ऐसा क्यों…?
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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इतिहास में तुम ही तुम,
हर अच्छी बात में तुम ही तुम,
हर जगह बजती तेरी धुन,
कल्पित गाथाओं में भी तुम,
सबके माथाओं में भी तुम,
शक्तिशाली भी तुम ही तुम,
और बलशाली भी हो तुम,
क्या तब और अब तुम ही तुम हो
हमें पटल से क्यों कर दिए गुम,
हुआ बहुत हमरा भी नाव,
लो पढ़ लो भीमा कोरेगांव,
पच्चीस हजार कैसे आ गए थे
लोटने को पांच सौ के पांव,
लिख डाले हो कर कर कुकर्म,
देव खुद को कह रहा तेरा ग्रंथ,
क्यों भूले हो पाखंड काटने
आते रहे हमारे संत,
सीरियलों और फिल्मों में भी
सदपात्र बनाते रहे हो खुद को,
खल चरित्र में दिखा दिखा
झुठलाते रहे हमारे वजूद को,
कब तक रहोगे पर्दे के पीछे
दिखा बता कर लाखों झूठ,
तब भी अब भी पल्लवित ही हैं
समझते मत रहना हमको ठूंठ,
शसक्त हो रहे हम भी अब
ये कभी मत जाना भूल,
सम की राह में नहीं चलोग...

























