महान देश
डॉ. अर्जुन गुप्ता 'गुंजन'
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
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हरी भरी वसुंधरा सदा हरा मचान है।
सुनील आसमान है नया-नया वितान है॥
नगाधिराज है यहाँ बड़ा अभेद्य वेश में।
पयोधि पांव धो रहा सदा महान देश में॥
पठार भूमि है कहीं कहीं कछार है धरा।
उपत्यका यहाँ कहीं कहीं धरा हरा भरा॥
घने कहीं कहीं अगम्य वन्य हैं बड़े यहाँ।
सदा हरा वितान और वन्य कंटिला जहाँ॥
विरान थार है यहाँ कहीं कहीं पहाड़ है।
विभिन्न जीव हैं जहाँ कहीं कहीं दहाड़ है॥
कहीं सुरम्य घाटियाँ कहीं कहीं अगम्यता।
यही महान देश है भरी सदा सुरम्यता॥
नयी बयार है अभी नयी नयी उमंग है।
नवीनता लिये हुये अभी नयी तरंग है॥
नयी सवेर है उठो सदा बढे चलो अभी।
नवीन पंथ पे सदा चलो बढो अभी सभी॥
स्वदेश के सिपाहियों अदम्य हो सदा सभी।
प्रवीर शूर साहसी बढ़े चलो सभी अभी॥
महान देशभक्तिपूर्ण भावना सदा रहे।
सदा स्वदेश के लिये ...

















