मन
होशियार सिंह यादव
महेंद्रगढ़ हरियाणा
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वक्त बुरा नहीं होता, बुरे होते विचार,
मन मेरा प्रसन्न हो तो,लोग करें प्यार,
मन को काबू कर, बन सकता महान,
मन मंद वेग मेें हो, बन जाए पहचान।
मन की गति समझ नहीं पातेे, कितने,
जगत हुये पंडित और हजारों विद्वान,
मन पर काबू किया, साधु, संत महान,
काबू से बाहर मन, राक्षस उन्हें जान।
फूल सा मन था, जब होता था बच्चा,
मेरा मन कहता था, दिल का हूं सच्चा,
काम मन से किया, लगता था अच्छा,
छल पट से दूर था, इसलिए था बच्चा।
हुआ युवा,मन जवां, करता उल्टी बातें,
मेरे मन से सोच में, कट जाती थी रातें,
मन मलिन हो गया, कुत्सित थे विचार,
मन की मेरी समझे, घट का जन प्यार।
हुआ बुजुर्ग आज मैं, नहीं रहा ये जवां,
बुरे भले विचार पले,नहीं रहा मन जवां,
सोच विचार करता, शुभ वक्त दिया गवां
सूखा पेड़ बन गया, खुश्क हो गई हवा।
एक दिन मेरा मन, यूं कहने लगा मुझसे,
अभी वक...























