तितली बन उड़ जाने दो
मुस्कान कुमारी
गोपालगंज (बिहार)
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मुझे मत मारो इस स्वर्ग सी कोख में
मुझे इस जग में अपना अस्तित्व बनाने दो
मुझे समझो ना तुम एक फूल की कली
बाग से तितली बन उड़ जाने दो।
मैं हूं एक पेड़ इस धूप में
मुझे इस जग में अपना छाया फैलाने दो
मुझे समझो ना एक फूल की कली
बाग से तितली बन उड़ जाने दो।
मैं हूं नही एक बोझ सी घर में
मुझे दो घरों को संभालना है
मैं आपकी पैसे लेने नही पापा
ढेर सारी खुशियां बांटने आई हु
मुझे उन खुशियों को बाटने दो
मुझे समझो ना एक फूल की कली
बाग से तितली बन उड़ जाने दो।
मैं हूं एक छोटी सी परी इस जमाने की
मुझे पापा की रानी बन जाने दो
मुझे समझो ना एक कली की
बाग से तितली बन उड़ जाने दो।
मैं हूं एक छोटी सी चिड़िया इस दुनिया में
जो दो घरों को संभालेगी
मुझे जीने दो
मैं कुछ करना चाहती हूं
मुझे भी कुछ करने दो
मुझे समझो ना एक फूल की क...
























