सृजन
डाॅ. रेश्मा पाटील
निपाणी, बेलगम (कर्नाटक)
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शितल-शितल चंदा की किरण है।
महकी-महकी आज पशन है।
तरल तरंग मन में उमडे है
उमड-उमड मन गीत है गाता।
सुख है, दु:ख है समझ ना पाये
मन भी बडा चपल चंचल है।
डाल-डाल पर भँवरा मंडराये
कली-कली को फूल बनाये।
दूर कही बांसुरी बजाए
राधा-राधा किशन बुलाए।
मनवा महके, तनवा दहके
सृष्टी का कैसा सृजन है।
परिचय :- डाॅ. रेश्मा पाटील
निवासी : निपाणी, जिला- बेलगम (कर्नाटक)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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