रंगत से अधिक संगत को संभालिए
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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रंगत तो पल में बदल जाए,
संगत जीवन गढ़ जाती है,
अच्छे लोगों की छाया में,
किस्मत भी मुस्काती है।
रंगत चेहरे की धूप-छाँव,
समय के संग ढल जाती है,
संगत सच्ची मिल जाए तो,
राह नई बन जाती हैl
रंगत बाहरी चमक-दमक,
मन को कहाँ सजाती है,
संगत सच्ची हो अगर,
आत्मा भी महक जाती है।
रंगत झूठी दिखावा है,
जो क्षण भर में मिट जाती है,
संगत सच्ची दीपक बन,
हर अंधेरा हर जाती है।
रंगत से मत धोखा खाना,
यह तो आँख भरमाती है,
संगत की पहचान करो,
यही राह दिखलाती है।
रंगत से रिश्ते ना जोड़ो,
ये अक्सर टूट जाते हैं,
संगत सच्ची निभ जाए तो,
जीवन फूल खिलाते हैं।
रंगत चाहे जैसी हो,
दिल को क्या समझाती है,
संगत अच्छी हो तो जीवन,
खुशियों से भर जाती है।
रंगत के पीछे भागे जो,
अक्सर पछताते हैं,
संगत सही चुनने वाले,
मंजिल तक जात...
















