सावन
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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आकाश को निहारते
मोर सोच रहे,
बादल भी इतने वाले हो गए
बिन बुलाए बरते नहीं
शायद बादल को
कड़कड़ाती बिजली
चमकती होगी
सौतन की तरह।
बादल का दिल
पत्थर का नहीं होता
प्रेम जागृति होता है
आकर्षक सुंदर, धरती के लिए
धरती पर आने को
तरसते बादल
तभी तो सावन में
पानी का प्रेम-संदेश प्रेमी रहे
रिमझिम फ़ुहारों से।
धरती का रोम -रोम,
संदेश संदेश
हरियाली बन उठती है
मोर अपने घोड़े को फैलाकर
स्वागत है नाचने
बाघ बादल चले जाते हैं
बेवफाई करके
छोड़ो जाओ हरित
सावन में पानी की यादें
धरती पर
प्रेम संदेश के रूप में।
परिचय : संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता : श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि : २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा : आय टी आय
निवासी : मनावर, धार (मध्य प्रदेश)
व्यवसाय : ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन : देश-विदेश की विभि...






















