रणभेरी को सुनना होगा
विवेक नीमा
देवास (मध्य प्रदेश)
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लोथ के ये दृश्य वीभत्स
मानवता को दहलाते हैं
काफ़िर हैं वो हत्यारे जो
निर्दोष को मार गिराते हैं।
धर्म की बंदिश रखकर ये
क्या खेल लहू का खेलेंगे
हम अमन पसंद इंसानों का
क्या धैर्य खून से तौलेंगे?
इतिहास गवाह जयचंदों ने
हम पर सदा आघात किया
हमने शांति चाही सदा
दुष्टों ने नित वज्रपात किया।
हम कफ़न बांध लड़ जाएंगे
कब तक ही चुप बैठेंगे
जब बांध सब्र का टूटेगा
घाटी में समर भी खेलेंगे।
पुलवामा या पहलगाम
कब तक भारत ये झेलेगा
ये दंश मौत का दिया तुमने
प्रतिशोध हर कतरे का लेगा।
भारत भूमि का स्वर्ग कहाँ
ये दर्रा निर्दोष रुधिर का है
शोणित का बदला शोणित हो
मत ये हर सुधीर का है।
चंद्र सुभाष सा सौदा फिर
हम सबको ही बुनना होगा।
अमन की बातें छोड़ अभी
रणभेरी को सुनना होगा।
परिचय : विवेक नीमा
निवासी : देवास (मध्य प्रदेश)...



















