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भारतवर्ष में भारतीय पर्वों की सार्थकता
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भारतवर्ष में भारतीय पर्वों की सार्थकता

सुरेखा सुनील दत्त शर्मा बेगम बाग (मेरठ) ********************** भारत वर्ष में प्राचीन काल से ही विभिन्न पर्वों और त्योहारों को मनाया जाता रहा है। यदि कहां जाए कि भारतीय संस्कृति पर्व, उत्सव व त्यौहारों में बसती है, तो अतिशयोक्ति न होगी। त्योहार उत्सव पर्व हमारी संस्कृति के मेरुदंड हैं। समाज में जब-जब स्थिरता आई उसकी प्रगति अवरुद्ध हुई, तभी उन्होंने उसे गति प्रदान करने की और मनुष्य को भविष्य के प्रति आस्थावान बनाने में योगदान दिया। आज की सदी का मनुष्य इन पर्वों को रूढ़िवादिता का परिचायक मानने लगा है, उसकी दृष्टि में यह तीज त्यौहार पुरातन ता के परिचायक हैं। इनमें आस्था रखने वाला मनुष्य पिछड़ा हुआ है। पुराने विचारों का है। उसे मॉडर्न सोसाइटी का अंग नहीं माना जाता परंतु आज वास्तव में क्या ऐसा है? नहीं! भारतवर्ष में मनाए जाने वाले प्रत्येक पर्व अपने ही देश के हैं वह सार्थक हैं। किसी भी छोटे ...
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धुंध में लिपटी राजधानी

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ********************   दीपावली के तीन दिनों बाद हमारे देश की राजधानी दिल्ली धुंध के काले आवरण से ढँक चुकी थी।दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण की दर बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार १६०० बड़े शहरों में दिल्ली प्रदूषण में सबसे आगे हैं। भारत मे दिल्ली के अलावा ग्वालियर व रायपुर में भी वायु प्रदूषण अधिक है। वायु प्रदूषण से दिल्ली में २.२ मिलियन और पचास फीसदी बच्चे फेफड़ों सम्बधी बीमारी से ग्रसित है। दिल्ली पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड ने हालात गम्भीर होते देख मेडिकल इमरजेंसी घोषित की है।आज दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर को पार करते हुए ४५० से ऊपर पहुंच गया जो कि अब तक का सबसे अधिक है। दिल्ली सरकार ने स्कूलों में कुछ दिनों तक छुट्टियां घोषित कर दी है। बढ़ते वायु प्रदूषण से लोगों को हृदय रोग, स्ट्रोक, स्वास से सम्बन्धी पर...
हिंदी में कार्य ही, मातृभाषा की सही स्तुति होगी
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हिंदी में कार्य ही, मातृभाषा की सही स्तुति होगी

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** देवनागरी लिपि में ग्यारह स्वर और तैतीस व्यंजन से बनी होती है| हिंदी में वैज्ञानिक भाषा समाहित है।अंग्रेजी भाषा में ये खूबी देखने को नही मिलती।इसमें शब्दों के उच्चारण मुँह के अंगों से निकलते है।जैसे कंठ से निकलने वाले शब्द,तालू से,जीभ से जब जीभ तालू से लगती,जीभ के मूर्धा से,जीभ के दांतों से लगने पर,होठों के मिलने पर निकलने वाले शब्द ।अ, आ  आदि शब्दावली से निकलने वाले शब्द इसी प्रक्रिया से बनकर निकलते है।इसी कारण हमें अपनी भाषा पर गर्व है।आज भी कई स्थानों पर दुकानों के बोर्ड अंग्रेजी में टंगे होते है |हिंदी में लगाने से उनका स्टेट्स कम होता है ऐसा उनका मानना है |नौकरी व्यापार में भी यही हालत है |अंग्रेजी का होना आवश्यक |जबकि शासन हिंदी को शासकीय कार्य में प्राथमिकता देने हेतु हर साल कहता आया है|सोशल मिडिया पर हिंदी के भंडार है किंतु उसक...
हर घर एक वृद्ध को गोद ले
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हर घर एक वृद्ध को गोद ले

