रक्षाबंधन
श्रीमती शोभारानी तिवारी
इंदौर म.प्र.
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आज हर्षित बेला में, पुलकित है तन मन,
खुशियां लेकर आया है, यह रक्षाबंधन,
सूरज की स्वर्णिम किरणें, सुंदर लग रही,
भाई बहन का प्यार है, त्यौहार है पावन।
स्नेह का धागा जिसमें, छुपा हुआ है प्यार,
वर्ण ,धर्म जाति से ऊपर, उठकर यह त्यौहार,
खुशियां बांधी बहना ने, भाई की कलाई पर
प्यार के धागे में बंधा, है सारा संसार,
सावन की रिमझिम फुहार, संग सुरभित है चमन,
खुशियां लेकर आया है, यह रक्षा बंधन।
रक्षा का धागा बांध, माथे तिलक लगाती है,
आरती उतारती है, मिठाई भी खिलाती है,
लंबी उम्र की प्रार्थना के लिए, दुआ करती है,
कर्त्तव्य का बोध करा, मन में विश्वास जगाती है,
कुलदीपक है घर का, भैया तुम्हें नमन,
खुशियां लेकर आया है, यह रक्षाबंधन।
नेक राह पर चलकर, सबका आदर करना तुम,
माता-पिता क्रोधित हों तो भी चुप रहना तुम,
वृद्धाश्रम की दीवार, गिरा सको तो गिरा द...




















