद आती है वृन्दावन की, यमुना की, चर्चा जब चलती है कृष्ण-कन्हैया की। कन्हैया मीरा के प्रियतम हो गए। मोह सारे जगत के कम हो गए। पराजित कठिनाइयाँ सब हो गईं, विषम पथ संसार के सम हो गए। वर पाया जब मनमोहन यदुवंशी से। हुए प्रसारित स्वर सुन्दर तब वंशी से। खड़ा रह गया साश्चर्य कानन में बांस, प्रकट हुई जब सरगम उसके अंशी से। ग्राम, क़स्बा, नगर, पुर अथवा पुरी। सर्वकालिक सतत् वह स्वर माधुरी। क्यों न हो संसार में उसका महत्व, मुरलीधर की मुँह लगी है बांसुरी।   लेखक परिचय :-  नाम ~ रशीद अहमद शेख साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’ जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१ जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्...
बोलता कश्मीर
कविता

बोलता कश्मीर

======================= रचयिता : परवेज़ इक़बाल -नज़्म- बोलती हैं सलाखों पे भिंची गर्म मुट्ठियाँ सुने पड़े डाकखानों में लगे लिफाफों के ढ़ेर. और मोबाइल के इनबॉक्स में पड़ी लाखों चिट्ठियां... क्या सच में आज़ाद हूँ मैं....? सन्नाटे के शोर से फटती हैं कानों के रगें खामोश लब और सुर्ख आंखें धधकते सीने पस्त बांहें... सर्द हवा में भी है एक अजीब सी तपिश सवाल करती है चीखते दिल से यह खामोश सी खलिश क्या सच में आज़ाद हूँ मैं....? पूछती है बर्फ, चिनारों को अपनी सफेदी दिखा कर मुझे रोंद्ता नहीं कियूं कोई अब पहाड़ पर आकर... कहते हैं थपेड़े पानी के डल के किनारों से जाकर.. कोई तो खामोशी तोड़ो शिकारों से गीत गाकर... उतारो पानी मे सूखी पड़ी पतवारों को कोई तो आबाद करो इन सूने शिकारों को.... हाँ आज अफसोस नहीं तुम्हें मेरे हाल का लेकिन देना पड़ेगा जवाब कभी तुम्हें भी मेरे सवाल का ये नफरत हरगिज़ न खीर का ज़ायका बढ़ाएगी... दूध प...
वन्दे मातरम् गाते रहेंगे
कविता

वन्दे मातरम् गाते रहेंगे

============================== रचयिता : रीतु देवी वीर रस गीत वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् गाते रहेंगे। सीमा पार घुसपैठियों को न आने देंगे।। हम संतान हैं वीरांगनाएं माताओं की मुँह तोड़ जवाब देगें शत्रुओं की गोलियों की चिंगारी बन हम राख कर देंगे हर कैम्प दुश्मनों के बुरी नजर फोड़ मुस्कान लाऐंगे होठों माँ-बहनों के वन्दे मातरम् ,वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम् गाते रहेंगे। सीमा पार घुसपैठियों को न आने देंगे।। हर प्रहार सहेंगे भारतभूमि शान वास्ते हँसते-हँसते आँच न कभी आने देंगे माँ भारती पर सस्ते-सस्ते निकल बाहर आऐंगे रिपुओं के चक्रव्यूह तोड़कर जश्न मनाऐंगे बुरे मंसूबों पर पानी फेरकर वन्दे मातरम् ,वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम् गाते रहेंगे। सीमा पार घुसपैठियों को न आने देंगे।। याद दिलाकर छठी का दूध धूल चटा देंगे युद्ध मैदान में सबक सिखाकर थर -थर रूह कंपा देंगे शैतान के मौत की नींद सुला दें...
अभा साहित्य परिषद महू द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन संपन्न
साहित्यिक

अभा साहित्य परिषद महू द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन संपन्न