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** हमारे देश मे १२ करोड से ज्यादा जनसंख्या ६० वर्ष के उपर के वृद्ध लोगो की है। और सन २०२५ तक यह २५ करोड से ज्यादा होने की संभावना है। वरिष्ठ नागरिको की संख्या मे होने वाली वृद्धी को एक चरम संकट की चेतावनी ही समझी जानी चाहिये। २५ करोड़ वरिष्ठ नागरीकों का मतलब दुनिया में चीन और अमेरिका को छोड़ दिया जाय तो यह किसी भी राष्ट्र की जनसंख्या से ज्यादा होगी। पश्चिमी राष्ट्रों में संयुक्त परिवारों का विघटन बहुत पाहिले ही हो चुका है। परन्तु हमारे देश में इसकी शुरवात पिछले ३० -४० वर्षो में हुई और विगत १० वर्षो में इसकी गति बहुत तेज रही है। पश्चिमी राष्ट्रों की तुलना में हमारे यहां संयुक्त परिवारों का विघटन देर से होने के कारण हमारे यहां संयुक्त परिवारों का सुख भोग चुके वृद्ध आज भी उन यादों को संजोये हुए है। वृद्धावस्था में आने वाले संकटों का सामना सभी...
मैंने एक गाँव को मरते हुए देखा है
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मैंने एक गाँव को मरते हुए देखा है

सलिल सरोज नई दिल्ली ******************** बेगूसराय मुख्यालय से १८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नवलगढ़ जो कि कालांतर में नौलागढ़ बन गया, इस त्रासदी का शिकार हुआ। अगर आप इसके इतिहास में जाएँ तो यहाँ विग्रा पाला ... के शिलालेख के साथ एक काले पत्थर टूटी मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं जो कि इसके ऐतिहासिक धरोहर की वैभवता की कहानियाँ कहता है। आज हम आदर्श और स्मार्ट शहर की बात करते हैं लेकिन यह गाँव आज से कुछेक २० -२५ साल पहले तक एक जीता जागता सुन्दर और रमणीय गाँव था। शहर में काम करने वालों को गाँव से इतना प्रेम था क़ि लोग २ घंटे साईकिल चलाकर भी शनिवार की सुबह-सुबह गाँव पहुँच जाते और दो दिन उस ज़िंदगी को जीते थे। गाँव की चौहद्दी से बालान और बैंती नदी इसका श्रृंगार करती थी जहाँ लोग सुबह की सैर, स्नान एवं छठ के त्यौहार तक को सम्पन्न किया करते थे। कच्चे घरों की छत और दीवारों पर साग -सब्जियाँ भरी होती थीं...
प्रदूषित सांसे और जिंदगी
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प्रदूषित सांसे और जिंदगी

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** दिल्ली का प्रदूषण इतना बढ़ गया है की सांस लेना मुश्किल हो गया है। जिसके चलते दिल्ली सरकार को एहतियात के तौर पर स्कूलों में ४ नवंबर तक की छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। ४ नवंबर से यातायात मे सम और विषम नंबर का कानून भी कुछ दिन के लिए लागू किया जा रहा है जिससे कुछ हद तक यातायात और प्रदूषण को लेकर आवाम को कुछ राहत मिल पाएगी। सवाल यह उठता है की प्रदूषण का कारण क्या है? जबकि इस साल दिवाली पर एक बड़ी संख्या में लोगों ने पटाखे नहीं जलाए। पटाखों को लेकर सख्त कानून बनाया गया है मगर फिर भी वातावरण दूषित है। वातावरण में धुंआ फैला हुआ है जो अत्यंत हानिकारक और जानलेवा साबित हो रहा है। इस बात से सरकार और आवाम ना खबर नहीं कि यह प्रदूषण खेतों में जलाए जाने वाली पराली से है। अनाज काटने के बाद जो अवशेष बच जाते हैं उसे पराली कहा जाता है जिसे बाद में जला दिया जाता है। ...
बच्चों को तराशने वाला जौहरी कौन? भाग-2
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बच्चों को तराशने वाला जौहरी कौन? भाग-2

