मेरे महाकाल
राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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मैं न जानू काल को,
मैं जानू बस महाकाल।
रिद्धि-सिद्धि
मुझे न भाए
प्रेम, स्नेह और भक्ति
मुझे में वो सदा जगाये।
हंसते खेलते
मुझे अपने गले लगाएं।
जान शिशु अपना
मुझे रिझाए।
अलख निरंजन बन
मुझे नाद सुनाएं।
चार वेदों का भी
मुझे ज्ञान करवाएं।
योग विद्या मुझे सिखाएं,
महाविद्याओं का भी
अभ्यास करवाएं।
पूर्ण परब्रह्म
मुझको ज्ञान करावे,
तभी जग में महाकाल
जगतगुरु कहलवाये।
परिचय :- राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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