प्रदूषण का पिंजरा
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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झर-झर बहते झरने
कल-कल बहती
नदियों की आवाजें
मानो गुम सी हो गई हो
या हम बहरे हो गए
ये समझ में नहीं आता।
सोचता हूँ
कैद कर लिए होंगे
इन्हें प्रदूषणों के पिंजरों में
किसी ने
इनके मीठे शोरों को।
पर्यावरण को बचाने हेतु
शुष्क कंठ लिए मृगतृष्णा सा
भटकता इंसान
क्या इन्हे प्रदूषण
मुक्त कर पाएगा।
श्रमदान से
नदियों को पुनर्जीवित करके
इंसान माँग ले यदि वरदान
भागीरथ सा
तो फिर से
झर-झर बहते झरने
कल-कल बहती
नदियों की आवाजें
इस धरा पर पा सकता है।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशि...






