विनोद वर्मा "आज़ाद"  देपालपुर ********************** प्राथमिक संस्था में छात्र/छात्राओं काठहराव होने के साथ प्रारंभिक स्तर पर जहां पुस्तक पढ़ना, ऐकिक नियम तक के सवाल करना, अंग्रेजी मे छोटे वाक्य समझने के साथ चाल-चलव अंग्रेजी समझ लेते है। पर्यावरण में अपने आसपास के वाता वरण को समझकर चिंतन करने बालसभा खेल की प्रथम पाठ शाला इतना ज्ञान प्राप्त कर लेते है। माध्यमिक में आने पर उसे नया माहौल मिलता है। जहां गुरु पूर्णिमा, शिक्षक दिवस, तुलसीदास आदि जयन्तियां मनाने के साथ नियमित उपस्थिति, सख्ती प्रार्थना, खेलकूद, बाल सभा क्रिकेट, खो-खो,कबड्डी के साथ साहित्यिक एवम सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सहभागिता करने का अवसर मिलता है। प्राथमिक में एक क्लास को एक शिक्षक ही पूरे समय पढ़ाते है जबकि माध्यमिक में पीरियड पद्धति प्रारम्भ होती है। हर पीरियड पश्चात नए शिक्षक पढ़ाने आते है यानि विषय शिक्षक, यह रोचकता प...
मुद्दे ! समस्यांएंऔर उनकी परिणति
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मुद्दे ! समस्यांएंऔर उनकी परिणति

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा कह सकते है। मुद्दों के बारे में यह कि तात्कालिक विषयों को हम जब अल्पावधि में विचार कर तर्क संगत परिणिति तक पहुचाते है तब उन्हें मुद्दे कहना न्याय संगत होता है। मुद्दों को जब हम समय के अभाव में या पसंद नापसंद के धरातल पर तोलकर या अहंकारवश या और किसी कारण से अतार्किक पद्धति से परिणिति तक पहुचाने का प्रयास करते है तब मुद्दा अपना मूल रूप और क्षमता खो देता है। फिर जो बचता है वह मुद्दे को तर्क वितर्क और कुतर्क के साथ एक मजबूत अहंकार में बदल देता है। इसके बाद जो परिणाम होते है वह स्वार्थो का टकराव और अहंकार का शिखर जो स्पष्ट रूप से आचार विचार और व्यवहार में परिलक्षित होता है। मेरा अपना स्पष्ट मानना है कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हो इनसे अपने आप को बचाए रखना चाहिए। परिस्थितियों पर नियंत्रण नहीं हो सकने के कारण मुद्...
बच्चों को तराशने वाला जौहरी कौन ?
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बच्चों को तराशने वाला जौहरी कौन ?

विनोद वर्मा "आज़ाद"  देपालपुर ********************** जिन पालकों के पास थोड़ा बहुत पैसा आना शुरू होता है, वह अपने बच्चों कोअशासकीय विद्यालयों में प्रवेश करा देता है।       रेत छानने के चलने में से बारीक रेत छन जाती है व अनुपयोगी बंडे अलग रख दिये जाते है, वैसे ही अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति वाले पालकों के अधिकांश बच्चे शासकीय विद्यालयों में प्रवेश लेते है। उनके प्रवेश के लिए भी शिक्षकों को काफी मशक्कत करना पढ़ती है। देखा जा रहा है झोपड़ पट्टियों,पन्नी-बोतल, लोहा-लंगर बिनने वालों, सस्ता सामान बेचने वालों, भिक्षावृत्ति करने वालों दाड़की, दानी-दस्सी करने वालों के बच्चे लगभग शासकीय विद्यालयों में पढ़ रहे है,कुल मिलाकर कहा जा सकता है यानी क्रीम निकालने के बाद बची छाछ प्रवेशित होती है,ऐसे छात्र चेलेंज के रूप में स्वीकार किये जाकर छाछ में से पुनः मंथन कर क्रीम निकालने का दुष्कर कार्य शिक्षक को करना ...
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दीपावली मिलन का त्योहार है

