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कविता

आँच अहसास की
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आँच अहसास की

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** सुलग रहे मोरे अंग अंग सजना तड़पूं अकेली मनवा चैन न पाये बसंत बयार बहे, मौसम रंगीला तरसे जिया, काहे न पिया आये कूके कोयली, बोले पपीहा विरह-अगन मोरा जिया जराये विरह-अगन से जियरा धधके ननदिया जब शृंगार सजाये फूलवा महके, पाखी चहके देवरानी, जेठानी छेडछाड़ जाये मन ही मन मैं तरसूं घनी जो लहक लहक भाभी रंग उड़ाये देवर होले होले करे इशारे कैसे बचूँ, मोहे समझ न आये आय पिया मोहे उर से लगाओ रातें सर्दी की खाली न जाये चैन मिले जो दीदार करूँ मैं लंबी रतिया मोहे खूब सताये टेर उठे जो माधव मुरलिया की चीर, चीर जाये करजेवा मोरा झंकार उठे पग की पायलिया नयन तन्हा, छलक-छलक जाये सातों सुर हँस सजाये पवनिया इंद्रधनुष रंग नभ में सरसाये इंतज़ार में गौरी पूछे दरवजे से मनवा सरसे,कब पिया आये आँच अहसास ...
आओ मनाएं मकर सक्रांति
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आओ मनाएं मकर सक्रांति

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** पौष जाए माघ आए शीत की छटा बह आये मकर सक्रांति पर खुशियाँ घर घर आये।। घरपरिवार में तिल गुड़ चिड़वा मुड़ी लाये मकरसक्रांति पर्व की खुशियाँ तनमनमे छाए।। मकर सक्रांति पर्व है ऐसा दान धर्म स्नान भाये वस्त्र अन्न बर्तन कम्बल का दानपुण्य बढ़ जाए।। तीर्थों में आनाजाना, मकर सक्रंति पर्व बताये भारतवर्ष के हर कोने में, मकरसक्रांति मनाए।। नदियां कुंड तालाब पोखरे में ठंडे जल से नहाए मकर सक्रांति पर्व की परंपरा की रीत निभाए।। दही चिड़वा घेवर खानपान में आनंद खूब लाये एक संग में शीत की लहर में अलाव को जलाए।। आसमान की रौनक चारो तरफ यह पर्व महकाये रंग बिरंगी लाखों पतंगों को उड़ाने की मस्ती लाये।। मकर सक्रांति माघ महीने का है दान धर्म का पर्व परंपरा को परम्परागत निभाये, सन्देश सब फैलाये।। आओ हम सभी प्रेमपूर्वक मकर सक...
श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है
कविता

श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** सबने उत्तम अवसर पाया। विगत अनेकों वर्षों से, राधे भैया ने झूम मनाया। श्रेष्ठ भक्त... राधे भैया ने निवास को, सत्संग से है तीर्थ बनाया। प्रेरक बनकर हम अनुजो के, सबको भक्ति मार्ग दिखाया। श्रेष्ठ भक्त ... उनका वरद हस्त है सिर पर, ये आशीष सदा फलता है। वे जो मार्ग बताते हमको, उसपर परमेश्वर से मिलाया। श्रेष्ठ भक्त... हनुमत से प्रार्थना यही है, उनको पूर्ण स्वस्थ वो करदे। सत्संग बिन व्याकुल आत्मा को, दे सत्संग तृप्त वो करदे। हनुमत सदा दास की सुनकर, तुमने उसका मान बढ़ाया। श्रेष्ठ भक्त का... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है...
नव वर्ष हमारा तब होगा
कविता

