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बजरंगी हो कमाल..
कविता

बजरंगी हो कमाल..

रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" =========================================================================================================== बजरंगी हो कमाल..                                                       माता अंजनी के लाल,बजरंगी हो कमाल, महावीर महाभक्त रामजी के आज्ञाकारी हो, तीनों लोकों में तुम पूज्य,तुम सम न कोऊ दूज, थामें हाथ वज्र,ध्वजा श्रीराम के पुजारी हो, माता सीता के दुलार सारा जग करे प्यार, जय हो पवनकुमार तुम विशाल ह्रदयकारी हो, शत्रुओं के तुम काल,दुख हरते हर हाल, हर के धरा का तम करते जग में उजियारी हो, तुम्हारी महिमा का बखान खुद करते श्रीराम, सारे रोगों को हो हरते तुम महान उपचारी हो, बल,विद्या,बुद्धि,धैर्य का सभी को दो स्थैर्य, कलियुग के मुख्य देवता तुम जग के अधिकारी हो, लेखक परिचय :- शिवांकित तिवारी "शिवा" युवा कवि,लेखक एवं प्रेरक सतना (म....
तकता रहा मैं  अपलक अम्बर
कविता

तकता रहा मैं अपलक अम्बर

रचयिता : भारत भूषण पाठक =========================================================================================================== तकता रहा मैं अपलक अम्बर तकता रहा मैं  अपलक अम्बर। सहस्त्र रश्मियों की कान्ति  दिवालोक में पड़ चुकी धूमिल।। विछोह की वेदना से हृदय  था व्यथित । क्या वो आएगी? शायद आ जाए! ऐसी थी आशा। न जाने क्यों  मुझको प्रतीत  हो रही थी निराशा ।। फिर भी  मन में लिया आस तकता रहा आकाश । शायद वो आए! मेरे  मन के बुझे दीप जलाए।। भयमिश्रित हृदय कर रहा था अबतक यह प्रश्न। क्या वो आएगी?शायद आ जाए। सुबह की बेला थी होने को शाम में परिणत। प्रतीत हो रहा था मानो वो भी हो मेरे संताप में रत।। कोलाहल से दूर मन अब भी  तकता था राह। थी जिसमें  पुष्पित- पल्लवित प्रेम अथाह ।। शायद वो आए!फिर भी .....वो न आई। मन में लिए जिज्ञासा आशा के दीप  जलाए। सहस्त्रों बार बूझे मन की...
शहादत
कविता

शहादत

रचयिता : संगीता केस्वानी =========================================================================================================== शहादत हूं तिरंगे में लिपटा हुआ, मां की गोद में मीठी नींद सोया हुआ, गम जदा मां को बादल ने सहलाया है, पश्मिनी याख - बस्ता मर्म आंचल मुझपे ओडाया है, लहू बहा अंगारा जो देहकाया है, मस्त पवन ने खूब उसे बड़काया है, ना शोक मना, ना अश्क बहा, गाज बन गिरेगा वो, अभी विशाल तेरा सर्माया है। सुनहरी - धानी फसल बन इन खेतों में लेहराऊंगा, हरियाली की चादर ओढ़े तुझसे लिपट ही जाऊंगा, हूं तुझसे जन्मा ,तुझमें ही समाऊंगा, में रख बन तुझमें ही वीलीन होजाऊंगा, ना तुझसे जुदा हो पाऊंगा, आज जिसने खून से नहलाया है, उसे अंगारों से देहकाऊंगा, तेरे हर कतरा - ए - अश्क को बदल सुनामी में प्रलय - ताड़व मचाऊंगा।। की अपनी शौर्य शहादत से, हौसला - ऐ - इरादों से, दुश्मन...
आज का राशिफल २० अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २० अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्.......................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ मास..................................बैशाख पक्ष....................................कृष्ण तिथी...............................प्रतिपदा दोप ०२ .२५ पर्यंत पश्चात द्वितीया रवि..............................उत्तरायण सूर्योदय..........प्रातः ०६ .०३ .१० पर सूर्यास्त.........संध्या ०६ .४९ .०२ पर चंद्रोदय.........संध्या ०७ .५० .१८ पर चंद्रास्त..........प्रातः ०६ .४५ .२७ पर सूर्य राशि..............................मेष चन्द्र रशि.............................तुला नक्षत्र.................................स्वाति संध्या ०५ .५८ पर्यंत पश्चात विशाखा योग......................................वज्र प्रातः ०८ .२१ पर्यंत पश्चात व्यतिपात करण.......................
आज का राशिफल १९ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल १९ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.......................५१२१ विक्रम संवत्.....................२०७६ शक संवत्........................१९४१ मास...................................चैत्र पक्ष.................................शुक्ल तिथी.............................पूर्णिमा दोप ०४ .४६ पर्यंत पश्चात प्रतिपदा रवि............................उत्तरायण सूर्योदय........प्रातः ०६ .०३ .१० पर सूर्यास्त.......संध्या ०६ .४८ .५९ पर चंद्रोदय........संध्या ०६ .४९ .१८ पर चंद्रास्त.........प्रातः ०६ .०३ .३१ पर सूर्य राशि.............................मेष चन्द्र रशि.........................कन्या नक्षत्र.................................चित्रा संध्या ०७ .२८ पर्यंत पश्चात स्वाति योग..................................हर्षण प्रातः ११ .२९ पर्यंत पश्चात वज्र करण...................................बव दोप ०४ .४६ ...
कितनी प्रतिलिपियाँ
कविता