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ********************   कार्तिक मास की अमावस्या को हम प्रतिवर्ष दीपावली का त्योहार मनाते हैं। भगवान श्री रामचन्द्र जी चौदह वर्ष के वनवास के बाद वापस इसी दिन अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी से अयोध्या की प्रजा ने घी के दीप जला कर रोशनी की थी। भगवान के अवध पधारने के लिए उनका स्वागत सत्कार अगवानी की थी। दीपावली प्रकाश का त्योहार है। व्यक्ति अपने आप मे एक प्रकाश है। लोग इस दिन मिठाइयां बांटते है। खुशी मनाते हैं। नये वस्त्र पहनते हैं।सारे दुख दर्द भूल जाते हैं।पटाखे चलाते हैं। धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजन करते हैं।ऐश्वर्य सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इस त्योहार पर बैलों गायों के साथ पशुधन की पूजा भी की जाती है। आज के दिन बुद्धिमत्ता का प्रकाश सबके भीतर होता है।जीवन का उत्सव लोग खुशी से मनाते हैं।धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी की पूजा कर लोग समृद्धि ...
एक राष्ट्र–एक चुनाव
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एक राष्ट्र–एक चुनाव

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** विश्व में आज हमारा लोकतंत्र जितना स्थिर, स्थायी, मजबूत और परिपक्व हैं, उतना ही हमारा मतदाता भी परिपक्व होता जा रहा हैंI ऐसे में यह भी सोचना होगा कि क्या ‘एक राष्ट्र एक चुनाव‘ यह देश का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा हैं या महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए एक और नया मुद्दा हमें परोसा जा रहा हैंI भले ही सारे राजनितिक दल और नेता पुरानी तरह से सोचते हो परन्तु वास्तविकता यह हैं कि तकनिकी विकास और सोशल मिडियाने मतदाताओं को परिपक्व किया हैं, इसका अंदाजा नेताओं को शायद नहीं हैं I पक्ष-विपक्ष के राजनितिक दलों के अपने अपने तर्क हो सकते हैं I परन्तु सत्ताधारी और विपक्ष वे ज्वलंत मुद्दे क्यों नहीं उठाते जो देश के सामने विकराल रूप से आज भी चुनौती दे रहे हैं I यह आश्चर्यजनक हैं कि राजनैतिक दल उनके ही द्वारा उठाये गए पुराने मुद्दों को अधूरा छोड़ते जा...
करवा चौथ आस्था और प्रेम
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करवा चौथ आस्था और प्रेम

केशी गुप्ता (दिल्ली) ********************** कुदरत ने औरत को जितना शारिरिक तौर पर कोमल बनाया है उतना ही उसे प्यार , ममत्व से भरा है . हमारी भारतीय संस्कृति पुरूष प्रधान रही है . औरत का अस्तित्व सदैव पुरूष से जोड़ा जाता है . अधिकतर परंम्पराएं या दायित्व  औरत से ही जोड़े  है . करवा चौथ का व्रत भी उन्ही परंम्पराओं का हिस्सा है . अलग अलग धर्मो और जातियों के अपने अलग अलग रिवाज तथा आस्थाएं है .  महिलाएं कई तरह के व्रत रखती है , जिनमें से एक करवा चौथ का व्रत है . जिसे पत्नी अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है . कई कंवारी लड़कियां भी अपने प्रेमी के लिए या गणपति जी से अच्छे पति की  कामना के लिए रखती है . इस व्रत के अनुसार सुबह तारों की छाय में सरगी खाई जाती है , उसके बाद दिन भर चादं निकलने तक पानी या भोजन कुछ नही . चांद निकलने के बाद चादं को अर्क दे कर ही व्रत खुला जाता है . इस व्रत को लेकर स्त्रिय...
लोकतंत्रीय तानाशाही
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लोकतंत्रीय तानाशाही

विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. ****************** भीड़तंत्र की, 'लोकतंत्रीय तानाशाही' पढ़कर और सुनकर अनेक लोग हैरान हो सकते हैं और उन्हें यह विषय हास्यास्पद भी लग सकता हैं, परन्तु वस्तुस्थिति यह हैं कि हम लोकतंत्रीय तानाशाही की ओर बढ़ रहें हैं, जहाँ किन्ही चयनित या निर्वाचित कुछ ख़ास व्यक्तियों को व्यवस्था रूपी तंत्र निर्णय लेने के सारे अधिकार सौप देती हैंI एक दो व्यक्ति, चाहे घर हो या बाहर, या हो राष्ट्र में, योग्य निर्णय लेने की असीम एवं निष्पक्ष क्षमता नहीं रख सकते, बल्कि यह कहें कि सुचारू व्यवस्था के लिए और नित नयी समस्याओं के समाधान हेतु किसी एक या दो व्यक्तियों को योग्य और सक्षम निर्णय लेना संभव ही नहीं हो सकता I लोकतंत्रीय तानाशाही में सलाहकार भी एक वृत्त और उसकी परिधि की चकाचौंध से भ्रमित हो उन्हें योग्य सलाह देने का साहस ही नहीं जुटा पाते, क्योंकि उन्हें हमेशा यह भय सताता रहता ह...
आलेख, धर्म, धर्म-आस्था

