बांके बिहारी
डॉ. राम रतन श्रीवास
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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किंचित चिंतन चीते मन में प्रभु,
राही को त्राहि हुए सब ग्रामा।
भय क्लेश सबे दुनिया अरु,
जन-जन आश तुम्ही हो श्यामा।।
सीस शिखी उर-बाहु प्रलंब,
कमल नैन, बंकिम दृग भौंहें।
कर मुरली लकुटी धरी लाठी,
ग्वाल बाल गौ सुन्दर सोंहैं।।
मायापति के माया को न जाने,
खरारी नित नव नाच नचावें।
आन बसों "राधे" मन मंदिर,
ग्वालिन यमुना तट बाट जोरावें।।
राह खरो वहशी दरिंदा एक,
गोपिन व्याकुल हुए परमात्मा।
कहत "राधे" बांके बिहारी को नाम,
त्राण मिटाओ वसुधा विश्वात्मा।।
परिचय :- डॉ. राम रतन श्रीवास
निवासी : बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
साहित्य क्षेत्र : कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यिक मंच छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष
सम्मान : कोरबा मितान सम्मान २०२१ (समाजिक चेतना एवं सद्भाव के क्षेत्र में)
शिक्षा : हिन्दी साहित्य (स्नातकोत्तर)
अतिरिक्त : रेल प...



















