बातें हैं
आयुषी दाधीच
भीलवाड़ा (राजस्थान)
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बातें हैं, बातों का क्या,
बातें तो चूड़ी की तरह होती है,
जो घूमकर फिर वही आ जाती है,
बातें है, बातों का क्या।
तुम जितना उसे समझना चाहोगें,
जितना उन पर घोर करोगें,
वो उतनी ही तुम्हें उलझती नजर आयेंगी,
बातें हैं, बातों का क्या।
बातें पेंच की तरह होती हैं,
उसे जितना कसो वो कसती ही जाती हैं,
उसे जितना मोड़ो वो मुड़ती ही जाती हैं,
बातें हैं, बातों का क्या।
बातें हैं, बातों का क्या।
यें बातें ही तो, क्या कुछ करवाती हैं,
किसको झुठा, किसको सच्चा बतलाती हैं,
बातें हैं, बातों का क्या।
परिचय :- आयुषी दाधीच
शिक्षा : बी.एड, एम.ए. हिन्दी
निवास : भीलवाड़ा (राजस्थान)
उद्घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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