सौभाग्यवती स्त्रियोँ का पर्व करवा चौथ

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ******************** हिंदुओं का पवित्र त्योहार करवा चौथ सम्पूर्ण देश मे कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक  सभी महिलाएं करवा चौथ का व्रत अवश्य करती है। उनमें बड़ी श्र्द्धा व विश्वास उत्साह के साथ सौभाग्यवती स्त्रियां इस पर्व को मनाती हैं। इस पर्व को होई अष्टमी  या तीज की तरह ही उल्लास से मनाया जाता है। पति की दीर्घायु व  अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। दिन भर उपवास रखकर रात में चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद  ही भोजन का विधान है। अपने परिवार में प्रचलित परम्परा के अनुसार ही करवा चौथ महिलाएं मनाती है।लेकिन निराहार बिना जल ग्रहण किये दिन भर महिलाएं उपवास रखती है। चन्द्रोदय होने पर पूजा करती है। अर्ध्य देती है। फिर आंक में अपने पति का ...
आलेख, स्मृति

यादों का गुलदस्ता …

राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित" भवानीमंडी (राज.) ******************** मिसाइल मेन देश के प्रसिद्ध अभियन्ता व भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम साहब का जन्म १५ अक्टूबर १९३१ को धनुष कौड़ी ग्राम रामेश्वरम तमिलनाडु में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में जन्मे थे। इनके पिताजी मछुआरों को नाव किराये पर देने का काम करते थे। इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन अधिक पढ़े लिखे नही थे। अब्दुल कलाम सयुंक्त परिवार में रहते थे। संयुक्त परिवार में सदस्य कितने थे इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि कलाम साहब के पांच भाई व पांच बहने थी घर मे तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम पर इनके पिताजी का बहुत प्रभाव पड़ा। वे चाहे पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन उनके दिए संस्कार उनके काम आए। पांच वर्ष की आयु में कलाम को रामेश्वरम की पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में भर्ती कराया गया। उनके शिक्षक सोलोमन ने उनसे कह...
कितना राष्ट्रप्रेम कितनी राष्ट्रभक्ती
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कितना राष्ट्रप्रेम कितनी राष्ट्रभक्ती

********* विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. किसी भी राष्ट्र की भौगोलिक सीमा ये उस राष्ट्र का अस्तित्व, महत्व, और पहचान के लिये पर्याप्त नही होती। जमीन पर दिखने वाली इस सीमा रेखा के अंदर उस राष्ट्र के नागरिकों के अपने राष्ट्र के प्रति जो आदर, जो कर्तव्य, जो प्रेम और अपनत्व की भावनाएं अपने परिपक्व स्वरूप मे होती है, और यह सब जब राष्ट्र के नागरिकों के व्यवहार और आचरण मे प्रत्यक्ष रूप से परिलक्षित होती है, तब हम इसे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती कह सकते है। राष्ट्र के स्थायित्व और सर्वांगीण उन्नती के लिए तथा भावनात्मक रूप से राष्ट्र को एक सूत्र मे पिरोये रखने के लिए इसी राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती की नितांत आवश्यकता होती है। - इतिहास साक्षी है कि राष्ट्रप्रेम के अभाव मे भारत का विभाजन हुआ। आगे संयुक्त पाकिस्तान मे भी नागरिकों के राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ती की भावनाओं का ऱ्हास होने के कारण ...
कौन है शत्रू राष्ट्रभाषा के ?
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कौन है शत्रू राष्ट्रभाषा के ?

