अजातशत्रु
धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)
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पुराने शहर के बगीचे में
सजावट के लिए
वह तोप रखी है,
पता नही उसे अपने
इतिहास पर
गर्व है या शर्मिंदगी।
पास की क्यारियों में
उगे फूलों के पौधे
तोप से डरते नही है,
कई बार वे अपनी
सुखी पत्तियों को
तोप पर उछाल देते है,
हवा के साथ शरारत करते हुए।
एक बालक रोज आकर
खेलता है तोप के साथ
उसे तोप को घोड़ा
बना कर उसकी सवारी करना
अच्छा लगता है।
उसने अपनी चॉक से कई
कपोत बना दिये है,
तोप पर।
कभी कभी वह
गाते गुनगुनाते फूल तोड़ कर
भर देता है, तोप के मुँह में।
फिर दूर खड़ा होकर मुस्कुराते
निहारता है तोप को,
उसे पिता की कही
बात याद आती है,
ये तोप उगलती थी
आग के गोले शत्रुओं पर।
वो सोचता है
अब ये कैसे उगलेगी
आग के गोले,
मैंने तो इसका मुँह
भर दिया है फूलों से।
एक प्रश्न उसे बेचैन
किये हुए है।
क्या होता है ???
शत्रु।
परिचय :- धैर्यशील येवले
जन्म : ३१ अगस्त १९...
