कितनी प्रतिलिपियाँ

रचयिता : शिवम यादव ''आशा'' =========================================================================================================== कितनी प्रतिलिपियाँ इस जिंदगी में बहुत     घटनाएँ घटी हैं मेरे यार  कितनी और सत्य   प्रतिलिपियाँ    भेजूँ तुम्हें मेरे यार   जिंदगी की जंग में अकेला लङता रहा हूँ         खुद से क्योंकि समस्या मेरी थी तुम्हें साथ कैसे ले      सकता था मेरे यार  कुछ यादों से भरी हैं कुछ घटनाओं से बनीं हैं ये जिंदगी की प्रतिलिपियाँ        हैं इन्हें कैसे जला दूँ     मेरे यार लेखक परिचय : नाम शिवम यादव रामप्रसाद सिहं ''आशा'' है इनका जन्म ७ जुलाई सन् १९९८ को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात ग्राम अन्तापुर में हुआ था पढ़ाई के शुरूआत से ही लेखन प्रिय है, आप कवि, लेखक, ग़ज़लकार व गीतकार हैं रुचि :- अपनी लेखनी में दमखम रखता हूँ !! अपनी व माँ सरस्...
हमारी वसुंधरा
कविता

हमारी वसुंधरा

रचयिता : वन्दना पुणतांबेकर =========================================================================================== हमारी वसुंधरा सम्मान करो,तुम वसुंधरा का। जिसने हमको जीवन दान दिया है। मत भूलो तुम उसके ऋण को। जिसने वायु प्राण दिया है। सम्मान करो.....। जल रही अंगारो से यह। अब इसे बचाना हैं। अपनी सुन्दर वसुंधरा को। फिर से हरा बनाना है। सम्मान करो.....। इसी पावन वसुंधरा पर। नानक,गौतम, राम हुए हैं। लाखो वीर कुर्बान हुए है। युगों,युगों के इतिहासों के। बलिदानो को इसने देखा है। ना जाने कितनों सपूतो को।  अपने आँचल में समेटा हैं। सम्मान करो......। वसुन्धरा के कण-कण में।  उपजे हीरे-मोती हैं। धन-धान्य के भंडारो से लहलहाती खेती है। अपनी इसी वंसुधरा को। मिलकर हमे बचाना है। सम्मान करो.......। दिन-प्रतिदिन सूख रही। वसुंधरा मानव अत्याचारों से। जाग उठो अब दुनियॉ वालो। अ...
करके आजाद हमको वतन दे गये
कविता