नव वर्ष हमारा तब होगा

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** नव वर्ष हमारा तब होगा, खुशियों का आलम जब होगा। कलियाँ कलियाँ मुस्काएगी, कोयल भी गीत सुनाएगी। नव पुष्प खिलेंगे बागों में, वह शोभा मन को भाएगी।। मौसम अपना भी गजब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, ब्रह्मा ने सृष्टि का सृजन किया, विक्रमादित्य को राज्य मिला। विक्रमादित्य के नाम पर हीं, विक्रमी संवत् शुभ नाम मिला।। प्रकृति का रूप अजब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, प्रभु राम का राज्याभिषेक हुआ, जन जन का रक्षक नेक हुआ। चैत्र नवमी का पहला दिन, नव दुर्गा का भी प्रवेश हुआ।। वह घड़ी जानिए जब होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, वन उपवन एक सदृश लगे, जब स्वयं मनोरम दृश्य लगे। हो स्नेह की बादल की वर्षा, कोई ना जब अनभिज्ञ लगे।। वह समय भी बहुत सुलभ होगा, नव वर्ष हमारा तब होगा, गुलाम किया जिसने हमको, उसका हम पर्व मनाए क्यों...
छेर-छेरा मांगे बर जाबोन
आंचलिक बोली, कविता

छेर-छेरा मांगे बर जाबोन

खुमान सिंह भाट रमतरा, बालोद, (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी - गीत) छेर-छेरा मांगे बर जाबोन छेरीक छेरा छेर बारकननीन लोकगीत गीत ल संग म गुन-गुनाबोन रे भाई... डफरा गुदुम संग मोहरी बजाके ताल से ताल मिलाबोन रे भाई... अऊ चल न संगी चलना साथी सुघ्घर संस्कृति परब के मान बढाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन... सोनहा धान म कोठी डोली सबो भरागे नवा बछर म पहिली तिहार हर आगे सुपा म धान भरके डोकरी दाई आंगना म आगोरत हावे पसर-पसर भर धान पाबोन रे भाई... सुघ्घर संस्कृति परब ल मनाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन.. पुस-पुन्नी अंजोरी पाख हर आगे मड़ई मेला धुमे बर टेटकू बैसाखू आगवागे मोर छत्तीसगढ़ महतारी के हवय छत्तीस चिन्हारी, सबला धीरे-धीरे बतलाबो रे भाई ... सुघ्घर संस्कृति परब ल मनाबो छेर-छेरा मांगे बर जाबोन... परिचय :- खुमान सिंह भाट पिता : श्री पुनित राम भाट निवासी :...
अंतर्मन से परिचय
कविता

अंतर्मन से परिचय

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* मैंने स्वयं को शब्दों की भीड़ में नही मौन की गहराइयों में पहचाना है जहाँ हर प्रश्न उत्तर नहीं माँगता और हर उत्तर सच नहीं होता। समय ने मुझे तोड़ा नही बस परत-दर-परत खोल दिया- जो दिखा वो मेरा नहीं था और जो मेरा था उसे देखने की दृष्टि सबके पास नहीं होती। रिश्तों की भाषा अब सरल नहीं रही यहाँ सम्मान भी शर्तों पर मिलता है। जो समझ सका वही ठहरा बाक़ी सबने भीड़ को अपनाया और मुझे फालतू कह दिया। मैंने शिकायतों को शब्द नहीं बनाया क्योंकि मौन में भी मेरी अस्मिता बोलती है अब न सफ़ाई देने की आदत है न हर चोट का हिसाब रखने का धैर्य। जो चला गया वो ग़लत नहीं था बस मेरी गहराई के योग्य नहीं था और जो ठहर गया वो कोई वादा नही एक अनुभूति है। अब मैं स्वयं से भागता नही ना ही किसी को ...
कहाँ गई तुम दीदी
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कहाँ गई तुम दीदी

