होली आई
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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फागुन आया होली आई
ढोल बजाओ मांदल रे
आंगन-आंगन बजी बधाई
डेहरी पहने पायल अरे
फागुन आया होली आई,
ढोल बजाओ मांदल रे।
यौवन सजे सजे हरद्वारे
पायल नूपुर बाजे रे
गेम बाली लेकर आती
खंन-खन करती चूड़ियां थे
हां बुलाया होली आई
ढोल बजाओ मांदल रे।
रंग गुलाल संग मचल रही
हरि पीली आंचल चांदनी
ताल-ताल पर नाच रही
मेरे मन की रागिनी
रवि किरण भी खेल रही है
सतरंगी केसरिया रंग अरे।
फागुन आया होली आई
ढोल बजाओ मांदल रे।
केसु, टेसु रंग केशरिया
पाखी, पंछी झुमे थे
घर आंगन में सजी सावरी
धानी चुनरिया ओढ़ रे
पीली-पीली सरसों पर
मन मतवाला डोले रे
फागुन आया होली आई
ढोल बजाओ मांदल रे।
सुबह संध्या अवनी अंबर
अबीर केसरिया खेले रे
आज नहीं है द्वेष कहीं भी
अनुराग मन भरे रे
फागुन फाग सजे मतवाले
रंगा बिरंगी टोली रे।
फागुन आया होल...

