करके आजाद हमको वतन दे गये

किशनू झा "तूफान" ग्राम बानौली, (दतिया) ******************** तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। उनके भी शौंक थे दिल जवानी भी थी, उनके भाई भी बहनें भी मां बाप थे। सोचा न एक पल दे दी कुर्बानियां, देशभक्ति के उनमें भी क्या जाप थे। देश के बाग में सींचकर  के लहू, फूलते फलते हमको  सुमन दे गये। तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। क्या हुआ नींद आयी जो वो सो गये, नींद दुश्मन के घर की उड़ाकर गये। गर जरुरत पड़ी सिर कटाने की भी, शान से शीश अपने कटाकर गये। जान को अपनी देकर वतन के लिए, वो बचाकर वतन को वतन दे गये। तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। मैं सदा उन शहीदों को करता नमन, जिनके कारण वतन मेरा आजाद है। हिन्दू मुस्लिम मिटे इस वतन के लिए, उनकी कुर्बानी हमको सदा याद है। तीन रंगों को अपना बनाकर कफन,  ज...
मतलब
लघुकथा

मतलब

रचयिता : मित्रा शर्मा =========================================================================================== मतलब वह बिना पैसे का चौकीदार था। दिन रात घर की रखवाली करता और बदले में दो टाइम सूखी रोटियां खा कर घर के सामने पड़ा रहता था। पिछले कुछ दिनों से वह गली का कुत्ता बीमार होने लगा। घर की गृहणी ने अपना फर्ज समझ उसे डॉक्टर को दिखाया। वो कोई बड़ा नस्ल या खरीदा हुआ नही था इसलिए उसकी दवाई पर पैसे खर्च करना परिवार को खूब खटकता। उसकी बीमारी की वजह से पड़ोसियों को भी परेशानी होने लगी। वे बोलने लगे इसके कारण सबको तकलीफ हो रही है आप पाप की भागीदार बन रही हो इसको कहीं दूर ले जाकर छोड़ दो। उसकी रुलाई फूट गई, घर में उसके पति भी बार बार कहरहे थे पैसे खर्च करवाता है कभी कोई आए भोंकता तो है नही। अब की बार तो इसे कहीं छोड़कर ही आऊंगा। वो सोचने लगी कैसी स्वार्थी दुनिया है बेचारा चौकीदारी करता था तब त...
हनुमान जी
कविता, धार्मिक

हनुमान जी

रचयिता : राम शर्मा "परिंदा" ************************************************************************************************************************************************************ हनुमान जी सर्वप्रथम  प्रणाम  करुं राम  दूत  हनुमान  को । कलम से लिपिबद्ध करुं पवनपुत्र यशगान को ।। खेल में समन्दर लांघा समर के आव्हान को । सीता का पता लगाया बढ़ाया प्रभु मुस्कान को ।। ज्ञानियों में अग्रगण्य तुम बढ़ाओ मेरे ज्ञान को । अध्यात्मपथ का गामी हूं आतुर अमृत पान को ।। अतुल बल के धाम तुम मारो षडरिपु शैतान को । पाऊं  मैं राम  दरबार में भक्त  सम  सम्मान  को ।। लेखक परिचय : -  लेखक परिचय : -  नाम - राम शर्मा "परिंदा" (रामेश्वर शर्मा) पिता स्व जगदीश शर्मा आपका मूल निवास ग्राम अछोदा पुनर्वास तहसील मनावर है। आपने एम काम बी एड किया है वर्तमान में आप शिक्षक हैं आपके तीन क...
 मन की धारा
लघुकथा

 मन की धारा

रचयिता : विजयसिंह चौहान ===========================================================================================  मन की धारा कॉलेज की अभी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई थी कि योगेश की आंखें, आंचल की छांव, जुल्फ और कजरारी आंखों में समाने लगी । एक तरफा दिन दे बैठा रमा को। अब योगेश का मन  पढ़ाई में कम और उसके इंतजार में ज्यादा लगता था। फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टा के संदेश और उसके इंतजार में पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी। गुड मॉर्निंग से गुड नाइट तक नियमबद्ध हर संदेश पर नजर गड़ाए योगेश भावी जीवन के ढेरों सपने बुन चुका था। रमा भी जानती थी, उसके मन की बात।  मगर कभी कह नहीं पायी, शायद इसीलिए योगेश के संदेश के जवाब में वह महज स्माइली और सेड़ी  इमोजी ही  भेजती थी जिससे योगेश खासा परेशान रहता। एक दिन कट्ठा मन करके रमा ने योगेश को एक संदेश भेजा जो कि इस प्रकार था:- मोहब्बत पहले अंधी हुआ करती थी । इला...
दुनिया
कविता

