सत्य की पुकार
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
मेरे भीतर का संत
मुझसे कुछ कहता है।
कहता है उठो देखो
नया सूरज निकला है।
शास्त्र का प्रकाश
फैला है, शास्त्र पढ़ो।
शास्त्रों को गुनों,
सुनो और समझो।
शास्त्र जीवन का निर्माण
करते हैं, सँवारते हैं।
वे उजाले का सबको
नित दान करते हैं।
सत्य लेकर संघर्ष करो,
तो मंज़िल पाओगे।
नित सुख-आनंद के
नग़मे, नित गाओगे।।
सूरज की नियत गति
भी तो यही सिखाती है।
जगहित का भाव
सतत् फैलाती है।।
शास्त्र लेकर हरदम
बढ़ना ही होगा।
बाधाएँ राहों में उनसे
लड़ना ही होगा।।
काँटे ही तो फूलों का
मोल बताते हैं।
जो योद्धा हैं तूफ़ाँ से
नित भिड़ जाते हैं।।
चलना है तो चलो भले
कदम थक जाते हैं।
मंगलगान सुनाओ
क्यों पग रुक जाते हैं।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इत...














