बोलो पीर सहूँ मैं कब तक
अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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बोलो पीर सहूँ मैं कब तक,
तुम्हें दया नहिं आती।
पेड़ काट कर गिरा रहे हो,
फटती मेरी छाती।
धरती माता बोल रही हूँ,
अपना दर्द सुनाती।
माँ का सीना छलनी करते,
तुझे लाज नहिं आती।
तेरा बचपन मुझ पर बीता,
अब यौवन पाया है।
अपने आँचल तुझे दुलारा,
दी शीतल छाया है।
पर्वत सब उरोज हैं मेरे,
बनी वृक्ष से काया।
माँ का कर्ज आज तक तूने,
क्यों कर नहीं चुकाया?
सभी जीव छाया पाते हैं,
कोयल मधुरिम गाती।
जब कटते हैं वृक्ष धरा से,
छलनी होती छाती।
ओ निष्ठुर, बेदर्दी मानव,
पीर बढ़ा मत मेरी।
कब तक पीर सहूँ मैं बोलो?
माता हूँ मैं तेरी।
परिचय :- अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवासी : निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.एस.सी एम.एड स्वर्ण पदक प्राप्त
सम्प्रति : वरिष्ठ व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक २ निव...






















