षडयंत्र आतुर हैं
प्रमोद गुप्त
जहांगीराबाद (उत्तर प्रदेश)
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जन संख्या की, जब यहाँ भरमार है
ये महंगाई का मुद्दा तो सदाबहार है।
जब चाहो विरोध कर सकते हो तुम
कोई मौसम या फिर कोई सरकार है ।
दिखीं नहीं तुमको निन्यानवें अच्छाइयां
मेरी ही एक गलती पर बस टकरार है।
देश निगलना चाहते हैं, वह नास्ते में
कहते हैं हमको भी तो इससे प्यार है ।
षडयंत्र आतुर हैं, आस्तित्व मिटाने को
ये अपनी संस्कृति भी, बहुत लाचार है ।
अहिंसा के जाल की तासीर तो देखो
इसे हम समझ बैठे कि शीतल बयार है ।
सबके सुख की, क्यों करें हम कामना
जब दरिन्दों के, हर हाथ में तलवार है।
तुम जो हमको, घाव देते जा रहे हो
चुकायेंगे, ये तेरा हम पर जो उधार है ।
जब संघर्ष करना ही पड़ेगा, देर क्यों
या फिर बता की मिटने को तैयार है ।
परिचय :- प्रमोद गुप्त
निवासी : जहांगीराबाद, बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश)
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