हिन्दी मेरी माँ
संजय जैन
मुंबई (महाराष्ट्र)
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मैं हिन्दी का बेटा हूँ
हिन्दी के लिए जीता हूँ।
हिन्दी में ही लिखता हूँ
हिन्दी को ही पढ़ता हूँ।
मेरी हर एक साँस पर
हिन्दी का ही साया है।
इसलिए मैं हिन्दी पर
जीवन को समर्पित करता हूँ।।
करें हिन्दी से सही में प्यार
भला कैसे करें हिन्दी लिखने,
पढ़ने और बोलने से इंकार।
क्योंकि हिन्दी बसती है
हिंदुस्तानीयों की धड़कनों में।
इसलिए तो प्रेमगीत भक्तिगीत
हिन्दी में लिखे जाते।
जो हर भारतीयों का
गौरव बहुत बढ़ाते है।।
करो हिन्दी का प्रचार प्रसार
तभी तो राष्ट्रभाषा बन पायेगी।
और हिन्दी भारतीयों के
दिलो में बस पायेगी।
चलो आज लेते हैं हमसब
एक शपथ, करेंगे हर काम
आज से सदा हिन्दी में। तभी
मातृभाषा का कर्ज उतार पाएँगे
और सच्चे भारतीय कहलाएँगे।।
परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में क...
