महू: अभा साहित्य परिषद, महू द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन आज दिनांक २१/०८/२०१९ को शिव एकेडमी परिसर में संपन्न हुआ जिसमें महू क्षेत्र के नामचीन कवि मित्रों ने सहभागिता कर गरिमामय शुरुआत की। कार्यक्रम के आयोजक अनिल वर्मा, एवं अध्यक्षा डॉ ऊषाकिरण त्रिपाठी, उपाध्यक्ष विनोद सिंह गुर्जर, डॉ पी एस दुबे, डॉ विमल सक्सैना, दिव्या सक्सैना, बिंदु के. पंचोली, अंजना ठाकुर, डा. जगदीश चौहान, भगवान दास तरंग, दीपक जैसवानी, गगन खरे जी, अभिषेक जोशी, यश कौशल, देवांशी, प्रियदर्शिनी, के के पंचोली, रमेश जैन, राही इत्यादि कवियों द्वारा रचना पाठ किया गया। काव्य निशा में शमां को रोशन अपने कुशल संचालन द्वारा श्री रमेश जैन "राही' द्वारा की गया। श्रोताओं में पीथमपुर से पधारे  संजय सक्सैना, महू , कोदरिया से डॉ अनिमेश श्रीवास्तव एवं स्थानीयजन सम्मिलित हुए। अंत में कवियों का आभार, आयोजक अनिल वर्मा जी ने व्यक्त किया। - ...
मोड़ आया तो
कविता

मोड़ आया तो

=================== रचयिता : सतीश राठी मोड़ आया तो जुदा होने का मौका आया सीप से मोती विदा होने का मौका आया वह कली खिल गई और फूल बनी तो उसकी खुशबू में नहाने का है मौका आया जो जगह वह पा न सका फकीर बन कर बना इंसान तो खुदा होने का मौका आया गलतियों के खिलाफ जब उठेंगे हाथ सभी यह समझ लेना गदा होने का मौका आया पीठ पर धूप को लादे हुए जाएं कब तक झुकी है शाम तो विदा होने का मौका आया   लेखक परिचय :-  नाम : सतीश राठी जन्म : २३ फरवरी १९५६ इंदौर शिक्षा : एम काम, एल.एल.बी लेखन : लघुकथा, कविता, हाइकु, तांका, व्यंग्य, कहानी, निबंध आदि विधाओं में समान रूप से निरंतर लेखन। देशभर की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में सतत प्रकाशन। सम्पादन : क्षितिज संस्था इंदौर के लिए लघुकथा वार्षिकी 'क्षितिज' का वर्ष १९८३ से निरंतर संपादन। इसके अतिरिक्त बैंक कर्मियों के साहित्यिक संगठन प्राची के लिए 'सरोकार' एवं 'लकीर' पत्...
ग़ज़ल
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======================== रचयिता : शरद जोशी "शलभ" शम्मे उल्फ़तको हमेशा ही जलाया हमने।। रस्मे उल्फ़त को हमेशा ही निभाया हमने। वो तो राहों में अकेले ही चला करते थे। साथ उनको तो हमेशा ही चलाया हमने।। दूर रहने के बहाने तो उन्हें आते हैं। उनको नज़दीक हमेशा ही बुलाया हमने।। दिल दुखाया है उन्होंने तो हमारा अक्सर। दिल में उनको तो हमेशा ही बसाया हमने।। क्या करें उनसे शिक़ायत वो ग़ैर ही ठहरे। अपना उनको तो हमेशा ही बताया हमने।। अब इरादा है उन्हें उनके हाल पर छोड़ें। उनको पलकों पे हमेंशा ही बिठाया हमने।। क्यूँ "शलभ" को वो मिटाने पे हुए आमादा। उनपे ख़ुद को तो हमेशा ही मिटाया हमने।।   परिचय :- धार जिला धार (म.प्र.) निवासी शरद जोशी "शलभ" कवि एवंं गीतकार हैं। विधा- कविता, गीत, ग़ज़ल। आप विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वाणी भूषण, साहित्य सौरभ, साहित्य शिरोमणि, साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित हैं। म....
मुस्कुरा रहा वतन
कविता

