जय माँ महिषासुर मर्दिनी
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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जय मांँ महिषासुर मर्दिनी
जग के सकल कष्ट निवारिणी
है अस्तित्व ब्रह्मांड का
तुमसे ही आदिस्वरूपिणी
जब न था सृष्टि का अस्तित्व
था अंधकार ही अंधकार
चहुँओर जग में बिखरा हुआ
तब तुम ही सृष्टि-रचनाकार
सूर्य सी देदीप्यमान
तुम सा न कोई कांतिवान
सकल जग की प्रसविणी, माँ
कूष्मांडा सृष्टि रूपिणी
अपनी मंद स्मिति से तूने
की ब्रह्मांड की उत्पत्ति
अपने उपासकों को देती
लौकिक पारलौकिक उन्नति
आधि-व्याधि विमुक्तिनी तू
मांँ सुख-समृद्धि प्रदायिनी
विकार - महिषा का कर मर्दन
मांँ तू शुभ भाव संचारिणी
युग में फैली अराजकता
सबका शमन करो कल्याणी!
परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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