दुनिया

रचयिता : राम शर्मा "परिंदा" =========================================================================================================== दुनिया अजीब-अजीब हालात दिखाती है दुनिया । डर गये तो जीवनभर डराती है दुनिया  । जीवन में हमेशा मुस्कुराते रहो , गर रो दिये तो फिर रुलाती है दुनिया । जिंदो के हालात कोई न पूछे , मुर्दो को कंधे पर उठाती है दुनिया । गरीबों को रोटी भी सूखी मिल रही , पत्थरों को घी- दूध से नहलाती है दुनिया । कहने को तो शिक्षा का प्रसार हो गया , फिर भी अंधविश्वासों में खो जाती है दुनिया । जीवनभर जलें दुश्मनों की आहों से , फिर भी मरने के बाद जलाती है दुनिया । पत्थरों पर भी रस्सी के निशान हो गये , 'परिंदा' की बातें समझ न पाती है दुनिया । लेखक परिचय : -  नाम - राम शर्मा "परिंदा" (रामेश्वर शर्मा) पिता स्व जगदीश शर्मा आपका मूल निवास ग्राम अछोदा...
ममता
लघुकथा

ममता

रचयिता : कुमुद के.सी.दुबे =========================================================================================================== ममता  रश्मि आज ऑफिस से जल्दी घर आ गई थी, राकेश अभी लौटे नहीं थे। राकेश के इन्तजार में वह गलियारे मे टहल रही थी। चहलकदमी करते हुये रश्मि का ध्यान अपने बेटे प्रवीण की ओर चला गया जो जाॅब के सिलसिले मे 5 वर्ष पहले आस्ट्रेलिया गया था और वहीं सटेल हो गया।रश्मि का मन विचारों के गोते लगाने लगा। पूरा सप्ताह निकल गया प्रवीण व्यस्तता के चलते मिलने नहीं आ सकता तो क्या फोन पर मां - बाप की खैर खबर लेने का वक्त भी नहीं निकाल सकता। जब बेचलर था, रोजाना ऑफिस से लौटने के बाद फोन पर मां बाप के हाल जाने बगैर सोता नहीं था और शादी के बाद पत्नि- बच्चे का होकर रह गया.... कि फोन की घंटी ने रश्मि के विचारों मे लिपटी निंद्रा को तोडा दिया । उसने तेज कदमों से भीतर जाकर रिसीवर ...
बुझ गई इस तरह
ग़ज़ल

बुझ गई इस तरह

रचयिता : नवीन माथुर पंचोली =========================================================================================================== बुझ गई इस तरह बुझ गई इस तरह अब लगी। जिस तरह घूँट भर तिश्नगी। _________________________ वक़्त ने जब इशारा किया, तब चली दो क़दम जिंदगी। __________________________ किस तरह दूर रक्खें नज़र, भा  गई  यार  की सादगी। _________________________ जब  तलक़  वो रहे सामने, उनसे  होती  रही दिल्लगी। __________________________ रात थी, नींद  थी,ख़्वाब थे, आँख लेकिन जगी की जगी। __________________________ है उन्हीं की दुआ का असर, जिनकी  करते  रहे  बन्दगी। लेखक परिचय :- नाम : नवीन माथुर पंचोली निवास : अमझेरा धार मप्र सम्प्रति : शिक्षक प्रकाशन : देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन। तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान : साहित्य गुंजन, शब्द प्रव...
मैं जला हूँ दीप बन कर
कविता

