कितना राष्ट्रप्रेम कितनी राष्ट्रभक्ती
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विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर म.प्र.
किसी भी राष्ट्र की भौगोलिक सीमा ये उस राष्ट्र का अस्तित्व, महत्व, और पहचान के लिये पर्याप्त नही होती। जमीन पर दिखने वाली इस सीमा रेखा के अंदर उस राष्ट्र के नागरिकों के अपने राष्ट्र के प्रति जो आदर, जो कर्तव्य, जो प्रेम और अपनत्व की भावनाएं अपने परिपक्व स्वरूप मे होती है, और यह सब जब राष्ट्र के नागरिकों के व्यवहार और आचरण मे प्रत्यक्ष रूप से परिलक्षित होती है, तब हम इसे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती कह सकते है। राष्ट्र के स्थायित्व और सर्वांगीण उन्नती के लिए तथा भावनात्मक रूप से राष्ट्र को एक सूत्र मे पिरोये रखने के लिए इसी राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती की नितांत आवश्यकता होती है।
- इतिहास साक्षी है कि राष्ट्रप्रेम के अभाव मे भारत का विभाजन हुआ। आगे संयुक्त पाकिस्तान मे भी नागरिकों के राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती की भावनाओं का ऱ्हास होने के कारण ...





