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** घर के नींव की ईंट थी दीदी तुम सहसा पतझड़ी हवा ने बिखेर दिए हर ईट इस घर की, विरान कर गई वो आंगन जिसमें तुम्हारी मुस्कुराहटें खिलखिलाती थी!! हम एक वृक्ष से उत्पन्न पत्ते, नहीं जानते थे, कहाँ जाते है शाख से टूटकर धरा पर सूखे पत्ते सा कर गई जीवन हम सबका, नहीं समझ पाये तुम्हारा यूँ चले जाना आजतक !! जिंदगी के हर उतार-चढाव की साथी थी तुम, आज भी आंखों की नमी हो तुम, मेरी हंसी में कौन हॅसेगा साथ मेरे, दुःख में कैसे मुस्कराते हैं, सिखाती थीं तुम !! तुम्हारा चले जाना पिताजी सह ना सके , टूट कर बिखरे हम अब तक जुड़ ना सके थोड़ा तो ठहर जाती साथ हमारे माँ को कैसे ऐसे छोड़ गई तुम ?? आज भी हर एक के हृदय में बसी हो तुम, मुझे पता है मेरे आसपास ही हो तुम, बार बार दिल कहता है कहीं से लौट ...
अलविदा २०२५
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अलविदा २०२५

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अलविदा कहे नफरत को, अलविदा कहे द्वेष को, अलविदा कहे आलस को, अलविदा कहे कटुता को, अलविदा कहे दुश्मनी को, अलविदा कहे राग को, अलविदा कहे कुविचारो को, अलविदा कहे मन के मेल को, अलविदा कहे अन्याय को, अलविदा कहे आतंक को, अलविदा कहे गरीबी को, अलविदा कहे विकारो को, अलविदा कहे दुष्टता को, अलविदा कहे अत्याचार को और अलविदा कहे 2025 को, अलविदा कहे शिकवा गिला को, सुबह उगते सुरज की किरणो के साथ नया सवेरा लायेगे 2026 की नयी कविता के साथ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मान...
हां रामसकाल आ गया है
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हां रामसकाल आ गया है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जयंती समारोह के एक कार्यक्रम में कड़वे आसवित जल के सुरूर लेकर वो आ गया, सीधे आयोजकों से टकरा गया, बोला बैनर जो टंगा है उसमें मेरा क्यों चित्र नहीं है, कार्यकर्ताओं में मेरा कोई मित्र नहीं है, इसीलिए इस बैनर को यहां से हटाओ, मेरे फोटो वाला बैनर लगाओ, एक युवा कार्यकर्ता तमतमा गया, भयंकर गुस्से में आ गया, समता समानता के इस कार्यक्रम में कोई किसी पर दबाव नहीं बनाएगा, कोई अपनी राजनीति नहीं चमकाएगा, दूर दूर से भी और कुछ पास से अतिथि आये, कार्यक्रम के उद्देश्य और अपने विचार बताये, मगर रामसकाल कभी नजदीक बैठता तो कभी दूर, पूरे कार्यक्रम के दौरान कम नहीं हुआ उनका सुरूर, कभी कहता कि इन सब का खर्चा मैंने उठाया है, मेरे कारण आयोजन सफल हो पाया है, उस दिन एक मछली तालाब कैसे गंदा करता है, सकार...
जीवन एक संगीत है
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जीवन एक संगीत है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जीवन एक संगीत है और यही मेरा मीत है और यह मेरी जिंदगी का गीत है। ******* जिस प्रकार संगीत के स्वर है सात। हमारी जिंदगी में सच होती है ये बात। ******** संगीत से हमें खुशी मिलती है जिंदगी की उदासी दूर रहती है। ******** हमारी सांसों में हमारी बातों में संगीत है। मधुर है ये जिंदगी का गीत है ******** संगीत हमारी जिंदगी में आनंद भर देता है। ग़म से खुशी की ओर ले चलता है। ******** जो संगीत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाता है। वो अपनी जीवन को खुशियों का द्वार बनाता है। ********* संगीत के स्वरों को अपनी जिंदगी में घोलिए। और अपने आप को आनंद की तराजू में तौलिए ******* अगर आपको जाना है ग़म की दुनियां से दूर तो अपनाईये संगीत को जरूर। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
मृग नयना तेरे
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मृग नयना तेरे