मैं जला हूँ दीप बन कर

रचयिता : रामनारायण सोनी =========================================================================================== मैं जला हूँ दीप बन कर मैं तमिस्रा में जला हूँ दीप बन कर तैल की इक बूँद भी ना शेष होगी गंध बुझती बातियों की जब लगे प्रिय तुम्हारी प्रीत ही अवशेष होगीअंक में ज्वाला समेटे उम्र भर से जो तिरोहित हो रही नित रश्मियाँ पन्थ में तेरे बिछी है आस बन कर प्रस्तरों के भार सहती संधियाँ सांझ से ही चिर प्रतीक्षा जागती है हर निशा तो व्यंजना लेकर खड़ी है भोर तक है साध में यह लौ अकंपित भग्न अधरों पर पिपासा हर घड़ी है प्राण में हर पल निरे निःश्वास ही है जिन्दगी कण-कण तिमिर में घुल रही बंधनाएँ वर्जनाएँ बस प्राण की है थाम कर इन धड़कनों को चल रहीं परिचय :- नाम - रामनारायण सोनी निवासी :-  इन्दौर शिक्षा :-  बीई इलेकिट्रकल प्रकाशित पुस्तकें :- "जीवन संजीवनी" "पिंजर प्रेम प्रका...
मेरा साया
कविता

मेरा साया

रचयिता : रुचिता नीमा ===========================================================================================मेरा साया आज जब आईने में खुद को देखा तो यकीन ही नही हुआ,,, गाड़ी , बंगला सबकुछ था , पर जिसे होना था पास मेरे।।। वो न जाने कहा खो गया था, घिरा हुआ था दूसरों के साये से खुद मेरा साया ही नही था।।। बहुत खोजा उसे लेकिन वो अंत तक नहीं मिला, इस दुनिया की दौड़ में मेने खुद को ही खो दिया।।। अब पाना है बस खुद को छोड़कर बाहर की जंग जीतना है खुद से ही करकर खुद को बुलंद लेखिका परिचय :-  रुचिता नीमा जन्म 2 जुलाई 1982 आप एक कुशल ग्रहणी हैं, कविता लेखन व सोशल वर्क में आपकी गहरी रूचि है आपने जूलॉजी में एम.एस.सी., मइक्रोबॉयोलॉजी में बी.एस.सी. व इग्नू से बी.एड. किया है आप इंदौर निवासी हैं। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपन...
आज का राशिफल १८ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल १८ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 ************************************************************************************************************************************************************ कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्........................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ मास......................................चैत्र पक्ष....................................शुक्ल तिथी................................चतुर्दशी संध्या ०७ .२९ पर्यंत पश्चात पूर्णिमा रवि................................उत्तरायण सूर्योदय............प्रातः ०६ .०४ .०९ पर सूर्यास्त............संध्या ०६ .४८ .२२ पर चंद्रोदय............संध्या ०५ .४८ .२४ पर चंद्रास्त.............प्रातः ०५ .२० .३५ पर सूर्य राशि................................मेष चन्द्र राशि.............................कन्या नक्षत्र....
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रचयिता : मित्रा शर्मा =========================================================================================================== कहानी लवों से बात क्या करना जब धड़कन बोलती हो गुफ्तगू सारी क्या करना जब खामोशियाँ शोर करते हो। लफ्जों से दिल दुखना यह यह भी एक बहाना है खामोशियाँ के प्रहार से भी आंसू झरते है दर्द की धुंवा ऐसा उठा कि नजर से दूर हो गए जलकर राख हो गए सपने निशान छोडकर चलेगए। गमों की दुनिया मे अपने को अकेले तन्हा छोड़ दिए दुश्वार जिंदगी की यही कहानी तोहफा खामोशियाँ दे गए तुम्हारी नजर अंदाजी से हमने भी यह सिख लिया तुम्हे यही लौटा दूँ यह सौक रख लिया   परिचय :- मित्रा शर्मा महू (मूल निवासी नेपाल) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में ट...
आज का राशिफल १७ अप्रैल सन २०१९
राशिफल