********* विश्वनाथ शिरढोणकर इंदौर म.प्र. हमारे देश मे तामिलनाडू राज्य मे हिंदी भाषा के लिये कुछ असंवेदनशीलता देखने को मिलती है और वैसा हमे प्रत्यक्ष अनुभव भी होता है परंतु यह भी सच हैं कि, तामिलनाडू राज्य मे उनकी मातृभाषा के लिये गौरव, सन्मान और अभिमान और आत्मीयता भी उन्हें अनुभव होती है I राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे मे तामिल जनता से और राज्य के राज्यकर्ताओ से अन्य भारतीयो का कितना भी मतभेद हो परंतु एक राष्ट्रभक्त होने के नाते हमे निश्चित ही तामिलों की भावनाओ का आदर भी करना चाहिये, और मातृभाषा के प्रती उनके लगाव के कारण हमे गौरवान्वित भी होना चाहियेI हमे इस हेतू निश्चित ही संतुष्ट भी होना चाहिये कि एक राज्य की भाषा (तमिल) को, संस्कृती को और अस्मिता को सहेजकर और सुरक्षित रखने के लिये वहां के लोग जी जान से जुटे है और भावनिक दृष्टी से अपनी मातृभाषा से भी जुडे हुए है परंतु राष्ट्रभाषा हिंद...
कैलाश विजयवर्गीय एवं चिंटू वर्मा विश्व बुक ऑफ रेकॉर्ड लंदन द्वारा सम्मानित
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कैलाश विजयवर्गीय एवं चिंटू वर्मा विश्व बुक ऑफ रेकॉर्ड लंदन द्वारा सम्मानित

*********** विनोद वर्मा "आज़ाद"  देपालपुर बात उन दिनों की है जब धार्मिक गतिविधियों के प्रचार - प्रसार की शुरुआत को कोई ५,६ साल ही हुए थे। उस काल मे चुनिंदा जगह नवरात्रि में गरबे, भजन, कवि गोष्ठियां,कवि सम्मेलन, आर्केस्ट्रा आदि होना प्रारम्भ हुए थे। ऐसे वक्त में नगर के एक उदीय मान बालक जिसकी उम्र लगभग १७ वर्ष थी ने हिम्म त जुटाई और अपने कुछ मित्रों को साथ लेकर अति प्राचीन देवी माता मंदिर पर प्रथम भजन संध्या का आयोजन किया, जिसमे एक सशक्त राजनेता ने उस भजन संध्या में अपनी युवा संगीत मंडली के साथ भजनों की शुरुआत की। छोटा सा मंच ओटले पर बना हुआ, वही माता एवम बहनों की अपार भीड़, पुरुषों का भी भारी जनसमूह इस भजन संध्या में भजनों की बयार का आनन्द लेने उप स्थित था। रात्रि ३ बजे तक भजन संध्या में माता के भजनों एवं राष्ट्रीय गीतों के साथ "मां तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है ...
कक्षा दसवीं के बाद सही विषय का चुनाव
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कक्षा दसवीं के बाद सही विषय का चुनाव

************ पूर्वा परमार राऊ, इंदौर अक्सर हमारे मित्र या परिचित हमसे पूछते हैं कि क्या दसवीं के बाद मैं अर्ट्स का चुनाव करूं या गणित ? क्या मैं इंजीनियर बनूं या डॉक्टर? क्या मै गायक बनकर पैसे कमा सकता हूं? क्या नृत्य मेरी आजीविका का साधन बन सकता है? ऐसे असमंजस से हर कोई गुजरता है। तो ऐसे में सही विषय का चुनाव आपके लिए आगे के रास्ते खोलता है और आपको अपने पसंदीदा नौकरी या व्यसाय चुनने में मदद करता है। इस स्तिथि में सबसे अहम भूमिका माता पिता की होती है। ज़रूरी यह है कि पालक अपने बच्चों से चर्चा करें उनका मत जानें क्युकिं ऐसे समय में जब हम दसवी की परीक्षा दे रहें हैं, हमें समझ नहीं आता कि हम किस ओर आगे बढ़ें? अब ऐसे वक्त में हमें यानि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को क्या करना चाहिए? आप जानें कि आपके बालक कि रुचि किस विषय में है। उसके बाद उस दिशा में पढ़ रहे या कार्य कर रहे रिश्तेदा...
गरुण पुराण के अनुसार दूसरे का घर तोड़ने वाले व्यक्ति को नरक में भी जगह नहीं मिलती
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गरुण पुराण के अनुसार दूसरे का घर तोड़ने वाले व्यक्ति को नरक में भी जगह नहीं मिलती