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** न रात हुई आज पहली बार ना तारे ही निकले पहली बार मगर... अहसास किया दिल नें ये तारे महज तारे कहाँ झाँक रहे हैं हर तारे से चंचल मृग नयना तेरे..... ना पाखी उड़े नभ पहली बार ना फूलों पे भँवरे डोले पहली बार मगर... तेरे मदहोश इशारों ने जगाये अल्लहड़ अरमान कमसिन कजरारे ये बंकिम मृग नयना तेरे...... ना आज बसंत आया पहली बार ना कोयलिया कूकी पहली बार मगर..... सरगम सी उठी झंकृत हुई पायलिया बजाये सुरीले सुर सुलोचन मृग नयना तेरे..... ना घिरी घटायें आज पहली बार ना ही चली पवनवा पहली बार मगर.... चून्नर के लहराने संग लहराये मधुर मीठे सपने भीगे भीगे से यौवन सिंधु में मृदमयी मृग नयना तेरे..... ना झरने झरे आज पहली बार ना भीगी लंबी लटें पहली बार मगर.... भीगी स्याह जुल्फों से शबनम के कणों सी ल...
एक साल की बैलेंस शीट
कविता

एक साल की बैलेंस शीट

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। द्वेष कलंकित दंश योजना धर्म पूछकर कत्ल करे। खुला खेल फर्रुखाबादी धर्म विरोधी जहर भरे। अनुभव सिंदूर बतला गया, बदला लेना झांकी है। ताकत देश की पहचान लो, असला मसला बाकी है। ड्रोन रॉकेट पिनाकी देख, शत्रु सांस अटकी देखो। राफेल व्याख्या सफल यात्रा, देखदेख कर भी भटको। एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। नेता मंत्री संत जनों से, बिगड़ी बोली स्वाद चखा। मांगी किसी ने कभी माफी, बोला कोई बोल यथा। ...
नया साल
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नया साल

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** नए साल की शुरुआत हे! माँ काली तेरे विश्वास पर करता हूँ। मानता हूँ कि मैं खास नहीं मगर तेरे ऐतबार पर नए साल पर एक नई शुरुआत करता हूँ। छोड़ चुके हैं जो लोग उनको भूलाने की एक कोशिश करता हूँ, और जो आ रहे हैं जीवन में बनकर तेरा साया उनको अपनाने की कोशिश करता हूँ। ढूंढता रहा हर साल हर इंसान में खुशियां अपनी अब शून्य में लीन होकर गुरुदेव शिव पर ऐतबार करता हूँ। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प...
चादर
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चादर

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** हम अपनी चादर में पैर समेटे सदियों तक बैठें रहे धूल का गुबार उनका उड़ा जो पांव पसारते चले गये हमने न की कभी शिकायत वो चादर हमारी उघाड़ते चले गये इतनी बड़ी थी चादर हमारी वो काटते चले गये हम अपना रक्त मानते रहे हम खुशी से और देते रहे हम सहिष्णुता से रहते रहे कुछ फिर भी असहिष्णु होकर हमें नकारते रहे बची खुची चादर भी खींचते रहे हम एक-एक टुकड़ा भी दान कर दें? चादर तो छोड़ें, स्वयं को दान कर दें? परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर वर्तमान निवासी : मिनियापोलिस, (अमेरिका) शिक्षा : एम.ए. अंग्रेजी, एम.ए. भाषाविज्ञान, पी.एच.डी. भाषाविज्ञान सर्टिफिकेट कोर्स : फ़्रेंच व गुजराती। सम्प्रति : आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच अमेरिका शाखा की अध्यक्षा है। पुनः मैं अपने देश को बहुत प्यार ...
नववर्ष की दस्तक
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नववर्ष की दस्तक

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** पुराना साल विदा ले गया अनकही सीखें दे गया कुछ आँसू कुछ मुस्कान जीवन का नया विधान। नववर्ष आया द्वार खड़ा आँखों में सपनों की धूप कहता है- चलो फिर से लिखें अपने कल का सुंदर रूप। बीते कल की भूलों से अब लेना है बस ज्ञान कड़वाहट को छोड़ चलें मन में भर लें विश्वास। हर दिन हो थोड़ा बेहतर हर रिश्ता कुछ और गहरा मेहनत सच्चाई करुणा से सजाएँ भविष्य का सवेरा। नववर्ष नहीं केवल तारीख यह तो उत्सव संकल्पों का रोज थोड़ा अच्छा करना- बस यही संदेश नववर्ष का। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक ...
बिदाई की वेला आई
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बिदाई की वेला आई