मुस्कुरा रहा वतन

==================== रचयिता : कार्तिकेय त्रिपाठी 'राम' हरी-भरी वसुंधरा को देख कर मेरा वतन, मुस्कुरा रहा है ऐसे फूल का कोई चमन। हर जवान देखता है सीना तानकर यहां, आजाद,भगत,बोस ने जन्म लिया है जहां। जमीं है मेरे प्यार की जमीं है मेरे दुलार की, महक ये बिखेरती प्रेम,पावन,प्यार की। ये धरा भी देखो हमको कैसे यूं लुभा रही, छा रही अमराई है गंगा सुधा बरसा रही। इसका थोडा़ गुणगान करें और इसका मान धरें, गीत भी अर्पण करें और मन दर्पण करें। पा रहें हैं इससे मनभर खुशियों का जहान हम, रक्त रंजित ना धरा हो इसका धरें ध्यान हम। संजीवनी है ये धरा मुस्कानों से भर दें घडा़, इससे बढ़कर कुछ नहीं है इस धरा पर है धरा। पाकर धरा पर हम ये जीवन जीते ही तो जा रहे, शीर्ष पर फहरा तिरंगा हिन्द जन मुस्का रहे। लेखक परिचय :- कार्तिकेय त्रिपाठी 'राम' जन्म - ११.११.१९६५ इन्दौर पिता - श्री सीताराम त्रिपाठी पत्नी - अनिता, पु...
जन्मे कुअँर कन्हाई
कविता

जन्मे कुअँर कन्हाई

==================== रचयिता : मनोरमा जोशी बृज मे बटत बधाई, जन्मे कुअँर कन्हाई। आँधी रात घणी बरसात, जमना खल खल उबराई, जन्मे कुअँर कन्हाई। कारागृह के बंद द्धार, बिन चाबी ताले खुल गये, अदभुत लीला रचाई, जब जन्मे कुअँर कन्हाई। जहाँ जन्म लिया वहां पिया दूध नहीं, जहाँ दूघ पिया वहां लिया जन्म नहीं, दो दो माता ने खुशियां मनाई। ऐसे जन्मे कुअँर कन्हाई। कंस मामा का करने सफाया, रची कान्हा ने ऐसी माया, धन धन प्रभु की चतराई, शोभा बरणी न जाई । बाजत ढोल नगाड़ा घर घर, और बाजे शहनाई। जब जन्मे कुअँर कन्हाई। लेखिका का परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा - स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र - सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं। विभिन्न पत्...
तोहफा
लघुकथा

तोहफा

==================== रचयिता : माधुरी शुक्ला राहुल को दादी बहुत प्यार करती है। वह भी दादी का खूब ख्याल रखता है पापा-मम्मी से भी ज्यादा। दादी उसे जब भी अपने जमाने की बातें सुनातीं तो उसमें पक्की सहेली सरला का जिक्र जरूर आता। उनके बारे में बात करते वक्त दादी के चेहरे पर खुशी तैर जाया करती थी। पहले सरला दादी उनके यहां आ जाया करती थी पर अब बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य की खराबी के चलते काफी समय से उनका आना नहीं हुआ। आज दादी का जन्मदिन है। सब उन्हें शुभकामनाएं और तोहफे दे रहे हैं। राहुल ने कुछ अलग करने की ठान रखी है। वह शाम को दादी को पहले मंदिर फिर सरला दादी के घर ले जाता है। दोनों को खूब खुश देखकर उसे लगता है जन्मदिन पर दादी के लिए इससे बड़ा तोहफा शायद ही दूसरा कोई होता। फिर दादी भी तो बार-बार यही कह रही है सरला से मिलकर आज मेरा दिन सार्थक हो गया। लेखीका परिचय :-  नाम - माधुरी शुक्ला पति...