********** अमित राजपूत उत्तर प्रदेश गरुण पुराण के हिसाब से दूसरों का परिवार खराब करने वाले व्यक्तियों को नर्क में भी स्थान नहीं मिलता ऐसे व्यक्ति मृत्यु पश्चात भी प्रेत योनि को प्राप्त होते  हैं और दरबदर भटकते रहते हैं जिन्हें मोक्ष प्राप्त नहीं होता मिट्टी के घड़े और परिवार की कीमत उसे बनाने वाले को पता होती है तोड़ने वाले को नहीं इसलिए सदैव हर किसी व्यक्ति के घर को टूटने से बचाना चाहिए ना कि उसे तोड़ने का प्रयास करना चाहिए कुछ ईर्ष्या वान व्यक्ति अपने दुख से नहीं दूसरे के सुख से परेशान होते हैं यह वह व्यक्ति होते हैं जो पूरी जिंदगी सब कुछ होते हुए भी बेचैन रहते हैं क्योंकि उन्हें इस बात से परेशानी होती है कि सामने वाला व्यक्ति सुखी जीवन किस प्रकार व्यतीत कर रहा है ऐसे व्यक्ति अच्छा खासा कमाते हुए भी ना तो जीवन भर कुछ जोड़ पाते हैंऔर ना ही पारिवारिक सुख प्राप्त कर पाते हैं ...
हिन्दी हमारी जीवनशैली एवं हमें हमारी मां की तरह प्यारी है
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हिन्दी हमारी जीवनशैली एवं हमें हमारी मां की तरह प्यारी है

शिवांकित तिवारी "शिवा" रीवा मध्य प्रदेश ******************** हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट,हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम हैं। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे जुड़ाव रखती है और हम भी मां हिन्दी के बिना अपने अस्तित्व की कभी कल्पना नहीं कर सकते। क्योंकि मां के बिना बेटे की कल्पना बिल्कुल असम्भव है। जब भी हम हिन्दी भाषा में बात कर रहे होते है,तो हमें ऐसा प्रतीत होता है कि हम अपनी बोली में अपनेपन एवं आत्मीयता के भावों में बंधकर बात रहे है। हिन्दी का हमारी जीवनशैली में अहम योगदान है,क्योंकि और सभी भाषाओं का उपयोग हम अपने गांवों में,अपनी मांओं से या अन्यत्र लोंगो से नहीं कर सकते क्योंकि वो उतने पढ़े लिखे नहीं होते और ना ही वो हमारी और किसी भाषा के बारे में अच्छी तरह परिचित होते है,लेकिन हमारी हिन्दी भाषा से सब विशेष रूप से परिचित होते ...
सांस्कृतिक प्रशिक्षण में हिंदी विरोध
आलेख, स्मृति

सांस्कृतिक प्रशिक्षण में हिंदी विरोध

*********** रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" २००७ में मुझे शासन स्तर (डाइट प्राचार्य श्री अनिल जी चतुर्वेदी और डीईओ-श्रीमती माया मालवीय इंदौर) से भारतीय सांस्कृ तिक प्रशिक्षण लेने केंद्रीय सांस्कृतिक स्रोत प्रशिक्षण  (सीसीआरटी.) हैदराबाद भेजा गया। २१ दिनी प्रशि क्षण में हमने निर्मल पेंटिंग, मुखौटे बनाना और बुटीक प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम, उड़िया, कन्नड़ भाषा के प्राध्यापकों के व्याख्यान सुने।        प्रारंभिक दिवस हमने उपसंचालक सीसीआरटी श्री पी.एन.बालन द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों से पूछा कि यहां प्रशिक्षण अंग्रेजी में होगा तो हिंदी भाषी राज्यों के समस्त प्रशिक्षणार्थियों के साथ मैने भी अपना स्वर मिलाते हुए कहा-"श्रीमान हम हिंदी भाषी, विदेशी भाषा मे प्रशिक्षण ले यह उचित है क्या ? तब पी.एन.बालन बोले यहां वो लोग भी है जो हिंदी नही जानते या हिंदी कम आती है। तो हमने...
शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार
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शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार

