वसंत ऋतु आगमन
राम बहादुर शर्मा "राम"
बारा दीक्षित, जिला देवरिया (उत्तर प्रदेश)
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आया वसंत, आया वसंत,
कर शरद शिशिर का पूर्ण अंत।
आया वसंत, आया वसंत।।
जाड़े से आई जड़ता जो,
जीवन संवेग को थाम लिया,
जमता कर्तापन इससे पहले,
किस ऋतु ने उसे विराम दिया,
है महक उठी प्रकृति सारी,
संग महका सारा दिग दिगंत।
आया वसंत, आया वसंत।।
स्वागत करने को सज संग,
पछुआ लेकर आया पतझड़,
जीर्ण शीर्ण पत्रक उतार,
तरु लता कुंज बनकर निर्मल,
नूतन स्वरूप हर शाखा पर,
अनुपम सौंदर्य लेकर हेमंत।
आया वसंत, आया वसंत।।
पाटल मंदार के पुष्प गुच्छ,
गेंदा कनेर के पीत पुष्प,
खेतों में लहराती सरसों,
उन पर भी पीले खिले पुष्प,
भू पीत वर्ण श्रृंगार किए,
बिखरा सर्वत्र बसंती रंग।
आया वसंत, आया वसंत।।
नस नस में जगाता नया जोश,
जड़ चेतन सब हुए मदहोश,
कलियों में हवन अंगड़ाई भरता,
हर भ्रमर देख खो ...