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** हम सब विचार करें केलेंडर वर्ष २०२५ बिदाई की वेला आई। उम्र की डोर से रोज एक मोती झड़ रहा है.... तारीख़ों के जीने से यह हमारी नियति है। २०२५ में कई सुखद यादें जुड़ी। नये साल के साथ अब सुखद यादें जुड़ी रहें। उम्र का पंछी नित दूर, और दूर निकल रहा है.. नया साल में अब वक्त का इंतजार है - गुनगुनी धूप और ठिठुरती रातें जाड़ों की... गुज़रे लम्हों पर.. झीना-झीना सा इक पर्दा गिर रहा है.. अब ज़िन्दगी का नया दौर गुज़र रहा है... इंतजार है नये वर्ष में नये स्वप्ननों का नये अनुभवों का। आप सभी को आने वाले केलेंडर नये "वर्ष 2026 का" हर दिन शुभ मंगलमय हो। आप सभी का अभिनंदन है, वंदन है नये वर्ष में। ईश्वर से प्रार्थना आपके सभी मनोरथ पूर्ण हो, आप सभी सपरिवार स्वस्थ एवं खुश रहें... इन्हीं शुभकामनाएं सहित ... परिचय :- स...
नव वर्ष का अभिनंदन
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नव वर्ष का अभिनंदन

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** हुआ सबेरा निकला सूरज मानव अब क्यों सोते हो। नया वर्ष हो नूतन सबका यही कामना सब की हो। हुआ सबेरा…. भेदभाव के बन्धन तोड़ो ऊँचे नीचे की राहें मोड़ो। सिर्फ़ अपने की बातें छोड़ो समानता से पंथ को जोड़ो। यही कामना… नव युवकों तुम युग चेतन हो अराजकता के तुम भेदक हो। अहिंसा अस्त्र उठाकर देखो तुम भारत माँ के सपूत हो। नया वर्ष ….. दानी दानों के तुम पुष्प चढ़ाओ उद्योगों व किसानों की वेदी पर। बेकारी भागेगी कोसो दूर तक सँवरेगा जब श्रमजीवियों का तप। यही कामना…. ओ भारत माता के रक्षक प्रहरी कमल की तुम तक पहुँचे पुकार। नूतन वर्ष की शुभकामनाओं का परिवार सहित तुम्हें पहुँचे उपहार। यही कामना…. पत्र,पत्रिका,टीवी की उपयोगिता शिक्षित करना कर्तव्य और ज्ञान। बीती बातों पर बहस कराना व्यर्थ देश की महिमाओं का बखान हो। य...
धारण तो कीजिए
कविता

धारण तो कीजिए

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** नेक नीति नियति का हरेक युग में उपहास हुआ है, मगर धर्म अनुगामी आदर्श कर्म का क्या कीजिए। तोड़ा फोड़ा कलंक आचरण खूब विपर्यास हुआ है, हिरणकश्यप रावण कंस को पनपने क्यों दीजिए। आदर्श न्याय कर्म पालक से द्वेष एहसास हुआ है, आंख मिलान कन्नी काटने चंद्रहास मजा लीजिए। बरसों बाद श्रीराम लला का भव्य पुनर्वास हुआ है, बकवास निहित अट्टहास को वनवास करा दीजिए। पड़ोस पथ से राष्ट्र तलक नेकी का परिहास हुआ है, अब राष्ट्र विरोधी वक्तव्य का अनुप्रास भुला दीजिए। नेकी बदनियत दोनों का जगत में इतिहास हुआ है, बर्बाद मंजर देखने फिर वही केनवास टांग लीजिए। चाल चरित्र चक्र संवारने मौकों पर विश्वास हुआ है, कुटुंब संस्था समाज हित में ’मुन्ना’ अरदास कीजिए। न्यूज पेपर टीवी बदहवास आलम आसपास हुआ है, विकसित दिशा दशा सम्मान भी धारण तो कीजि...
सत का मान बढ़ाया
कविता

