शक्ति के पर्व पर क्या करें … गीतिका छ्न्द
गिरेन्द्रसिंह भदौरिया "प्राण"
इन्दौर (मध्य प्रदेश)
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गीतिका छ्न्द
शक्ति का त्यौहार है हम शक्ति का संचय करें।
शक्ति के अस्तित्व को हम भक्ति से अक्षय करें।।
लक्ष्य क्या उपलक्ष्य क्या है हम प्रथम यह तय करें।
ध्यान से चिन्तन करें फिर पन्थ का निर्णय करें।।१।।
कर्म को निष्काम सेवा मानकर तन्मय करें।
बात अनुभव सिद्ध गहरी है न कुछ संशय करें।।
भाग्य का निर्माण करता कर्म है निश्चय करें।
धर्म की हर धारणा में कर्म है सविनय करें।।२।।
आइए स्वागत सहित संसार से परिचय करें।
तामसी व्यवहार छोड़ें दम्भ तज विनिमय करें।।
द्वेष त्यागें शुभ हृदय अनुराग का आलय करें।
आपसी सम्बन्ध गाढ़े और करुणामय करें।।३।।
ज्ञान को उपसर्ग कर लें मान को प्रत्यय करें।
स्वयं को जीतें स्वयं से दुष्ट पर फिर जय करें।।
बाहुबल रण-योजना कौशल-कला लयमय करें।
बुद्धि-बल तन-शक्ति मन-संकल्प का अन...
























