जगदंबा स्तुति
डॉ. राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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सदा प्रसन्ना मां जगदंबा
मम ह्रदय तुम वास करो।
लेकर खड़ग त्रिशूल हाथ में
मम शत्रुदल संहार करो।
चड-मुंड के मुंड धारण कर्ता
मम संकट का भी हरण करो।
तंत्र विद्या की प्रारंभा देवी
शत्रु तंत्र, मंत्र, यंत्र का शमन करो।
चौसठ योगिनी संगी कर्ता
मम योग विद्या उत्थान करो।
रक्तबीज का रक्त पान कर्ता
मम शत्रुदल रुधिर पान करो।
भैरव के संग नृत्य कर्ता
मम शत्रुदल अटहा्स कर ध्वंस करो।
जय जय जय मां जगदंबा काली
मम ह्रदय तुम सदैव वास करो।
परिचय :- डॉ. राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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