आज का राशिफल १७ अप्रैल सन २०१९

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द..........................५१२१ विक्रम संवत्.........................२०७६ शक संवत्............................१९४१ मास.......................................चैत्र पक्ष.....................................शुक्ल तिथी................................त्रयोदशी रात्रि १०.२५ पर्यंत पश्चात चतुर्दशी रवि................................उत्तरायण सूर्योदय............प्रातः ०६.०५.२० पर सूर्यास्त............संध्या ०६.४८.०५ पर सूर्य राशि.................................मेष चन्द्र राशि...............................सिंह नक्षत्र........................उत्तराफाल्गुनी रात्रि ११.३२ पर्यंत पश्चात हस्त योग.......................................ध्रुव संध्या ०६.२७ पर्यंत पश्चात व्याघात करण..................................कौलव प्रातः ११.५५ पर्यंत पश्चात तैतिल ऋतु........
मैं करूँ तुझसे क्या गिला
कविता

मैं करूँ तुझसे क्या गिला

रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर =========================================================================================================== मैं करूँ तुझसे क्या गिला मैं करूँ तुझसे क्या गिला, तौबा । तुझसा कोई नही मिला, तौबा ।।... मैंने सोचा कि तू अब हां कर देगी, ढा दिया तूने मुहब्बत का किला तौबा ।। तुझसा कोई नही मिला, तौबा।।... मैंने सोचा पर तू नहीं आई, किससे करूँ में गिला, तौबा ।। तुझसा कोई नही मिला, तौबा।।... पहले वो साईकिल से आते थे, अब विमानों का काफिला तौबा ॥ तुझसा कोई नही मिला, तौबा।।... ना दिन को चैन ना रात में सुकूँ, तू ही दे कुछ मशविरा, तौवा।। तुझसा कोई नही मिला, तौबा।।... वो कहीं जाते है तो बताते हैं, मेरी सल्तनत का ये जिला तौबा ।।... तुझसा कोई नही मिला, तौबा।।... परिचय :-   विनोद सिंह गुर्जर आर्मी महू में सेवारत होकर साहित्य सेवा में भी क्रिया शील हैं। आप अभा सा...
कलम कारवाँ
कविता

कलम कारवाँ

 रचयिता : डॉ सुनीता श्रीवास्तव ============================================= कलम कारवाँ रूके ना कभी कलम मुझसे बढ़ता रहे विचारों का कारवां, एक बार चली जो कलम, रच दे कागज पर इबारत जहां तक फैला हो नीला आसमां। थके ना हम, पथ पर चलते रहे बना दे चहकते हुये विचारों का घरौंदा, उड़े सप्न-पाखी पंख पसारे नील आसमा में , उड़े कोई परिंदा। खत्म ना होकलम की काली स्याही चित्रित करे तूलिका से, रंग बिरंगे जीवन की कहानी, मिटे ना जो सदियों तक पृष्ठों से चढ़े रंग जैसी अमावस रजनी। लिखे एक सुनहरा ऐसा इतिहास प्रवाह उसकी बहे निरंतर चिरंतन, पीढ़ी दर पीढ़ी पढ़े वह गाथा अमर हो जाए 'मेरा चिंतन'।   परिचय :-  नाम :- डॉ सुनीता श्रीवास्तव शेक्षणिक योग्यता - एम. एस .सी .,बी. एड.,पत्रकारिता डिप्लोमा ,साहित्य रत्न जन्म दिनांक - 3।7।59 जन्म स्थान - राजगढ़ (ब्यावरा)म.प्र. कार्य अनुभव - सांझ लोकस...
युगों के बाद कोई महावीर होता है!
कविता

युगों के बाद कोई महावीर होता है!