=============================== रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" छात्रों को पूरे समय व्यस्त रखा जाएगा तो वे निश्चित रूप से सफलता पाएंगे। व्यस्त रखने के पूर्व इन बातों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। १ - छात्रों के साथ मित्रवत भाव नवाचार का पहला पद है। २ - प्रत्येक जाति,धर्म,गरीब-अमीर,दादा बहादुर हो या सीधा सा प्राणी सब छात्रों के साथ एकत्व भाव । उनकी गलती पर दंड की बजाय पुरस्कार दीजिये- वो चाहे जिस अनुसार हो यथा- उनसे गीत,कविता,भजन, कहानी सुविचार, पहेली,कहावत,चुटकुले सुनकर ।              या -डांस (नृत्य) करवाकर -मस्ती के साथ दंड-बैठक लगवाकर. -मैदान में दौड़ लगवाकर। -कोई चित्र बनवाकर -आसपास के वातावरण की जानकारी लेकर। -छात्र के मकान में खिड़की-दरवाज़े की बात पूछकर।              या -टॉफी-बिस्किट देकर ।  बच्चों में इस पहल का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मैंने इन गतिविधियों का उपयोग किया है। ३ - "विनोद ...
ऑन लाइन खरीदी का बहिष्कार 
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ऑन लाइन खरीदी का बहिष्कार 

=============================== रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" समसामयिक विषय पर आलेख विदेशों की तर्ज पर भारत में भी ऑन लाइन खरीदी का दौर चल पड़ा है। विदेशों में बच्चे बड़े होकर मम्-डेड से अलग अपनी जिंदगी जीना शुरू कर देते है।कभी-कभी आपस मे कहीं मिल जाये तो दोपहर का खाना(लंच) या रात्रि भोज (डिनर)के लिए एक दूसरे को आमंत्रित करते है,हमारा पड़ोसी कौन ? हमारे रिश्तेदार कौन ये विदेशों में(अपवाद छोड़कर) नही होता। जबकि माता-पिता, भाई-बहन,काका-काकी,भैया-भाभी साथ-साथ रहकर प्रेम और अपनत्व के साथ जीवन जीते है। वहीं मेरे मामा के लड़के की लड़की की सास की भुआ की बेटी की सास की ननंद है,मेरी बेटी की ननद की ननद की भुआ की काकी की जिठानी की बड़ी बहन के बेटे का साला है ये! कितने लम्बे-चौड़े रिश्ते हम भारतीय पालते है। अरे साहब रिश्ते तो रिश्ते पड़ोसी के रिश्तेदारों से भी हम रिश्ते पाल लेते है।शहरों में पूरी कालोनी वाल...
मल्टियों के असल मालिक कौन ….?
आलेख

मल्टियों के असल मालिक कौन ….?

=============================== रचयिता : विनोद वर्मा "आज़ाद" समसामयिक विषय पर आधारित देश मे मल्टियों पर मल्टियाँ तानी जा रही है। यही स्थिति हमारे मध्यप्रदेश और औद्योगिक राजधानी-इंदौर में भी बनती जा रही है। १ बीएचके, २ बीएचके के अतिरिक्त रो हाउस, बंगलो, अपना घर आदि-आदि नाम से लगा तार सीमेंट कंक्रीट के जंगल तैयार किये जा रहे है जहां मानव निवास करेंगे। प्रतिदिन समाचार पत्रों में विज्ञापन दिए जा रहे है। सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। फोन कॉल के द्वारा भी लोगों को साइट पर बुलाया जाकर उन्हें घुमाया जा रहा है। विभिन्न प्रकार के ऑफर चल रहे है। पुरस्कारों के लालच दिए जा रहे है। फटाफट लोन दिए जाने के लिए अनेकों बैंक के साथ लोन प्रोवाइड करवाने वाली संस्थाएं भी अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रयास को आतुर दिखाई दे रहे है। वर्तमान में लोगों को ऐसा भी लगने लगा है कि भविष्य में पता नही हम मकान य...