रोशनी बन जगमगाओ
रूपेश कुमार
(चैनपुर बिहार)
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प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे मे,
रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे मे,
दिलो का मिलना दिवाली का ये पैगाम,
दुरिया दिल का मीटाओ इस अंधेरे मे !
अजननी है भटक न ज़ाए कही मंजिल,
रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे मे,
ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए,
कोई हमसफर हमदम बनाओ इस अंधेरे मे !
हाथ को न हाथ सुझे आज का ये दौर,
रोशनी बन जगमगाओ इस अंधेरे मे,
अंध विश्वासो के इस मन्दिर मजारो मे,
सत्य की शमा ज़लाओ इस अंधेरे मे !
रोशनी बन जगमगाओ इस अंधेरे मे....!
लेखक परिचय :-
नाम - रूपेश कुमार छात्र एव युवा साहित्यकार
शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी, इसाई धर्म (डीपलोमा), ए.डी.सी.ए (कम्युटर), बी.एड (महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली यूपी) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !
निवास - चैनपुर, सीवान बिहार
सचिव - राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान
प्रकाशि...