सत का मान बढ़ाया

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** सतनाम के ध्वज से सत का मान बढ़ाया जीवन को कैसे जीना है हमको सिखाया स्वयं शूल पर चल सत्य का राह अपनाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया जीव- जीव सब एक, एक ही सबके प्राण जीव में नहीं कोई भेद है, समझ ले इंसान जगत में एकता का जिसने भाव जगाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया चलो बने हम सब भी सत्य के अनुयायी जिसकी महिमा रहती है सदा आनंददायी सारे जग पर सत्यनाम को सहज फैलाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया जगत के मानव-मानव सबकी एक जात उड़े प्राण पखेरू तब, मिलेंगे एकहि घाट जात-पात का झूठे प्रपंच को भी मिटाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया संयमित हो जीवन, सत के साथ चलना छल कपट से दूर रहकर,आगे निकलना जीव की सदगति का नित उपाय बताया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया परिचय :- प्रमेशदीप मा...
यादें
कविता

यादें

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** साल जा रहा देकर हमको न, याद में ठहरे लोग। भोले-भाले, साथ निभाते, भले-बुरे सब लोग।। स्मृतियाँ कुछ मीठी होतीं, तो कुछ कड़वी होतीं, समय बीतता, पर यादें में, अज़ब-निराले लोग। अरमानों में रंग भरे हैं, तो कुछ अति फीके, हाथ मिलाते, नेह निभाते, प्रीति जताते लोग। कर्म-भाग्य ने मिलकर के ही, परिणामों को सौंपा, मित्र बन गये अनजाने में, आगे बढ़कर लोग। भूल सकूँगा नहीं किसी को, जिन्हें विगत ने पाया, सदा ही ठहरे रहेंगे यूँ ही, सदा सुहाते लोग। जीवन की गाड़ी चलती है, मिलते लोग-बिछुड़ते, यादों में सब रहें सुरक्षित, प्रेम बहाते लोग। लौट नहीं आता है बीता, बीती बातें शेष, दूर हो गये,या बिछुड़े वे, याद समाते लोग। जीवन की रफ़्तार तेज है, भाग रहा है रोज़, अच्छी स्मृतियाँ का है वंदन, जिनमें ठहरे लोग।। परिचय :- प्रो. ...
अर्द्धनारीश्वर
कविता

अर्द्धनारीश्वर

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** रूप लिया अर्द्धनारीश्वर का, शिव-शक्ति कहलाते, शिव प्रारम्भ शक्ति है ब्रह्मांड तभी तो अर्द्धनारीश्वर कहलाते!! आधा भाग नर का, आधा बना नारी का, शिव बिन शक्ति अधूरी- शक्ति बिन शिव अधूरे हो जाते!! प्रश्न एक कौंधा मन मे बार बार, पुरुष का रूप लेकर जो करते नारी सा शृंगार, कौन हैं ये लोग, क्यों दर दर पाते तिरस्कार!! घर घर आशीर्वाद पहुंचाते, बधाई के गीत गाते, फिर भी समाज से बहिष्कृत हो स्नेह को तरसते! आसान नहीं इनका जीवन, हर मोड़ पर चुनौतियां आती, तिल तिल दम तोड़ते, शिव शक्ति का सृजन ये, किन्नर कहलाते! अर्द्धनारीश्वर जब घर-घर पूजे जाते ईश्वर की ही रचना हैं ये, फिर क्यों अधूरे कहलाते?? प्रश्न बड़ा है समाज के ठेकेदारों से मेरा, क्यों नहीं इनको हम अपनों जैसा अपनाते??? प...
जीवन एक प्रश्न
कविता