रचयिता : रशीद अहमद शेख =========================================================================================================== युगों के बाद कोई महावीर होता है! हर एक देश में हर युग में वीर होता है! युगों के बाद कोई महावीर होता है! जगत में छाती है जब-जब अधर्म की बदली! ज़मीं पे गिरती है रह-रह के ज़ुल्म की बिजली! जब आदमी को सताती है गुनाहों की उमस, अंधेरे दौर में आती है रोशनी उजली! जब आसमान की आंखों में नीर होता है! युगों के बाद ••••••••••••• महापुरुष तो ज़माने में आते-जाते हैं! भटकने वालों को रस्ता सही दिखाते हैं! प्रयत्न करते हैं कल्याण हेतु आजीवन, महान कर्म से इतिहास वे बनाते हैं! कभी-कभी ही कोई बेनज़ीर होता है! युगों के बाद •••••••••••••••• बस एक अवधि तक ही भूमि पाप ढोती है! फिर इसके बाद सिसकती है खूब रोती है! दशों दिशाओं में मचता है हाहाकार बहुत, मनुज को देख दुख...
आज का राशिफल १५ अप्रैल सन २०१९
राशिफल

आज का राशिफल १५ अप्रैल सन २०१९

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द..........................5121 विक्रम संवत्.........................2076 शक संवत्............................1941 मास.......................................चैत्र पक्ष.....................................शुक्ल तिथी...................................दशमी प्रातः 07.08 पर्यंत पश्चात एकादशी रवि.................................उत्तरायण सूर्योदय.............प्रातः 06.07.29 पर सूर्यास्त.............संध्या 06.47.14 पर चंद्रोदय...............दोप 02.39.11 पर चंद्रास्त...............रात्रि 03.05.47 पर सूर्य राशि.................................मीन चन्द्र राशि................................सिंह नक्षत्र......................................मघा रात्रि 03.57 पर्यंत पश्चात पूर्वाफाल्गुनी योग........................................गंड रात्रि 01.34 पर्यंत पश्च...
ममता
लघुकथा

ममता

रचयिता : सत्य प्रकाश भारद्वाज ============================ ममता महिला कल्याण समिति की सभा में श्रीमती जॉर्ज ने अध्यक्षीय भाषण में विशेष जोर देते हुए कहा--- "बच्चों को पाउडर वाला दूध पिलाना चाहिए अपना' गाय या भैंस का दूध नहीं पिलाया जाए। इससे अनेक शारीरिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं। विदेशों में महिलाओं ने इस ओर विशेष ध्यान देकर अपनी जवानी तथा सुंदरता को बनाए रखा है।" इसके प्रभाव से उन धनाढ्य कालोनी में महिलाओं ने बच्चों को अपना दूध पिलाना बंद कर दिया। श्रीमती कपूर ने अपनी आया को कहा, 'देखो!.. मुन्ने को आज से यह पाउडर का दूध पिलाना है। मैं इसे अपना दूध नहीं पिलाउंगी ।' 'यह आप क्या कह रही हैं?.... ''बीबीजी मां का दूध तो बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होता है। 'मैं तो अपने लल्ला को अपना ही दूध पिलाती हूं।' 'बहस ना करो! जैसा मैं कहती हूं वैसा ही करो।' बच्चा डिब्बाबंद पाउडर का दूध पीने लगा। दूध...
लाचार हैं
कविता

लाचार हैं

रचयिता : शिवम यादव ''आशा'' ============================ लाचार हैं खूब हैं लपटे जलाती  हम साधारण लोगों को  रिश्वत की अंधेरी रात में,    कब बीत जाती हैं  सारी उम्रे समझ ही     नहीं पाते ... बस खुद्दारी की तलाश में,   दिल तो तब रो उठता है  जब घर में बेटी पूछती है        पापा से ... कब तक जिएँगें जिंदा  लाश बनकर इस दुनियाँ में  न आने वाले अच्छे दिन       की तलाश में ... लेखक परिचय : नाम शिवम यादव रामप्रसाद सिहं ''आशा'' है इनका जन्म ७ जुलाई सन् १९९८ को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात ग्राम अन्तापुर में हुआ था पढ़ाई के शुरूआत से ही लेखन प्रिय है, आप कवि, लेखक, ग़ज़लकार व गीतकार हैं रुचि :- अपनी लेखनी में दमखम रखता हूँ !! अपनी व माँ सरस्वती को नमन करता हूँ !! काव्य संग्रह :- ''राहों हवाओं में मन " आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ...