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आम वृक्ष
कविता

आम वृक्ष

देवकी दर्पण पाटन जिला बूंदी (राजस्थान) ******************** बहुत ही उपयोगी, होता है सघन खूब, दीर्घजीवी हितकारी, वृक्ष बड़ा आम है। भारत के दक्षिण में, कन्या कुमारी से यह, आगे तक फैला हुआ, आम का ही नाम है। उत्तर में हिमालय, की तराई तक यह, तीन हज्जार फुट का, ऊंचा आम धाम है। पश्चिम में पंजाब से, पूरब आसाम तक, भारत वनों में खूब, आम का ही काम है।।१।। अनुकूल जलवायु, साठ फुट तक ऊंचा, तरू शान से हो जाता, स्वाभिमान से खड़ा। छाया भरपूर होती, धूप को देता चुनोती, लकड़ी नरम सोती, तरु होता है बड़ा। होती है टिकाऊ काष्ठ, लेता काम पूरा राष्ट्र, चाय की पेकिंग पाष्ट, बक्सा बनाते कड़ा। आम वृक्ष का कमाल, गोन्द देती रहे छाल, भाई आम लगा पाल, मौज जिन्दगी उड़ा।।२।। गोन्द की बने दवाई, ओषधालयों को भाई, रोगियों को रास आई, आम वृक्ष मान है। पोधा जब चलता है, चार साल पलता है, फिर यह फलता है, भारत...
राम नाम की महिमा
भजन

राम नाम की महिमा

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** शाश्वत मंत्र दिया हनुमत ने, उसका हूं मैं सुमिरन करता। करुणा बरस रही ईश्वर की, उससे हूं नित झोली भरता। शाश्वत मंत्र... हनुमत राम जप रहे प्रतिपल, दोनो हाथों इसे लुटाते। जो आस्था को दृढ़ करपाते, उनकी झोली मोती आते। प्रभु चरणों में डाल दुखों को, वोnअभक्तों के दुख है हरता। शाश्वत मंत्र... जिसने भी इस मंत्र को पकड़ा, उसका जीवन धन्य हो गया। शबरी ने था नाम को जपा, दरस को ईश्वर घर पे आगया। शिव जी जपते प्रतिपाल उसको, वो शिव का है पूजन करता। शाश्वतमंत्र ... राम नाम को रोगी जपता, उसकी औषधि है बन जाता, राम राम है योगी जपता तो, आत्मत्व में है जग जाता। सांसों में प्रभु नाम रमा पाया, वो जीवन मुक्त है करता। शाश्वत मंत्र... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणि...
मैं झील हूँ
कविता

मैं झील हूँ

बृज गोयल मवाना रोड, (मेरठ) ******************** मैं झील हूँ मैं बँधकर रहना नहीं चाहती मैं रास्ते बनाकर स्वतन्त्र बहना चाहती हूँ मैं खामोशियों से घबरा गई हूँ आगे बढ़कर इठलाना चाहती हूँ सागर तक जाकर लहरों में समाना चाहती हूँ मैं झील हूँ। परिचय :- बृज गोयल निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३...
प्रभु चित्रगुप्त जी
कविता

प्रभु चित्रगुप्त जी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** कलम-देवता है नमन्, विनती बारम्बार। हर लेना अँधियार सब, देना नित उजियार।। न्याय देवता तुम भले, पाप-पुण्य का लेख। प्राणी की तुम खेंचते, बिल्कुल सच्ची रेख।। ब्रम्हा ने तुमको जना, हो तुम मानस पूत। तुम हो धर्माधर्म के, सबसे सच्चे दूत।। कायस्थों के पूर्वज, सबसे चतुर सुजान। कलम चलाते सत्य की, देते सबको ज्ञान।। धर्मराज के संग में, धारण करके मर्म। मृत को बतलाते सदा, कैसे उसके कर्म।। बता रहे हैं लेखनी, रखती पैनी धार। साँच सदा हो साथ में, तो उजला संसार।। चित्रगुप्त को पूजना, लेकर मंगलभाव। रखना दिल में नीति का, हरदम चोखा ताव।। बारह पूतों ने किया, सदा सुपावन काम। चित्रगुप्त जी! आप तो, लगते तीरथ धाम।। चित्रगुप्त जी!आप तो, करते चोखा न्याय। आप सदा हैं प्रेरणा, यह सबका अभिप्राय।। प्रकट हुए हो देव तुम, ...
संभल जा इंसान
कविता

संभल जा इंसान

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* सारी दुनिया वह कहे जो सम्मत है विज्ञान धरती -चपटी मानते अभी बहुत इंसान। अड़े हुए हैं झूठ पर जान -बूझ अंजान अंध -श्रद्धा के सामने बौना हुआ ईमान। इंसाँ -इंंसाँ फर्क कर मज़हब लीने मान कुछ ही को छोड़कर सब काफिर शैतान। काफ़िर का जायज़ क़तल इनका यही कहता ज्ञान काफ़िर का कर खात्मा हासिल करो जहान। जो धरती पे पैदा हुआ वो सब ही एक समान यहाँ सभी हकदार हैं, जीव - जंतु - इंसान। प्रेम- मुहब्बत- मुरब्बत इंसान की है पहचान जिस मज़हब ये न रहें वो मज़हब मुर्दा जान। लोगों को वहम का है होने लगा गुमान जो जितना जाहिल दिखे वो ही मज़हब की शान। घटिया- सटिया माल की कुछ दिन चले दुकान बेचा सो वापस फिरे करना पड़े चुकान। परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : ...
जयकारा तो गूँजेगा
कविता

जयकारा तो गूँजेगा

डाॅ. कृष्णा जोशी इन्दौर (मध्यप्रदेश) ******************** सैनिक का सम्मान बढ़ेगा, हिन्द का नारा गूँजेगा ॥ अखिल विश्व में भारत माँ का, अब जयकारा गूँजेगा ॥ वन्दे मातरम् का जयकारा, राष्ट्र भक्ति विश्वास हो॥ आतंकी आतंकवाद का, इस दुनिया से नास हो॥ भारत माता की जय हो, जय हिन्दू सैनिक की शान॥ सबसे पहले याद रहे दो, अधरों पर यह हिंदुस्तान ॥ मोदी जी के साहस बल का, परम सहारा गूँजेगा॥ सैनिक का सम्मान बढ़ेगा, हिन्द का नारा गूँजेगा ॥ परिचय :- डाॅ. कृष्णा जोशी निवासी : इन्दौर (मध्यप्रदेश) रुचि : साहित्यिक, सामाजिक सांस्कृतिक, गतिविधियों में। हिन्द रक्षक एवं अन्य मंचों में सहभागिता। शिक्षा : एम एस सी, (वनस्पति शास्त्र), आई.आई.यू से मानद उपाधि प्राप्त। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, ...
गंगा-तट का अमर विरह
कहानी

गंगा-तट का अमर विरह

भारमल गर्ग "विलक्षण" जालोर (राजस्थान) ******************** गंगा की अगाध धारा पर सांझ की लालसा छा गई। घंटियों की मंद्रित ध्वनि और भक्तों के जप-तप से आकाश गुंजायमान हो उठा। पंडित विश्वंभरनाथ, जिनकी तपस्या से गंगा-तट की बालू भी तप्त हो उठती थी, स्नानोपरांत समाधि में लीन थे। तभी उनकी दृष्टि महादेवी अमृतांशी पर ठहर गई, जो कमल-दल सी कोमलता लिए जल से प्रकट हुईं। उनके आभूषणों की आभा से गंगा की लहरें चमक उठीं। यह पल था जब दो आत्माओं का स्पर्श बिना किसी शब्द के ही अनंत युगों के विरह का सूत्रपात कर गया। महादेवी की सखी मनस्विनी, जिसका हृदय विरह की ज्वाला से धधक रहा था, ने पंडित की ओर संकेत किया। तभी नित्यानंद शुक्ल, चटख रंगों से सजे मुखौटे लिए मुस्कुराते हुए आ धमके। "अहो! यह तो मन्मथ की प्रेम-लीला है!" उनकी हास्य-विनोद भरी वाणी से भक्तजन ठहाकों में भर उठे। इतने में ही राम मनोहर पांड्या, शस...
नहीं किसी को छलेंगे
कविता

नहीं किसी को छलेंगे

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जिनको जो कहना है कहने दीजिये, उन्हें अपनी घमंड में रहने दीजिए, अपनी राहों में कैसे चलना है हम जानते हैं, बेफिक्री वाली मजबूत कदमों के शौकीन हैं हीरों से जड़ित खड़ाऊ कोई पहना दे तो भी किसी का आदेश हम नहीं मानते हैं, ऊंची नीची पहाड़ी में ऊंट न चलाओ, हुनर देखना है तो रेत में दौड़ाओ, कांच में भागने का दम सांप कहां से लाए, खेत की मेढ़ में कोई न छेड़ पाए, जगह परिस्थिति अनुसार सबका महत्व है, किसी का हुनर उनका अपना ही स्वत्व है, केकड़े हैं जो पत्थर की ओर मुड़ जाएंगे, जागरूकता की राह में सदा हमें पाओगे, सफल हुए तो अपना नीला आकाश होगा, मंजिल ले जाने को आदर्शों का प्रकाश होगा, वे अपनी चाल चले हम अपनी चाल चलेंगे, वो डूब सकता है डगर की चकाचौंध में मंजिल दिखलाने वाले नहीं किसी को छलेंगे। परिचय :-  रा...
आपको देश की कसम
कविता

आपको देश की कसम

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** प्रिय देशवासियों आपको देश की कसम अपने बच्चों को देशभक्त बनाएं उन्हें देश से प्रेम करना सिखाएं देशप्रेम है कर्तव्यों को इमानदारी से निभाना मेहनत करके आगे बढ़ना देश के प्रति निष्ठा निभाना अपनी ‌संस्कृति को संभाल कर रखना ईश्वर में विश्वास रखना पड़े जरुरत तो सांसारिकता को ताक पर रखना आध्यात्मिकता ‌की अलख उनमें जगाना अपने देश के बच्चों को पहला प्रेम देश से करना‌ सिखाना देश है सबसे बड़ा देश से बढ़कर नहीं कोई खड़ा देश ही सबको देता है सारे सुख, सुविधाएं देती है देश भक्ति मात-पिता सी शक्ति देश का संबल है धर्म ध्वजाएं देश में सांस्कृतिक चेतना जगाएं आध्यात्म की ध्वजा फहराएं भारत का हर बालक हर बाला स्वयं को देश का सैनिक समझे मन में यह भाव जगाएं तिरंगे से पहला प्यार करना सिखाएं हर मन में बसे तिरंगा हर...
सीता भूमिजा
कविता

सीता भूमिजा

आशा जाकड़ इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सीता-जन्म हुआ भूमि पर वह भूमिजा पुत्री कहलाई भूमिजा जन्म की सच्चाई अल्प जन ही तो समझ पाई पुत्री जन्म सुन रावण हर्षाया खुश होकर ज्योतिषी बुलाया भविष्य जानने की इच्छा से उसकी जन्मपत्री बनवाया। यह कन्या है बहुत भाग्यवान बनेगी ये भारत की शान मान पर एक दिन इसका पति ही बनेगा तुम्हारा काल वरदान निज काल सुन रावण थर्राया क्रोध से ज्योतिषी पर गुर्राया अपशकुनी को हटाओ यहां से कलश में रख दूर फिकवाया जनकपुर के नरेश राजा जनक पूजा पाठ निज जीवन बिताते प्रजा को निज संतान समझते सदा उसका हित चिंतन करते जनकपुर में पड़ गया था सूखा वर्षा ने रूठकर ऐसा मुंह मोड़ा जनता त्राहि त्राहि कर रही थी जनकपुर का जन-जन भूखा राजा जनक ज्योतिषी बुलवाए इस समस्या का ये निदान बताए राजा स्वयं स्वर्णहल क्षेत्र चलाए अवश्य वर्षा से पृथ्वी लहलहा...
आशा
कविता

आशा

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बही मै भावो की भावुकता लिये सरिता सी तिरस्कारित इस जीवन का अंत कहा भूतल पर। कटु आलोचनाओं के विपरीत कोध, इर्शा नही है मन मे अंतर्मन रोता-रोता हे सिर्फ विचार लिये आशाएं बधंती है सिर्फ जीने के लिए परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३" से सम्मानित व वर्तमान में राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर ...
बोलो प्रियतम! कब आओगे….?
कविता

बोलो प्रियतम! कब आओगे….?

बृजेश आनन्द राय जौनपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** कब से रस्ता देख रही हूॅं, अब आओगे, तब आओगे । क्षण क्षण जीवन बीत रहा है, बोलो प्रियतम! कब आओगे?? बारहमासा बीता जाए, जीवन, बिरहा गीत सुनाए। कितनी आई गर्मी -सर्दी, कहकर के भी तुम ना आए। ऋतु-चक्र अब घूम के पूछे, कैसे मन तुम बहलाओगे ? क्षण क्षण जीवन बीत रहा है, बोलो प्रियतम! कब आओगे?? जब तुम मुझको छोड़ गए थे, लगन वार का दिन प्यारा था। सब गाँवों में खुशियाँ चहकी, सब शुभमय अरु सब न्यारा था । तब तुम बोले थे पावस के, आने पर ही फिर आओगे ! क्षण क्षण जीवन बीत रहा है, बोलो प्रियतम! कब आओगे?? पुनवासी का मेला आया, शरद काल मन अति हर्षाया। अम्बर से तुम दमक रहे हो, कतकी ने फिर-फिर दुहराया। ऐसे ही सब जाड़ा बीता, भानु-रश्मि तुम कब लाओगे ? क्षण क्षण जीवन बीत रहा है, बोलो प्रियतम! कब आओगे ?? 'कल', परसों क...
मजदूर
कविता

मजदूर

किरण पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मजदूरी मजदूर की है मजबूरी, दिन रात वह काम है करता, फिर भी वह भूखा ही सोता। बच्चे देखो नंगे फिरते, नहीं पादुका इनके पैर। हाथ में रोटी यही पकवान। नहीं आशियाना इनके पास, नहीं शिक्षा है इनके पास, काबिला ही इनका परिवार, इसमें रमते दिन और रात। टीवी मोबाइल से नहीं है काम, खेतिहर मजदूरी करते तिल मिलाती धूप में तपते, बारिश हो या ठंड अपार, उद्देश्य इनका एक ही "काम"। भाग्य भरोसे इनका काम, कभी सूखा कभी अति है वृष्टि, सबकी मार इसे है पड़ती, राम भरोसे इनका काम, कहां सुख और कहां आराम। हाथों का सिराना रखकर, चैन की नींद सोता दिन रात। सूर्य उदय हो रोटी सेके, दो मिर्ची ऊपर धर लेवे, जी तोड़ मेहनत है करते, पैदा करते धन और धान्य, फिर भी हाथो नहीं कुछ दाम। रात को नाच गान है करते जीवन में आनंद है करते, नहीं मा...
रचे रचनात्मक जिंदगी
कविता

रचे रचनात्मक जिंदगी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सोचना समझना फिर करना जिंदगी का सबसे अहम काम, फुर्सत कभी मिलती ही नहीं, मिलता नहीं पलभर आराम ।। जिंदगी पहिये सी, घूम रही है शिकायत कभी करती ही नहीं, मौन भी रहती है हरदम जिंदगी सीख भी बेजोड़ देती जिंदगी ।। कहती है खुद पे खुद ये जिंदगी करो रोज, रचो रचनात्मक काम, समाज जाति देशहित के काम मौन क्यों, रचो रचनात्मक काम ।। प्रगतिशील गतिविधियों से लड़े जिंदगी प्रगति पथ पर खुद बढ़े मुसीबतो का जंजाल सताएगा सोचना समझना, काम आएगा ।। जिंदगी की है भारी भागदौड़ चुनो समाधान के नए नए मोड़ समाधान की तलाशते रहे धैर्य संयम रखो हरदम सांस मिलेंगे सरल स्रोत, मिलेगी राहें ।। परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्ष...
राधा रानी मै बरसाने में …
भजन

राधा रानी मै बरसाने में …

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** राधा रानी मै बरसाने में आ गया, खुद बताओ कि कैसे मनाऊं तुम्हे। तेरे कान्हा के कुछ गीत मैने लिखे, आओ बैठो तो उनको सुनाऊं तुम्हे। राधा रानी... राधा रानी हो तुम, महारानी हो तुम, बृज की गलियों की रसमय कहानी हो तुम। ब्रज में सब हर समय नाम तेरा जपे, राधे राधे ही मै भी सुनाऊं तुम्हे। राधा रानी... जो भी बसते यहां, उनको तुम पालती, उनके नीरस हृदय में, तुम रस डालती। क्या से क्या बन गया हूं, शरण तेरी पा, जानती हो तो क्या मैं बताऊं तुम्हे। राधा रानी... सोते जगते जपो, हंस के गाके जपो, राधा रानी ये सुनने को आ जाएंगी। नाम पावन है, ये बस गया सांस में, रीझकर तुझपे करुणा बहा जाएंगी। तेरा वात्सल्य कितना है प्यारा, चीर अंतर को कैसे दिखाऊं तुम्हे। राधा रानी... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) ...
पुरुषों का सशक्तिकरण
कविता

पुरुषों का सशक्तिकरण

अभिषेक मिश्रा चकिया, बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** "अब पुरुषों का दर्द भी सुना जाएगा!" भारत की धरा पर घिरा अंधकार, पुरुषों पर टूटा अन्याय का भार। कभी झूठे इल्ज़ाम, कभी मौत का डर, दबा दिया जाता है हर एक स्वर रोज। "अब चुप्पी नहीं, अधिकार चाहिए!" महिलाओं को सम्मान जरूरी सही, पर पुरुषों की व्यथा भी सुननी चाहिए। झूठ के जाल में न फँसाओ उन्हें, हर बेकसूर को अब बचाना चाहिए। "पुरुष भी इंसान हैं, पत्थर नहीं!" दिल उनका भी धड़कता है यारों, दर्द उनके भी गहरे हैं प्यालों। डर-डर कर जीना कैसा इंसाफ? इंसानियत पर उठने लगे हैं सवाल। "झूठी चीखों का अंत करो!" गलत आरोपों का खेल बंद करो, नारी का सम्मान हैं अनमोल सही। पर सत्य और न्याय की भी अलख जलाओ, हर दिल को बराबरी का हक दिलाओ! "समाज जागे, बराबरी लाए!" अब वक्त है न्याय का बिगुल बजाने का, हर आहत मन को अपनाने ...
पिता दामाद से क्या कहता है…
कविता

पिता दामाद से क्या कहता है…

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** पहला व्यक्ति जिसने इस लाडली को गोद में लिया वो मैं था, तुम नहीं , पहला अधिकार मेरा था जब पहली बार मैंने इसके माथे को चूमा तुम्हारा नहीं ! पहली मुस्कान उसकी, पहले आंसू, उसके मैंने देखे, उसे अपनी नन्ही राजकुमारी कहा, वो मैं ही था, तुम नहीं ! दुनिया की सबसे सुन्दर बेटी की निश्छलता, निर्मलता, कोमलता मैंने देखी, प्यार, नाज़, और दुलार से पाला, सम्मान और कर्तव्य सिखाये सबसे पहला पाठ पढ़ाया, वो मैं ही था! उसे साहस-ताकत का अध्याय सिखाया, पूरे दिल से प्यार देकर पाला !! आज मैं तुम्हें वहीं सम्मान देता हूँ , जिस सम्मान के अधिकारी बने तुम इसके कारण! इसी प्यार-सम्मान, से उसे सवांरना, जो आज तक उसे मैंने दिया है, उसकी रक्षा करना ! दर्द क्या होता है वो नहीं जानती, तुम अब वो पुरुष बनोगे, जि...
वसंत कब आएगा
कहानी

वसंत कब आएगा

सुधा गोयल बुलंद शहर (उत्तर प्रदेश) ******************** बहुत दिन क्या बरसों हो गए। कोंपल न फूटनी थी न फूटी। कितने ही बसंत आए और चले गए पर काकी आशा का दामन थामे उस ठूंठे नीम के वृक्ष को देखती रहती, इसी आशा में कि कभी तो कोंपल फूटेंगी, कभी तो बहार आएगी। पत्तियां आंगन में झड़ झड़ कर कूड़े का ढेर बना देंगी। पक्षी गुटर गूं करेंगे। अकेले एकांतवासी काकी का आंगन चहक उठेगा। मन बहलाने को दो-चार साथी मिल जाएंगे। पर कहां होता था काकी का सोचा हुआ पूरा। बसंत आता व चला जाता। सारे पेड़ हरे हो जाते पर काकी का पेड़ काकी की तरह ही तपस्वी सा अविचल खड़ा रहता। सोचते-सोचते काकी की आंखें भर आतीं। वह अपनी पीड़ा में पेड़ को भी शामिल कर लेतीं। जितनी अकेली वे थीं उतना ही अकेला उनका लाड़ला पेड़ था जिसे कभी अपने हाथों से उन्होंने आंगन में रोपा था। इस आंगन में उन्होंने बहुत कुछ रोपा था। बहुत से सपने देखे थे, पर समय...
रणभेरी को सुनना होगा
कविता

रणभेरी को सुनना होगा

विवेक नीमा देवास (मध्य प्रदेश) ******************** लोथ के ये दृश्य वीभत्स मानवता को दहलाते हैं काफ़िर हैं वो हत्यारे जो निर्दोष को मार गिराते हैं। धर्म की बंदिश रखकर ये क्या खेल लहू का खेलेंगे हम अमन पसंद इंसानों का क्या धैर्य खून से तौलेंगे? इतिहास गवाह जयचंदों ने हम पर सदा आघात किया हमने शांति चाही सदा दुष्टों ने नित वज्रपात किया। हम कफ़न बांध लड़ जाएंगे कब तक ही चुप बैठेंगे जब बांध सब्र का टूटेगा घाटी में समर भी खेलेंगे। पुलवामा या पहलगाम कब तक भारत ये झेलेगा ये दंश मौत का दिया तुमने प्रतिशोध हर कतरे का लेगा। भारत भूमि का स्वर्ग कहाँ ये दर्रा निर्दोष रुधिर का है शोणित का बदला शोणित हो मत ये हर सुधीर का है। चंद्र सुभाष सा सौदा फिर हम सबको ही बुनना होगा। अमन की बातें छोड़ अभी रणभेरी को सुनना होगा। परिचय : विवेक नीमा निवासी : देवास (मध्य प्रदेश)...
मिथ्या आवरण
कविता

मिथ्या आवरण

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** ईमान को बेचकर कभी ईमानदार नहीं बना जाता। दर्द देकर कभी किसी का हमदर्द नहीं बना जाता। इंसान को तोड़कर कभी इंसानियत का दावेदार नही बना जाता। बीच राहों में छोड़कर हमसफर को कभी हमराही नहीं बना जाता। कल-कल कर कभी पल-पल का जीवंत जीवन नहीं जिया जाता। देकर औरों को दुख कभी खुद के चेहरे पर खुशियों का झूठा मुखौटा नहीं पहना जाता। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित ...
जन्नत में बहता लहू
कविता

जन्नत में बहता लहू

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** ख़बर आई है- धरती के स्वर्ग में, शबनम की जगह बारूद बरस रहा है। गुलमोहर की टहनियों पर खून टपक रहा है। पहाड़ियों की गोद में सोए अट्ठाईस सपने सिर्फ़ इसलिये तोड़ दिए गए कि उन्होंने काफ़िर होना चुना था। आम आदमी- जिसकी पूरी दुनिया बीबी, बच्चे और रोटी की महक से महफूज़ होती है, उसे नहीं पता- ‘काफ़िर’ कौन होता है? उसे ये भी नहीं पता कि किसी और की जन्नत की लालसा में उसका जीवन नर्क बना दिया जाएगा। वो दरिंदा इंसान- जिसकी आँखों में ७२ हूरों की परछाइयाँ हैं, और शराब की नदी का बुलावा, वो भूल बैठा है- कि जन्नत किसी मासूम की लाश पर नहीं मिलती। किताबें भी कभी रोती होंगी शायद- जब उनके अक्षरों से हत्या के फतवे गढ़े जाते हैं। जब प्रेम की आयतें, नफरत की गोलियों में बदल जाती है...
माँ- एक सुखद अनुभूति
कविता

माँ- एक सुखद अनुभूति

नील मणि मवाना रोड, (मेरठ) ******************** चाँद तारों सा बचपन चाँद तारे हो गया मां जब से दूर हुई बचपन खो गया फ्रॉक से लेकर साड़ी तक खूब सजाया तुमने लाडली के हर आंसू पर स्नेहांचल फैलाया तुमने कुछ बन जाऊं मैं रोज सवेरे जगाया तुमने सफेद कोट बुन डॉ. ख्वाबों में बनाया तुमने कभी मलाई आम तो कभी मालपुए का स्वाद चखाया तुमने हर क्षेत्र में प्रवीण हो लाडली हर दांव चलाया तुमने जब भी उदास मन हुआ शोहदों की शरारतों से 'देखने की चीज हो तुम' कह विश्वास जगाया तुमने अंजाने में दिए मेरे दुख को, कण्ठ भी उतारा तुमने अपनी परी के हर एहसास को गले लगाया तुमने नाज है मां तुम पर.. तुम्हारी स्नेहाशीष सीखों पर आज आश्वस्त हूँ इसीलिए माँ, मैं अपने आप पर। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौल...
कर्तव्य बोध
कविता

कर्तव्य बोध

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जिसने कभी किया ही नहीं जीवन की तमाम परिस्थितियों पर शोध, उनसे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि उनके अंदर होगा कर्तव्य बोध, इसके लिए दिमाग के साथ दिल भी चाहिए, सुस्पष्ट सोच और लक्षित मंजिल भी चाहिए, हमारे देश के कर्णधारों में, कुंठित सिपहलसारों में, यदि कर्तव्य बोध होता, तो देश की उन्नति की राह में कोई भी लोकसेवक कांटें क्यों बोता, इस देश में हुए हैं ऐसे भी लोग महान, जिनका दर्जा होना था भगवान, उन सबके योगदान और स्मृतियों को बहुतों ने मिटाना चाहा, कुढ़ता में आ उन सबको भुलाना चाहा, होता कर्म के प्रति लगाव तो भ्रष्टाचार मुंह बांये न खड़ा होता, धन कुबेर और अपराधी नेताओं के दांये बांये न खड़ा होता, कुछ लोगों के खून में बस चुका है देश के साथ भयंकर गद्दारी, प्रगति की राह में जो पड़ रहा भारी, पता ...
जय-जय हे बजरंगबली
भजन

जय-जय हे बजरंगबली

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सदा सहायक देव प्रबलतम, परमवीर हनुमाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। मातु अंजनालाल शौर्यमय, असुरों को संहारें। रामकाज करने को आतुर, पाप जगत के मारें।। सूर्य निगलकर बने अनूठे, वायुपुत्र देवंता। महावीर सुग्रीव सहायक, करें दुःखों का अंता।। भयसंहारक, मंगलकारी, पूजन बहुत सुहाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। दहन करी लंका हे ! देवा, तुम हो प्रलयंकारी। परम शक्तियाँ तुम में रहतीं, बनकर के साकारी।। हे हनुमंता, हे भगवंता, तेरा रूप निराला। हर दिन है उजला हो जाता, हो कितना भी काला।। जीवन सुमन खिलाते हरदम, जग ने तुमको माना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। रामदूत, अतुलित बलधामा, जीवन देने वाले। सब कुछ तुम गतिमय कर देते, काट व्यथा के जाले।। सीता की कर खोज बन गए, तुम तो एक कहानी। ...
निवेश के पहले सितारे
कविता

निवेश के पहले सितारे

अभिषेक मिश्रा चकिया, बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** हम हैं निवेश के पहले सितारे, सपनों के पंखों पर उड़ने वाले नारे। नई राहों के पहले मुसाफिर, ज्ञान की लौ से रौशन ये सफ़र। हम हैं 'निवेश १.०' की पहचान, सपनों से भरी एक नई उड़ान। सतीश चंद्र कॉलेज की शान बनें, ज्ञान के पथ पर हम अभिमान बनें। प्रिंसिपल डॉ. बैकुंठ नाथ पांडेय सर का साथ मिला, हर सोच को उड़ान देने का जज़्बा मिला। हेड डॉ. ओम प्रकाश सर की सादगी में शक्ति है, हर विद्यार्थी की आँखों में उनकी भक्ति है। डॉ. राहुल माथुर सर की शैली है निराली, हर कांसेप्ट में छिपी एक रोशनी मतवाली। डॉ. ओमप्रकाश पाठक सर का मार्गदर्शन मिला, हर विषय जैसे खुद-ब-खुद समझ आ चला। डॉ. अतीफा फलक मैम की बातों में ज्ञान की रौशनी है, उनकी क्लासों में बसी उम्मीदों का बग़ीचा है। पहला सेमेस्टर, 0% अटेंडेंस का सीन, प्रोजेक्ट का डेडलाइन? ...