खामोश
अमरीश कुमार उपाध्याय
रीवा म.प्र.
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उनका चुप रहना अब सहा नहीं जाता
ख़त में खाली जगह छोड़ा नहीं जाता।।
यहां तक आ गए साथ हम
इस कदर अकेला अब चला नहीं जाता।।
सफर है काट लेंगे चलते चलते
मगर तेरे बगैर ये सफर भी चला नहीं जाता।।
लौट गए बातों के डर से
हर ख्वाब इस तरह पूरा किया नहीं जाता।।
ख़त में खाली जगह छोड़ा नहीं जाता।।
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परिचय :- अमरीश कुमार उपाध्याय
निवासी - रीवा म.प्र.
पिता - श्री सुरेन्द्र प्रसाद उपाध्याय
माता - श्रीमती चंद्रशीला उपाध्याय
शिक्षा - एम. ए. हिंदी साहित्य, डी. सी. ए. कम्प्यूटर, पी.एच. डी. अध्ययनरत
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