बदरा घिर आये
मनोरमा जोशी
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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गगन घन घिरे,
पवन फिर उड़े,
घटा बन छायों रे,
सावन आयो रे।
उगेगीं अब नयी कोपलें,
लहरायेगी बैले,
अठखेली कर रही
रशमियां, हरियाली खेले,
घरती ने श्रृंगार किया है,
रुप अनोखा पायो रे।
सावन आयो रे।
गुन-गुन कर रहीं चिरैयां,
नया संदेशा लाये,
भंवरें की गुंजन सुनके,
कलियां भी मुस्काये,
फूलों से सज गया बगीचा
राग मल्हार सुनाये रे
सावन आयो रे।
चैती की गर्मी से उबरे,
जीवन नया मिला है,
दुखः के बौने पाँव हुऐ है,
सूरज मुखी खिला है,
धरती से अंबर तक किसने
धानी रंग बगरायो रे,
सावन आयो रे।
परिचय :- श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है।
शिक्षा - स्नातकोत्तर और संगीत है।
कार्यक्षेत्र - सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। ले...

