जीवन एक प्रश्न

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* एक प्रश्न जो हर मोड़ पर नया हो जाता है कभी धूप में तप कर मजबूत कभी ओस बनकर पल में खो जाता है। हम चलते हैं मंज़िल की तलाश में पर रास्ते ही हमें पहचान देते हैं कभी हार में छिपा सबक कभी जीत में नम्रता सिखा देते हैं। सत्य यह है कि जीवन किसी ठहरे पानी जैसा नहीं यह बहती नदी है जो पत्थरों से टकराकर और भी निर्मल और भी प्रखर हो जाती है। हम जिस क्षण को पकड़ना चाहते हैं वह हवा बनकर फिसल जाता है और जो क्षण हमें तोड़ देता है वही हमें नया आकार दे जाता है। अंत में समझ आता है जीवन को समझना नहीं जीवन को जीना पड़ता है हर अनुभूति को स्वीकार कर खुद को धीरे-धीरे प्रकाश की ओर ले जाना पड़ता है। परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० फरवरी निवासी...
सरिता
कविता

सरिता

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** सरिता शीतल बह रही, देती जीवन दान। नीर सुधा का सार है, दिव्य लोक पहचान।। शैल-खंड कितने ढहे, सम्मुख सरिता धार। कल-कल नदिया नाद का, करे नमन संसार।। नदी तीर्थ है जान लो, पूजन करो सुजान। प्यास बुझाती लोक की, सद्भावों की खान।। सींचे सब तृणमूल को, अनुपम सुंदर घाट। संचित रखते जल सदा, अद्भुत देखो पाट।। सुंदर है मनमोहिनी, अंतर सागर वास। धार-धार संचार में, सदा मिलन की आस।। युग-युग से है बह रही, संस्कृति की पहचान। गंगा जमुना का मिलन ,मोक्षदायिनी जान।। सारी बाधा तोड़ती, बहती निर्मल गात। जननी सी वत्सल रहे, करे प्रेम बरसात।। जीवन आलोकित करे, सरिता सूर्य समान। इसकी पावन धार में, बसे अलौकिक ज्ञान।। बाधा बंधन सह रही, नहीं मानती हार। इसका पूजन कीजिए, जग में बारंबार।। इसे प्रदूषित मत करो, करती यह...
अपनापन
कविता

अपनापन

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** ना दिल मै खुशी ना मन मै उमंग, अपनो का गम बस अपनो का गम, दिखावा बस दुनिया का, फोटो का और बस संकीर्ण विचारो का। परिवार एक दिखावा नही, दिल के एक तार का, हँसी के पात्र का नही, ससम्मान का। पात्र सोने चाँदी का बनो नही काँच के गिलास सा, कोई भी आये ठुकरा जाये धराशाही पल मे नाश सा। राज बनो ताज बनो, शान और अभिमान बनो, एकता की एक मिसाल बनो, कोई दुशमन घात ना डाले, ढाल बनो तलवार बनो, हर पग का तुम साथ बनो, प्यार करो सम्मान करो, और दिलो पर राज करो परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ...
हां तुम
कविता

हां तुम

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** हां तुम ! मैंने चाहा है तुमको मेरी चाहतों में तुम I गुजरे कल में तुम उगते सूरज में तुम I बहती हवाओं में तुम बरसते बादलों में तुमI खिलते फूलों में तुम ढलती शामों में तुम I हां तुम ! मन की सुंदरता तन का सुंदर रूप I लब तेरे मधुशाला हर अंग पुष्प की माला स्वप्न की परी तुम हो यौवन रस का अमृत प्याला I तुम जीवन ज्योति तुम करुणा तुम भक्ति तुम ही मेरा बंधन I मेरा इश्क तुम मेरी जान तुम मेरा हर लम्हा तुमसे तुम ही मेरा दर्पण I बेचैन दिल तन्हा मन तस्वीर तेरी चूमते नयन I मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I मेरा ख्वाब मेरी हकीकत मेरी चाहत मेरा जूनू हां तुम ! परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा निवासी : रोहिणी, (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह ...