गणेश स्तुति
अर्चना तिवारी "अभिलाषा"
रामबाग, (कानपुर)
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भाद्रचतुर्थी तिथि अति पावन ।
शंभु उमा के पुत्र गजानन ।।
शुभम दिवस जन्में श्री कंता ।
संकट नाशक प्रभु भगवंता ।।
प्रथम पूज्य हे गिरिजानंदन।
प्रतिपल करूँ तुम्हारा वंदन ।।
मातु-पिता के तुम हो प्यारे।
गौरी नन्दन शंभु दुलारे ।।
बुद्धि प्रदाता हे गणनायक।
संतति सुख के तुम हो दायक ।।
सकल मनोरथ पूरण करते ।
भक्तों के प्रभु दुख हैं हरते ।।
हे लंबोदर भवभय हारी ।
शूर्पकर्ण पीताम्बरधारी ।।
लड्डू मोदक अति मन भावे ।
नरियल का नित भोग लगावे ।।
दूब-शमी प्रभु को है प्यारी ।
धूप-दीप प्रभु पे बलिहारी ।।
सच्चे मन जो करते सेवा ।
पूर्ण मनोरथ करते देवा ।।
तुम्हरी महिमा जग से न्यारी ।
मूषक की तुम करो सवारी ।
जिन पर होती कृपा तुम्हारी ।
धन्य-धन्य होते नर-नारी ।।
हे गजवंदन हे गणनायक ।
भक्तों के प्रभु तुम हो तारक ।।
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