दिल में फगुनाहट हुई
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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दिल में फगुनाहट हुई, मनवा चंचल आज।
अभिलाषा यह पल रही, करूँ प्रेम का काज।।
रंग घुल गए प्रीति में, मौसम है रंगीन।
दिल सजनी को खोजता, है प्रकरण संगीन।।
यौवन है जज़्बात पर, बहकी-बहकी चाल।
मधुमासी आवेश है, हर प्रेमी बेहाल।।
साजन को तिरछी नज़र, देख रही भरपूर।
सजनी के मुख पर खिला, आफ़ताब का नूर।।
शीतल चलती है हवा, फागुन का अंदाज़।
सकल उदासी दूर अब, प्रेम बना अधिराज।।
अब अबीर इठला रहा, लिए सरस पैग़ाम।
मीत याद आने लगा, सबको सुबहोशाम।।
फागुन में है चेतना, गाता स्नेहिल गीत।
मिलन-विरह का दौर है, प्रेम गया है जीत।।
यौवन है आवेग में, बाँहों में आकाश।
सिकुची धरती लाज से, अवसादों का नाश।।
होली आशा को वरे, विश्वासों का काल।
रंग घुल गए सोच में,प्यार हुआ बेहाल।।
पुरवैया ज़ालिम हुई,मारे दिल पर तीर।
होली ...


















